पुलवामा हमले के जवाब में भारत द्वारा पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकाने पर किए गए एयर स्ट्राइक पर राजनीतिक पार्टियां लगातार सवाल उठा रहें हैं। बताया जा रहा है कि की सारे राजनीतिक दल के नेताओं ने भारतीय सैनिकों द्वारा किए गए एयर स्ट्राइक का सबूत दिखाने की मांग की है। चाहे वह कांग्रेस हो या फिर अन्य राजनीतिक दल। सभी लोग मोदी सरकार से एयर स्ट्राइक के सबूत मांग रहें हैं। वही सबूत को लेकर बीएस धनोवा ने कहा है कि सबूत देना सरकार का काम है हमारा नहीं। हम बस लक्ष्य देखते है कि क्या करना है। लेकिन सरकार इस मामले में चुप है। इस मामले में बीजेपी के बीच खलबली मची हुई है।

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो साभार: गूगल

बीजेपी के नेता लगातार विपक्षी पार्टियों पर जुबानी हमला करते हुए नजर आ रहें हैं। बीजेपी का कहना है,

‘अगर कोई एयर स्ट्राइक के लिए सबूत मांग रहा है तो इसका मतलब ये है कि उसे देश के सैनिक जवानों पर भरोसा नहीं हैं। ऐसे लोग देश के लिए गद्दार है और इन्हें देश में रहने का कोई हक नहीं।’

एयर स्ट्राइक पर सबूत मांगने का यह सिलसिला अब राजनीतिक गलियारों से होता हुआ शहीदों के घर तक जा पहुंचा है। अब शहीदों के परिजनों ने भी सबूत मांगा है। उनका कहना है कि पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों के शव हमने देखे हैं इसलिए हमें भी हक है कि एयर स्ट्राइक में मारे गए आतंकवादियों के शव को देखें। परिजनों के इस मांग के बाद बीजेपी की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं।

बीजेपी इसके पहले विपक्षी पार्टी द्वारा सबूत मांगे जाने पर हमेशा ही देशभक्ति की हवाला देती रही है। लेकिन अब शहिदों के परिजनों की मांग को बीजेपी किसका हवाल देगी?

प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो सोर्स: गूगल

यही नहीं भाजपा की सहायक पार्टी शिवसेना ने भी इसपर सवाल उठाया है और कहा है कि एयर स्ट्राइक में मारे गए आतंकवादियों के बारे में जानने का अधिकार देश की जनता को है और इस तरह के मामले से सेना का मनोबल कम नहीं होगा। उसके बाद शिवसेना ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी ने तमाम मुद्दों पर से लोगों का ध्यान हटवाने के लिए यह एयर स्ट्राइक करवाया ताकि आने वाले लोकसभा तक सब लोग इसकी चर्चा में व्यस्त रहें। शिवसेना ने कहा कि एयर स्ट्राइक में मारे गए लोगों के बारे में केवल विपक्ष ही नहीं बल्कि विश्व के कई देशों में और तमाम मीडिया में चर्चा हो रहा है। इसलिए देश की जनता को इस बारे में जानने का पूरा हक हैं।

पुलवामा हमले में शहीद हुए सैनिकों के परिजनों के द्वारा सबूत मांगे जाने पर अब कई सारे सवाल खड़े हो गए है जिनका जवाब देने में बीजेपी विवश नज़र आ रही है क्योंकि विपक्षी पार्टियों द्वारा एयर स्ट्राइक के सबूत मांगे जाने पर बीजेपी यह कहते हुए अपना पल्ला झाड़ती नजर आई कि देश के सैनिकों द्वारा किए गए काम पर सबूत मांगने वाले देश के सबसे बड़े गद्दार हैं। लेकिन अब जब शहिद हुए सैनिकों के परिजनों ने सबूत की मांग है तो क्या बीजेपी का वही जवाब रहेगा जो वह अभी तक विपक्ष को देती आ रही है।

पुलवामा हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ जवान राम वकील की पत्नी का कहना है,

‘पुलवामा हमले के बाद सबूत के तौर पर शहीदों के बिखरे हुए शव थे लेकिन एयर स्ट्राइक के बाद आतंकियों के साथ ऐसा नहीं है। ‘सबूत कहां है? पाकिस्तान का कंफर्मेशन कहां है कि उनके यहां मौतें हुईं। वे इसे आसानी से दिखा सकते थे। कोई भी नहीं मारा गया है। एयर स्ट्राइक सिर्फ खाली बेस कैंपों में की गई है।’ 

राम वकील की बहन का कहना है,

“एयर स्ट्राइक का सबूत सरकार को देना चाहिए नहीं तो हमें कैसे भरोसा होगा कि एयर स्ट्राइक कितने लोग मारे गए। ये दावे झुठे भी तो हो सकते हैं।”

आपको बताना ज़रुरी है कि यह पहली बार नहीं जब इस मामले में किसी शहीद के परिजन द्वारा सबूत की मांग कि गई हो। इसके पहले भी शामलि के प्रदीप कुमार की पत्नि ने भी सबूत की मांग की थी। उन्होने कहा था,

‘अगर भारत के पास कोई सबूत नहीं है इसका मतलब की जहां एयर स्ट्राइक हुआ वह कैंप खाली था। खाली कैंपों में जो अभ्यास किया गया, वह हम पुलवामा और पोखरन में खाली पड़े इलाके में भी कर सकते थे।’   

ऐसे में हमें भी भाजपा के जवाब का इंतज़ार है कि इन शहीद के परिजनों को वह क्या बोलने वाली है? देशद्रोही या देशभक्त? शिवसेना को क्या जवाब देने वाली है? अगर अब भी सबूत मांगने वाले लोगों के लिए उनका जवाब देशद्रोही के रूप में ही है तो भाजपा शिवसेना जैसे देशद्रोहियों के साथ मिल कर सत्ता में क्यों विराजमान है? क्योंकि जिस समय भाजपा ने जम्मू-कश्मीर में सरकार गिराई थी तब उनके प्रवक्ताओं ने कहा था कि हम सत्ता के लालची नहीं हैं। अगर यह सच है तो अब तक तो महाराष्ट्र सरकार गिर जानी चाहिए थी। सवाल यह भी है कि जिन लोगों ने अपने परिवारजनों को देश के लिए शहीद कर दिया है वो देशद्रोही कैसे हो सकते हैं? ऐसा इसलिए क्योंकि देशद्रोही या देशभक्ति को नापने का नया पैमाना अब सबूत हो चुका है। 

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