केंद्र सरकार की दो योजनाएं हैं. जिसका संबंध तमाम केंद्रीय कर्मचारियों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवार वालों से है. इन योजनाओं का नाम हैं, CGHS (सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) और ECHS (एक्स सर्विसमैन कॉन्ट्री ब्यूटरी हेल्थ स्कीम). इन स्कीमों के तहत आने वाले तमाम लाभार्थियों को फ्री हेल्थ सुविधा दी जाती है. हालांकि, अब इन सुविधाओं पर खतरा मंडरा रहा है. ख़तरे की वजह है 1600 करोड़ रूपये.

केंद्र सरकार इन योजनाओं की तरफ से मुहं मोड़ चुकी है. जिससे प्राइवेट अस्पतालों को 1600 करोड़ रुपयों का नुकसान हुआ है. वहीं अब प्राइवेट अस्पतालों के एसोसिएशन ने इन सुविधाओं को बंद करने की धमकी दी है.

दरअसल, एसोसिएशन ने पहले ही बकाया राशि को लेकर वित्त मंत्रालय को जानकारी दे दी थी. इसके लिए पत्र भी लिखा गया था. जिसका कोई नतीजा नहीं निकला. यही वजह है कि एसोसिएशन ने सुविधाएं बंद करने की धमकी दी है.

  AHPI, एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया, फोटो सोर्स: गूगल
AHPI, एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया, फोटो सोर्स: गूगल

आजतक की ख़बर के मुताबिक AHPI (एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया) की हाल में हुई बैठक में तय किया गया है कि अगर केंद्र सरकार बकाया बिलों का भुगतान नहीं करती है, तो CGHS और ECHS सेवाओं को बंद कर दिया जाएगा. एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल गिरधर ज्ञानी का कहना है कि

पिछले तीन सालों से अस्पतालों का भुगतान लटका हुआ है क्योंकि इन योजनाओं के तहत अस्पतालों की संख्या बढ़ गई है जबकि, बिलों को मंजूरी देने के लिए बजट पहले जितना ही है.

इसके अलावा उन्होंने स्थिति खराब होने के लिए मोदी सरकार की फ्लैगशिप योजना आयुष्मान भारत को भी दोषी ठहराया है, उनका कहना है कि

आयुष्मान भारत योजना लागू होने के बाद स्थिति और खराब हो गई और बकाया राशि 1600 करोड़ पहुंच गई है. हम जल्दी ही मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखने जा रहे हैं कि अगर हमारे नुकसान की भरपाई के लिए कोई आपात कार्यवाही नहीं की गई तो, हम इन योजनाओं के तहत दी जा रही सभी सेवाओं को बंद करने के लिए मजबूर हो जाएंगे.

CGHS योजना के तहत प्रावधान हैं कि अस्पताल जो बिल लगाएंगे, उसका 70 फीसदी भुगतान 5 वर्किंग डेज के अंदर किया जाएगा. लेकिन, किस भी मामले में कोई भी भुगतान नहीं किया गया है. अस्पतालों को भुगतान के लिए महीनों से लेकर सालों तक का इंतज़ार करना पड़ रहा है. जिसके चलते ये सारा बखेड़ा खड़ा हुआ है.  

Ministry of Finance,फोटो सोर्स: गूगल
Ministry of Finance,फोटो सोर्स: गूगल

हाल ही में वित्त मंत्रालय को लिखे अपने पत्र में एसोसिएशन ने कहा है कि

अगर आप (सरकार) लंबे समय से लटके इस बकाया भुगतान पर ध्यान देते हैं तो हम आपके आभारी होंगे. यह बकाया अस्पतालों में अस्थिरता की स्थिति पैदा कर रहा है. सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं जैसे आयुष्मान भारत पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है क्योंकि अस्पताल इसी डर से उन योजनाओं के तहत काम करने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं कि समय से उनका भुगतान नहीं होगा.

इस वक्त सेंट्रल गवर्नमेंट के 37 लाख लाभार्थी CGHS और 52 लाख एक्स सर्विसमैन ECHS के अंदर आते हैं. वहीं अगर इनके अंदर आने वाले अस्पतालों की बात करें, तो इनकी संख्या 1000 है. मैक्स हैल्थकेयर (150 करोड़) और फोर्टिस ग्रुप (58 करोड़) के सबसे ज्यादा पैसे सरकार पर बकाया हैं.

आज देश में हेल्थ सेक्टर की हालत क्या है? वह किसी से छिपी हुई नहीं है. यही वजह है कि हर कोई प्राइवेट हॉस्पिटलों की तरफ भाग रहा है. वहीं सरकार ने सरकारी अस्पतालों की स्थिति सुधारने की बजाय, लोगों को आयुष्मान योजना का झुनझुना थमा दिया. जिसके लिए भी सरकार के पास पैसा नहीं है. सरकार लोगों को मूर्ख बना रही है और वो बन रहे हैं. अब इससे बड़ा और क्या सबूत चाहिए कि देश मंदी की चपेट में है. देखतें हैं, इस बवाल के बाद सरकार क्या कदम उठाती है? क्या पता इसके लिए भी कोई योजना ही लागू कर दे.

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