भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच दिल्ली के फ़िरोजशाह कोटला मैदान पर खेले गए पांचवें और आखिरी मैच में भारत को 35 रन से हार का सामना करना पड़ा था। मैच के साथ सीरीज भी गंवाने वाली भारतीय टीम की कई कमजोरियां इस सीरीज के बाद सामने आयी हैं जो आने वाले विश्वकप से पहले भारतीय टीम को दूर करने की कोशिश करनी होगी।

इस सीरीज में सबसे बड़ी बात जो निकलकर सामने आई है वो यह है कि भारत कभी भी अपने अंतिम एकादश को लेकर सहज नहीं दिखा। हर एक मैच के बाद कोई ना कोई कोई बदलाव प्लेइंग 11 में देखने को मिला चाहे वो गेंदबाजी में हो या फिर बल्लेबाजी में।

सीरीज के दो मैच भारत जब जीता तो ऐसा लग रहा था कि भारत आसानी से सीरीज अपने नाम कर लेगा लेकिन फिर शुरु हुआ मैच में बदलाव का सिलसिला जो सीरीज गवाने तक चलता रहा। तीसरा मैच हारने के बाद धोनी को आराम देना कुछ समझ नहीं आया और फिर ‘कुलचा’ की जोड़ी को तोड़कर रविन्द्र जडेजा को मैच में वापस लाना भी कुछ समझ में नहीं आया। ऐसे ही और भी कई सारी बातें है जिन्हें हमसे ज्यादा BCCI को समझने औऱ सोचने की जरुरत है। आइए जानते हैं कि इस सीरीज से भारत की कौन कौन सी कमियां निकल कर बाहर आई हैं।

सलामी जोड़ी

रोहित और धवन। फोटो सोर्स: गूगल

भारत की सलामी जोड़ी को अगर देखा जाए तो पिछले कुछ समय से इस जोड़ी ने खास कमाल नहीं दिखाया है। मोहाली में खेले गए मैच में शिखर धवन ने शानदार 143 रनों की पारी खेली तो वही रोहित शर्मा ने भी 95 रनों की पारी खेली थी। यह अलग बात है कि भारत मैच हार गया था। लेकिन इस मैच के बाद नज़र घूमा कर देखा जाये तो जो बात सामने आती  है वह यह है कि पिछले 17 पारीयों में शिखर धवन के मात्र दो अर्द्धशतक आए हैं। वो तो मोहाली मैच में शिखर ने एक शानदार पारी खेलकर अपने ही ज़ख्म पर मरहम लगाने का काम किया था लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल एक पारी आपको विश्व कप में जाने के लिए सही और जिम्मेदार बनाता है। जबकी टीम इंडिया के पास के एल राहुल हैं और पृथ्वी शॉ भी इसके प्रबल दावेदार हैं लेकिन उन्हें अनुभव के आधार पर हटाया जा सकता है। इस तरह से विश्व कप के पहले एक बार BCCI को भारत कि सलामी जोड़ी को लेकर सोचने की ज़रुरत है। वैसे तो धवन-रोहित की जोड़ी से दुनिया डरती थी पर हाल-फिलहाल में यह जोड़ी डरी-डरी सी लग रही है।

नम्बर 4 की समस्या

प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो सोर्स: गूगल

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जब सीरीज कि शुरुआत हुई तब से लेकर सीरीज के समाप्त होने तक भारत नम्बर चार के लिए एक्सपरिमेंट करता रहा और वह सीरीज खत्म होने तक अपनी यह तलाश पूरी नहीं कर पाया। इस नम्बर पर पहले अंबाती रायडू को देखा गया लेकिन उन्होने टीम को निराश किया। फिर इस नम्बर के लिए के एल राहुल आए लेकिन कोहली ने अपने आप को नम्बर चार पर रखा और राहुल को नम्बर तीन पर लेकिन दोनों ही फेल हुए। यहां तक की इस नम्बर पर ऋषभ पंत भी कुछ खास नहीं कर पाए। विजय शंकर ने जरुर सबको प्रभावित किया लेकिन उन्हें इस नम्बर पर एक मैच के बाद मौका ही नहीं मिला। तो तमाम तरह के प्रयोग करने के बाद भी भारतीय टीम इस समस्या के लिए कोई हल निकालने में कामयाब नहीं हो पाई।

धोनी का कोई विकल्प

धोनी और पंत। फोटो सोर्स: गूगल

भारतीय टीम अगर खुद को विश्व कप के लिए एक बेहतर टीम के रुप में पेश करना चाहती है तो सबसे पहले धोनी का विकल्प होना बहुत ज़रुरी है। हालांकि ऋषभ पंत को इसके लिए सही माना जाता था लेकिन जिस तरह से उन्होने ऑस्ट्रेलिया के साथ बीते सीरीज में प्रदर्शन किया चाहे वो बल्लेबाजी हो या फिर विकेट के पीछे फिंल्डिंग, दोनों ही क्षेत्रों में भारतीय टीम को उनसे निराशा ही हाथ लगी। वहीं दिनेश कार्तिक की बात करें तो वह इस मामले में पंत से कही बेहतर दिखते हैं। फिर वो बात चाहे फिंल्डिंग की हो या फिर बल्लेबाजी में अनुभव की। दिनेश कार्तिक के आने से भारत के लिए चौथे नम्बर की समस्या भी सुलझ सकती है और निदहास ट्राफी में उन्होंने दिखा भी दिया था कि वह एक अच्छे फिनिशर भी है।

गेंदबाजी का कम्बिनेशन

प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो सोर्स: गूगल

इस पूरी सीरीज में भारत एक के बाद एक प्रयोग करता रहा और उसके बावजुद किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका। कभी कुलदीप बाहर बैठे तो कभी चहल को अंतिम एकादश से बाहर का रास्ता दिखाया गया। इसकी वजह से ऑलराउंडर के रूप में रविन्द्र जडेजा को जगह मिली लेकिन उन्होंने बल्ले से कोई खास योगदान नहीं दिया जिसके लिए उन्हें टीम में तवज्जो दी गई थी। पूरे सीरीज कुलदीप और चहल दोनों में से कोई आत्मविश्वास में नहीं दिखें। इसके पीछे के कारणों को खंगाला जाए तो यही बात सामने आती है कि दोनों में से किसी को इस बात पर विश्वास नहीं था कि वे अगले मैच में खेलेंगे भी या नहीं। एक अतिरिक्त दबाव में दोनों अपना स्वभाविक खेल नहीं खेल पाए।

खराब फिंल्डिंग

प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो सोर्स: गूगल

इस सीरीज के पहले भारतीय क्षेत्ररक्षण पूरे विश्व में एक अच्छा स्थान रखती थी लेकिन इस सीरीज ने भारतीय टीम की इस भ्रम को भी तोड़ दिया। अगर बात करें भारतीय फिल्डर्स की तो विराट कोहली, रविन्द्र जडेजा, रोहित शर्मा अव्वल दर्जे के फिल्डर हैं लेकिन इस सीरीज में भारत की लाचार फिल्डिंग ने BCCI को एक बार सोचने पर मजबूर कर दिया है क्योंकि अगर इस सीरीज की हार में सबसे बड़ा कारण ढूढ़ा जाए तो उसमें फिल्डिंग डिपार्टमेंट भी एक खास वजह है। पंत की लाचार विकेटकिपींग भी एक बहुत बड़ी समस्या है।

चूंकि वर्ल्डकप में अब ज्यादा दिन बचे नहीं हैं ऐसे में भारत का अपने ही देश में 28 महीने बाद सीरीज़ गँवाने के बाद इन जगहों पर खास मेहनत करने कि जरूरत है। विराट कोहली को यह समझना होगा कि अब और एक्सपरिमेंट करने का वक़्त उनके पास नहीं है।

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