भारतीय इतिहास में 12 मार्च 1930 काफी महत्वपूर्ण है। जब पूरा भारत अंग्रेजों के क्रूर शासन व्यवस्था से काफी परेशान था या फिर यूं कहें कि भारतीय नागरिक अंग्रेजों के हाथों की कठपुतली बन गए थे तो शायद गलत नहीं होगा। अब अगर मानव के मुलभूत ज़रुरतों पर किसी और का अधिकार हो तो इसे कठपुतली ही कहेंगे।

ब्रिटिश सम्राज्य में भी कुछ ऐसा ही था। अंग्रेजो के बढ़ते अत्याचार ने सभी हदें पार कर दी थी। आज़ादी के संघर्षों के बारे में अक्सर चर्चाएं होती है और इनमें जिनका नाम सबसे पहले आता है वो महात्मा गांधी है जिन्होंने न सिर्फ सत्य, अहिंसा और जन सेवाओं के पथ पर चलकर पूरे भारत को एक किया बल्कि अंग्रेजो की हुकूमत के सिंहासन को हिलाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी।

अंग्रेजों द्वारा नमक पर रोक लगा दिया गया था जिसके बाद भारतीयों को नमक खरीदने के लिए भारी टैक्स देना पड़ता था। इस वज़ह से भारतीय नागरिकों की मुश्किलें लगातार बढ़ती गई। बहुत बार भारतीय सैनिकों ने ब्रिटिश सरकार से उनकी दमनदारी नीतियों को खत्म करने के लिए कहा और साथ ही यह भी कहा कि या तो भारत को नमक बनाने की अनुमति दी जाए या फिर जो नमक भारतीय खरीद रहें है उसे कर रहीत किया जाए।

दांडी मार्च। फोटो सोर्स: गूगल

लेकिन अंग्रेजों ने भारत की एक भी बात नहीं सुनी। जिसके बाद महात्मा गांधी ने मोर्चा उठाया। लोगों को जागरुक करने के लिए और अंग्रेजो के अत्याचार को खत्म करने के लिए गांधीजी ने अपने 78 अनुयायीयों के साथ मिलकर अहिंसक विद्रोह करने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने अनुयायीयों को लेकर अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से दांडी तक की 240 मील पदयात्रा करने की घोषणा कर दी। इस यात्रा का एक मात्र उद्देश्य था कि वे सबको बताना चाहते थे कि हर एक आदमी अंग्रेजो के विरुद्ध हो सकता है।

सबलोगों ने मिलकर निर्णय लिया कि दांडी तक जाने के बाद खुद नमक बनाकर ब्रिटिश सरकार के जनविरोधी नीतियों का विरोध करेंगे। हालांकि विरोध शुरु होने से पहले महात्मा गांधी ने 2 मार्च 1930 को तत्कानिन गवर्नर लार्ड इरविन को खत लिखा था जिसमें उन्होंने लिखा था कि वे अपने कानून में परिवर्तन करें और अगर इसमें भी ब्रिटिश सरकार को कोई समस्या हो तो फिर वह 11वें दिन इस आन्दोलन का ऐलान करेंगे। ब्रिटिश सरकार के नकारात्मक रवैये को देखने पर गांधीजी ने दांडी यात्रा शुरू किया।

इस यात्रा से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

-गांधीजी के कारवां का सबसे कम उम्र का व्यक्ति विट्ठल लीलाधर ठक्कर(16) साल और सबसे ज्यादा उम्र के खुद महात्मा गांधी थे।

-साबरमती से लेकर दांडी तक की यात्रा को पूरा करने में महात्मा गांधी को पूरे 24 दिन को समय लगा था। जब 6 अप्रैल 1930 को महात्मा गांधी अपनी पूरी टीम के साथ दांडी पहुंचे तो नमक बनने के बाद उन्होने कहा,

‘इस नमक के साथ मै ब्रिटिश सरकार की नींव हिला रहा हूँ ’

-उनके समर्थन में पूरा देश उनके साथ था औऱ सबसे प्रसिद्ध आंदोलन महाराष्ट्र में हुआ था जो एक महिला कमलादेवी चट्टोपध्याय द्वारा किया गया था। ब्रिटिश सरकार द्वारा लाठी चार्ज करने के बावजूद कमलादेवी और उनके साथियों ने नमक बनाया। उनके द्वारा बनाया गया यह नमक का पहला पैकेट 501 रुपये में बिका था।

-साबरमती से जब महात्मा गांधी ने सफर की शुरुआत की थी तो साथ में केवल 78 लोग थे लेकिन धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ती चली गई। सरकारी कर्मचारियों ने अपनी नौकरियाँ छोड़कर इस आंदोलन में भाग लिया था।

-इस आंदोलन के बाद अंग्रेजो ने भारतीय एकता को तोड़ने के लिए 4 मई 1930 के आधी रात को गांधीजी को गिरफ्तार कर लिया। शायद उन्हें इस बात का भ्रम था कि अगर गांधीजी गिरफ्तार हो जाएंगें तो यह आंदोलन बंद हो जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गांधी के गिरफ्तार होने के बाद इस आंदोलन का मोर्चा सरोजिनी नायडु और विनोवा भावे ने संभाला और आंदोलन को तबतक जारी रखा जबतक महात्मा गांधी को जेल से रिहा नहीं कर दिया गया।

-जेल से एक साल बाद जब गांधी रिहा हुए तो फिर गवर्नर लॉर्ड इरविन उनके साथ मिलकर समझौता करने के लिए तैयार हो गए। यह समझौता आगे चलकर ‘गांधी-इरविन पैक्ट’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

-इस आंदोलन में 90 हज़ार आंदोलनकारियों को ब्रिटिश सिपाहियों ने गिरफ्तार कर लिया था जिसमें आधे से ज्यादा महिलायें थी।

आज़ादी की लड़ाई में भारत के संघर्ष के दौरान हुई घटनाओं में दांडी यात्रा एक प्रमुख आंदोलन माना जाता है। इस क्रान्ति ने आम भारतीयों को अंग्रेजो के विरुद्ध लड़ने के लिए एकजुट किया था। ऐसे ऐतिहासिक घटना को याद रखने के लिए सरकार ने दांडी यात्रा में भाग लेने वाले कुल 78 आंदोलनकारियों की प्रतिमा भी बनवायी है।

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