दुनिया में मौजूद हर प्राणी की अपनी महत्ता है. इंसान, जानवर या पक्षी. सब प्रकृति की ही देन है और इसीलिए सबका प्रकृति पर बराबर का अधिकार भी है. चूकिं इंसान के पास सभी प्राणियों की अपेक्षा ज़्यादा समझदारी और संसाधनों तक पहुंच है तो वो हर चीज़ को अपनी जागीर समझता है.

इंसान समझदार होते-होते कब चालाक और कपटी हो गया पता ही नहीं चला. इसका एक उदाहरण ब्रिटेन में देखने को मिला है. फिलहाल में ब्रिटेन में स्प्रिंग यानि बसंत का आगमन हो गया है. बसंत यानि कि वो समय जब सब कुछ थोड़ा अधिक प्यारा लगने लगता है. सूरज को उगते और डूबते देखना, फूलों का खिलना और पक्षियों का चहचहाना. लेकिन जो खबर सामने आई है उससे लगता है कि शायद ब्रिटेन में कुछ लोगों को पक्षियों से कुछ ऐतराज़ है और वो नहीं चाहते कि पक्षी उनके पेड़ों पर बसेरा करें.

इंग्लैंड में साल के इस वक्त कई जगहों पर लोग अपने पेड़ों पर जाली लगा कर रखते हैं. इस समय इसलिए क्योंकि यही वो समय है जब पक्षी आराम करने के लिए पेड़ों पर अपने घोंसले बनाते है और येलोग ऐसा नहीं होने देना चाहते हैं.

‘द रॉयल सोसाइटी फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ़ बर्ड्स’ एक ऐसी संस्था है जो पक्षियों को बचाने के काम में लगी हुई है. इसका कहना है कि लोग ऐसा इसलिए कर रहे हैं ताकि झाड़ियों और पत्तों की सफाई में कम मेहनत लगे. इसीलिए सभी पेड़ों और झाड़ियों जाली से ढका गया है.

ब्रिटेन में जालियों से ढके गए पेड़। फोटो सोर्स: गूगल

संस्था ने बताया है कि ऐसा करने के लिए लोग पक्षियों के घोंसले भी तोड़ डालते हैं. इसके बाद पेड़ो पर जाली लगा कर उनके फिर से घोंसला बनाने के काम में भी बाधा उत्पनन करते हैं. बहुत ही बड़ी मात्रा में लोग ऐसा कर रहे हैं और इसको लेकर किसी भी तरह का कोई कानून ब्रिटेन में नहीं है.

इंग्लैंड के गिलफोर्ड, वॉरविकशायर और ग्लोचेस्टर और डार्लिंगटन में ऐसी भयावह हरकत की जा रही है. इन जगहों में ज़्यादातर उन जगहों का नाम है जहां नई इमारतों को बनाने का काम चल रहा है.

कई बड़े-बड़े व्यक्ति इसका विरोध कर रहे हैं और इस पर अपनी आपत्ति भी दर्ज करा रहे हैं. वहां रह रहे स्थानीय लोगों ने पेड़ो पर रिबन बांध कर अपना विरोध दर्ज कराया है. जिसकी जवाबी कार्यवाही स्वरूप वहां आस-पास के पेड़ों और झाड़ियों पर लगी जालियां निकाल दी गई.

इस पर बिल्डरों का क्या कहना है?

इस पर बिल्डरों का कहना है कि ऐसा कोई पहली बार नहीं हो रहा है औ इस पर नज़र रखने की कोई प्रक्रिया भी नहीं है. इसके अलावा कई बिलडर्स ने सलाहकारों से बात करने के बाद कहा है कि –

“स्थानीय प्रशासन से बात कर के पर्यावरण सुरक्षा से जुड़ी बातों को ध्यान में रखते हुए ही जालियां लगाई जा रही हैं और ज़रूरत पड़ने पर नए पेड़ भी लगाए जा रहे हैं.”

दायर की गई याचिका

पक्षियों के साथ हो रहे इस अन्याय को देखते हुए लोगों ने ब्रिटेन की संसद की वेबसाइट पर एक याचिका दायर की है. जिस पर लगभग 48000 लोगों ने अपने हस्ताक्षर किए है. ब्रिटेन में किसी याचिका पर कार्यवाही होने के लिए कम से कम 10,000 लोगों के हस्ताक्षर की ही आवश्यकता होती है.

प्रतिकात्मक तस्वीर। फोटो सोर्स: गूगल

इसके अलावा लोगों ने सोशल मीडिया पर भी अपना विरोध जताते हुए ट्वीटर पर #NestingNotNets नाम का हैशटैग चलाया है. इस हैशटैग से पक्षियों के लिए एक अभियान शुरू हो गया है जिसमें लोग बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं.

दुनिया के विकसित और पढ़े-लिखे देशों में इस तरह की घटनाओं का होना बहुत भयावह है. एक तरफ ऐसे ही देश पर्यावरण को बचाने के लिए दुहाई देते हैं और दूसरी ओर यही लोग इस तरह की हरकतें करते हैं. ये इनके दोगलेपन को दिखाता है.

प्रकृति सभी प्राणियों के साथ बराबर का व्यवहार करती है. लेकिन इंसान ने प्रकृति के नियम तोड़ कर भेद-भाव का एक नया चलन शुरू किया है. पक्षी संसार की खूबसूरत रचनाओं में से एक हैं. उनका पूरा अधिकार है कि वो पेड़ो पर घोंसले बनाएँ. इस काम में दुविधा उत्पन्न करना एक प्राकृतिक अपराध है.

आरएसपीबी के आंकड़े बताते हैं कि पिछले 50 सालों में ब्रिटेन में 4 करोड़ पक्षी कम हुए हैं. लेकिन इस पर वहां की सरकार ने अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है. न ही कोई अंतर्राष्ट्रीय संस्था इस पर कुछ करने में अभी तक कामयाब हुई है.

यह शर्मनाक और चिंताजनक है. पेड़ो पर जाली लगा देना न ही सिर्फ पक्षियों से उनके आराम करने और रहने की जगह छीनना है बल्कि उनके जीवन को खत्म कर देने जैसा है. ये हर दर्ज से एक ओछी और घटिया हरकत है. जिस पर जल्द से जल्द एक्शन लिया जाना चाहिए.

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