लोकसभा चुनाव में जहां बंगाल और अन्य राज्यों में मतदान को लेकर लोगों में काफी जोश देखने को मिल रहा है तो वहीं कुछ राज्यों में लोगों ने चुनाव का बहिष्कार भी किया हैं। लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए सबसे पहला रोल मतदाता का होता है लेकिन इस बार के लोकसभा चुनाव में कुछ जगहों पर लोगों ने वोट देने से इंकार कर दिया है। जम्मू के श्रीनगर संसदीय क्षेत्र में लगभग 90 मतदान केन्द्रों पर कोई भी वोटर ने वोट नहीं किया। श्रीनगर लोकसभा क्षेत्र में लगभग 8 विधानसभा सीट है। जिनमें ईदगाह, खनयार, हब्बा कदल और बटमालू इलाकों में लोग चुनावी बूथ से नदारद दिखें।

पूर्व मुख्यमंत्री फारुख़ अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला ने सोनावर विधानसभा क्षेत्र से वोट डाले। शायद इनके वोट डालने से लोगों ने भी इस क्षेत्र में मतदान करने में रुची दिखाई। सोनावर विधानसभा क्षेत्र में 12 फीसदी मतदान हुआ। लेकिन इस क्षेत्र के बाद बाकि अन्य क्षेत्रों में वोटिंग प्रतिशत दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू पाई। जिन 90 वोटिंग बूथों पर लोगों ने मतदान देने से इंकार कर दिया हैं उनमें सबसे ज्यादा 27 मतदान केन्द्र श्रीनगर लोकसभा क्षेत्र में हैं। बड़गाम के 13 मतदान केंद्रों पर भी कोई वोट डालने नहीं आया। बड़गाम इलाके के चडूरा में पांच मतदान केन्द्रों पर सबसे कम 9.2 फीसदी मतदान हुआ जबकि चरार-ए-शरीफ़ में सबसे अधिक 31.1 फीसदी मतदान हुआ।

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नेशनल कॉन्फ्रेंस के संरक्षक फ़ारूक़ अब्दुल्ला श्रीनगर लोकसभा सीट से पार्टी के उम्मीदवार हैं। वह पिछले चुनाव में भी इसी सीट से जीते थे। पीडीपी ने इस सीट पर आगा सैयद मोहसिन को, भाजपा ने ख़ालिद जहांगीर और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस ने इरफ़ान अंसारी को अपना उम्मीदवार बनाया है। चुनाव का बहिष्कार करने के पीछे जो वजह सामने आई है उसमें कहा जा रहा है कि पिछले साल हुए आतंकी हमले में स्थानीय लोगों के मरने के बाद जनता ने मतदान नहीं करने का फैसला किया है।

आरएसएस के दिवंगत नेता चन्द्रकान्त शर्मा। फोटो सोर्स: गूगल

लेकिन ठीक इसके विपरीत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दिवंगत नेता चंद्रकांत शर्मा की मां ने अपने परिजन के साथ किश्तवाड़ के एक मतदान केंद्र पर जाकर वोट डाला और कहा कि उनका वोट चंद्रकांत शर्मा के कातिलों को सजा दिलाने के लिए है। आरएसएस नेता चंद्रकांत और उनके सुरक्षा गार्ड की 9 अप्रैल को किश्तवाड़ा के एक स्वस्थ्य केन्द्र के भीतर आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

श्रीनगर में वोटिंग प्रतिशत 2014 के मुकाबले काफी घट गई है। इंडियन एक्सप्रेस के एक रिपोर्ट के मुताबिक 2014 के लोकसभा चुनाव में श्रीनगर में वोटिंग प्रतिशत 26 प्रतिशत था, जो 2019 के चुनाव में घटकर 14.8 प्रतिशत हो गया।