मैं काफी वक्त से एक लड़की को जानता हूँ. मुझे उसकी हर पसंद-नापसंद अच्छे से मालूम है. मैं उसके रूठ जाने की तमाम वज़हों से वाकिफ हूँ. साथ ही उसको मनाने के हज़ार तरीके भी जानता हूँ. उसे खाने में सबसे ज्यादा क्या पसंद है और कौन-सी चीज उसे बिलकुल भी नहीं पसंद; मैं अच्छे से जानता हूँ. उसे कहाँ घूमना पसंद है और वह कौन-सी जगह है जहाँ वो ज़िन्दगी में एक बार ज़रुर जाना चाहती है मैं वो जगह जानता हूँ. उसे रुलाने वाली यादों से लेकर पल में हंसा देने वाले किस्से तक सब जानता हूँ मैं. उसकी चाय में चीनी से लेकर गोलगप्पो में तीखे तक का सटीक अंदाज़ा है मुझे. मुझे उसका पहनावा भी पता है और उसका फेवरेट कलर भी.

उसे कनबालियों का शौक है. सोने की कनबालियाँ बड़े चाव से पहनती है. पर, अब अरसा हो गया उसे सोने की कनबालियाँ पहने हुए. मैंने कई बार कहा कि वो झुमके पहना करे. पर, झुमके उसे भारी लगते हैं. कहती है झुमके तो कम उम्र की लड़कियां पहनती हैं. मैं कम उम्र की लड़की थोड़े हूँ. ऐसा कह कर वो लजा जाती है. उसकी आँखों में एक कम उम्र की लड़की उतर आती है. मैंने गौर किया है, वो जब बेवज़ह मुस्कुराती है तो उसके चेहरे पर एक शोख़ी नुमायां हो जाती है. ठठाकर हँसती है तो लगता है कोई 19 साल की लड़की हो. मैंने उसे कई बार ऐसे हँसते हुए देखा है.

प्रतीकात्मक तस्वीर, साभार – गूगल

उसे साड़ियों का बड़ा शौक है. कुछ समय पहले उसने बक्सा भरकर ढेर साड़ियां इकट्ठी कर रखीं थी. सिर्फ इकठ्ठा कर रखीं थी, पहनती नहीं थी. पहनती तो इक्का-दुक्का ही थी. वो तमाम साड़ियां अब कहीं खो गई हैं. बस कुछेक साड़ियां बची होंगी. वो उन्हीं साड़ियों को बदल-बदल कर पहनती रहती है. पर, उसे इस बात से कोई शिकायत नहीं है. साड़ियों के उस खाली बक्से को उसने मेरी किताबों से भर दिया है. उन किताबों से; जो मैंने सिर्फ इकट्ठी कर रखी हैं, उन्हें पढ़ा नहीं है.

उसे ईश्वर पर बड़ी आस्था है. कहती है उसके तमाम काम भगवान ही करते हैं. मैं जब भी कहता हूँ कि भगवान जैसा कुछ नहीं होता, तो मुझे आँखे दिखाकर डांट देती है. मेरे ये कहने पर कि भगवान दिखाई क्यों नहीं देते? वो सामने से कहती है ‘हवा भी तो दिखाई नहीं देती.’ उसकी इस बात में तर्क कहाँ होता है मैं नहीं जानता. पर, जब भी वो थाली में सजाकर जलता हुआ दिया लेकर आती है तो मैं उस दिये की लौ के ऊपर हाथ घुमा कर माथे पर लगा लेता हूँ. वो खुश हो जाती है. हँसते हुए मेरी ओर देखकर कहती है ‘भगवान सद्बुद्धि दे.’ मैं न भगवान को जानता हूँ, न सद्बुद्धि को. मैं तो बस उसके खुश होने को जानता हूँ.

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो साभार – गूगल

किसी-किसी सुबह कुछ-कुछ गुनगुनाने लगती है. मुझे उसका गुनगुनाना बुरा नहीं लगता. पर, सुबह नींद में होने पर कोई आवाज़ कानों में आती है तो मैं उठ जाता हूँ. मेरे उठते ही वो अक्सर अपना गुनगुनाना बंद कर देती है. एक सुबह उसका गुनगुनाना सुन कर मैं उठा नहीं. मैंने गौर किया वो किसी पुरानी फिल्म का कोई गाना गुनगुना रही थी. उसे शायद उस गाने के पूरे बोल याद नहीं थे. पर, उसे गाने की धुन पूरी याद थी. उसने उसी धुन को गुनगुनाते हुए वो पूरा गाना गा लिया. गाने के खत्म होने के बाद उसे मेरा ख़याल आया होगा. वो मेरे बिस्तर के पास आकर जोर से चिल्लाई- ‘ऑफिस नहीं जाना है क्या? कितनी देर हो गई है. उठने का टाइम नहीं हुआ अभी?’ उस रोज मेरी नींद उसके गुनगुनाने से नहीं बल्कि उसका गुनगुनाना बंद कर देने से खराब हुई थी.

छोटे-छोटे बच्चों के साथ खेलने में उसे बड़ा मजा आता है. पड़ोस के दो साल के बच्चे के साथ वो घंटो बातें कर लेती है. मुझे आज तक नहीं समझ आया कि दोनों आपस में क्या बातें करते है. वो दो साल का बच्चा मुझे देखकर अक्सर गुस्से से घूरता रहता है. उस बच्चे को ऐसा करता हुआ देखकर उसे बड़ा मजा आता है. पड़ोस में उसकी कई पक्की सहेलियाँ हैं, पर उन सबकी उम्र 10-12 साल से ज्यादा नहीं होगी. उनमें से कोई भी उसकी उम्र के आस-पास भी नहीं है फिर भी उसकी उन सबसे बहुत अच्छी बनती है. वो उन सहेलियों से साथ घंटों छत पर बैठ कर दुनिया भर की गप्पें लड़ा लेती है.
मुझे कभी-कभी बुरा लगता है कि इतनी बातें वो मुझसे क्यों नहीं करती?

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो साभार – गूगल

हाँ, वो लड़की काफी वक्त से मुझसे पहले जितनी बातें नहीं करती है. या शायद मैं ही काफी वक्त से बहुत बिजी रहने लगा हूँ. वो लड़की मुझसे बहुत प्यार करती है. इस दुनिया में उससे ज्यादा प्यार कोई और कभी नहीं कर पायेगा मुझे. मेरे बारे में वो मुझसे ज्यादा जानती है. उसे मेरे चेहरे पर खुशी और आँखों में दुःख पढ़ लेने का हुनर आता है. उस लड़की की गोद मेरे सुस्ताने के लिए दुनिया की सबसे मुफीद जगह है. वो लड़की मेरे जीवन का सबसे पहला प्रेम है. मेरे और उसके बीच का प्रेम किसी परिभाषा से परे है. मैं उसे तब से प्रेम कर रहा हूँ जब मुझे भावनाओं के होने न होने का पता भी
नहीं था. मैं उसे तब से प्रेम करता हूँ जब मुझे प्रेम जैसी किसी चीज के होने का अंदाजा भी नहीं था. मैं उससे तब से प्रेम करता हूँ जब मैं सदेह जन्मा भी नहीं था. वो लड़की जो ठठाकर हँसती है तो 19 साल की हो जाती है. आज कल काफी उम्रदराज हो चली है. वो लड़की जो मेरे जीवन का सबसे पहला प्रेम है.

मैं उसे ‘अम्मा’ पुकारता हूँ. वो रिश्ते में मेरी माँ लगती है.