आज भारत के तरफ से हुई एलओसी पार कार्यवाई को लेकर सबने ट्विटर पर हैशटैग चला रखा है #SURGICALSTRIKE2. हाँ, ये बहुत हद तक भारत के द्वारा उड़ी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक जैसा ही था। उड़ी हमले के बाद भी देश के अंदर गुस्सा था जिसे सर्जिकल स्ट्राइक कर के मोदी जी ने शांत कर दिया था। अब पुलवामा अटैक को लेकर देश में फैले गुस्से की आग को ‘एयरस्ट्राइक’ के जरिये शांत करने की कोशिश की गयी है।

अगर इनदोनों कार्यवाइयों पर एक नज़र डालें तो हमें इनदोनों कार्यवाइयों में दो अंतर नजर आते हैं। पहला सर्जिकल स्ट्राइक एक जमीनी कार्यवाई थी जिसे स्पेशल कमांडोज़ ने अंजाम दिया था जबकि एयरस्ट्राइक को ‘इंडियन एयर फोर्स’ ने अंजाम दिया है।

प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो साभार: गूगल

एक और बेसिक सा अंतर है जोकि चौंकाता भी है और सोचने पर मजबूर भी करता है। वह यह है कि पाकिस्तान ने कभी भी सर्जिकल स्ट्राइक की बात कबूल नहीं की माने की उसका यह कहना है कि ऐसी कोई भी कार्यवाई पीओके में हुई ही नहीं थी। जबकि एयरस्ट्राइक वाले मामले में पाकिस्तान का रवैया बिलकुल उलट है। पाकिस्तान ने खुद ही एयरस्ट्राइक से हुई तबाही का विडियो और तस्वीरें जारी करी है। ऐसे में सवाल है कि पाकिस्तान ने ऐसा आखिर किया क्यों?

इसकी वजह क्या है?

दरअसल पाकिस्तान यहाँ पर साँड़ा यानि के चालाकी कर रहा है। देखिये, सर्जिकल स्ट्राइक एक जमीनी कार्यवाई थी जिसमें आतंकियों के कैंप में घुस कर उन्हें मार गिराया गया था। इस तबाही को एक हद तक छिपाया जा सकता है क्योंकि इसमें एक छोटे स्तर पर तबाही हुई थी। यानि के आसपास जो भी हल्का फुल्का बिगड़ा था उसे छिपाया जा सकता था। खुद पाकिस्तान विदेशी मीडिया को लेकर सर्जिकल स्ट्राइक वाले इलाके में लेकर गया था और उन्हें वह जगह दिखाई थी कि देख लो भैया यहाँ कुछ हुआ ही नहीं है।

 


पर एयरस्ट्राइक द्वारा की गयी तबाही बहुत बड़े स्तर की होती है जिसे छिपाना बहुत ही मुश्किल काम है। ऐसे में पाकिस्तान ने जानबूझ कर इसकी तस्वीरें और विडिओज पहले ही पब्लिक कर दी और दुनिया को यह बताने लगा कि भारतीय सेना ने हमला जरूर किया लेकिन हमने उन्हें वापस भागने के लिए मजबूर कर दिया। ऐसा इसलिए ताकि उनकी नाकामी छिप सके कि उनके इलाके में हमला हुआ और वह कुछ कर भी नहीं पाये। पाकिस्तान चाह कर भी उस इलाके को ठीक नहीं कर सकता है क्योंकि सूत्रों के खबर के अनुसार वहाँ पर हजार किलो बम गिराए गए हैं। ऐसे में वाजिब है की तबाही का दारा काफी बड़ा है और चाह कर भी पाकिस्तान इसको छिपा नहीं सकता।

इसलिए उसने एक नयी कहानी बुनने में ही अपनी भलाई समझी।

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