चुनाव नजदीक क्या आए भाजपा ने हर तरीके से अपना प्रचार करना शुरू कर दिया। भारतीय इतिहास में पहली बार किसी पार्टी के प्रचार के लिए एक टीवी चैनल हीं लॉंच कर दिया गया। नरेंद्र मोदी के ऊपर फिल्म भी बन गयी और वेब-सीरीज भी बन गयी। फिल्म का मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया जहां सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने वजह बताई कि यह चुनाव आयोग का काम है कि वो फैसला ले कि यह फिल्म किसी व्यक्ति विशेष का समर्थन या प्रोमोशन करती है या नहीं।

इसी सब भसड़ के बीच एक खबर आई है। खबर है कि प्रधानमंत्री मोदी पर आ रही फिल्म पर चुनाव आयोग ने रोक लगा दी है। इस फिल्म को 11 तारीख को रीलीज़ होना था। 11 तारीख को ही पहले चरण का मतदान होना था। चुनाव आयोग ने इस फिल्म पर रोक लगाने की वजह आचार संहिता का उल्लंघन बताया है। अब ऐसे में यह फिल्म लोकसभा चुनाव के बाद ही रीलीज़ हो पाएगी।

इस मामले को लेकर चुनाव आयोग ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय के साथ-साथ सीबीएफ़सी को एक चिट्ठी लिखी थी। इस चिट्ठी में चुनाव आयोग ने कहा था कि एक कमेटी बनाई जाए जिसकी अध्यक्षता हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस या फिर रिटायर्ड जज करें। इस कमेटी का काम होगा कि वो सभी तरह की राजनीतिक प्रभावित इलेक्ट्रोनिक सामग्रियों की जांच करेगी कि यह सामाग्री आचार संहिता का उल्लंघन कर रही है या नहीं। इसमें फिल्में भी शामिल होंगी।

आपको बताते चलें कि माकपा और आप जैसे विपक्षी दल ने इस फिल्म के रीलीज़ को लेकर चुनाव आयोग में शिकायत की थी। इनका आरोप था कि इस फिल्म को चुनाव के वक़्त रीलीज़ करने का मकसद भाजपा को फायदा पहुंचाना है और यह आचार संहिता का उल्लंघन है।

इससे पहले इस फिल्म पर बैन लगाने के लिए एक याचिका बॉम्बे हाईकोर्ट में भी दी गयी थी जिसपर सुनवाई करने से कोर्ट ने माना कर दिया था। इसी तरह से एक याचिका मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में भी दी गयी थी जिसपर इंदौर हाईकोर्ट ने भी सुनवाई करने से मना कर दिया था। दोनों कोर्ट का कहना था कि यह चुनाव आयोग का मामला है और चुनाव आयोग को ही इस बात की जांच करनी चाहिए।

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