एक 17 साल की लड़की ने सरकार से इच्छामृत्यु की मांग की और सरकार ने मान ली।

“10 दिनों के अंदर मैं मर जाऊंगी। कई साल संघर्ष करने के बाद ये खत्म हो गया। मैंने अब कुछ समय के लिए खाना-पीना बंद कर दिया है और कई बार बातचीत और सोच विचार के बाद तय किया गया कि मुझे आज़ाद कर दिया जाएगा, क्योंकि मेरी तकलीफ असहनीय है। ये खत्म हो चुकी है।”

ये लाइन पढ़कर सबसे पहले ये सवाल उठता है कि आखिर क्यों 17 साल की लड़की को ये कदम उठाना पड़ा और सरकार ने कैसे इसकी मंजूरी दे दी?

नोआ, फोटो सोर्स- गूगल

शुरू से आपको पूरी बात बताते हैं। पिछले कुछ दिनों से ये खबर वायरल हो रखी है कि 17 साल की लड़की ने इच्छामृत्यु की मांग की और खुद को खतम कर लिया। ऊपर दिये स्टेटमेंट में नोआ ने अपने दर्द को बयां किया है। नोआ का बचपन में रेप हुआ था, जिसके बाद उसके लिए ज़िंदगी जीना मुश्किल हो गया था। रेप का दर्द कितना भयावह होता है, ये नोआ पॉटहोवेन ने अपनी इस पोस्ट में बताया है।

फोटो सोर्स- इंस्टाग्राम

‘euthanasia’ यानि इच्छामृत्यु लॉ क्या है?

नीदरलैंड में इच्छामृत्यु को लीगल रखा गया है। जिसको लेकर कानूनी बहस 1973 में हुई थी। जब एक ऐसे डॉक्टर ने जिसने इच्छामृत्यु के लिए बार-बार स्पष्ट अनुरोधों के बाद अपनी माँ को मृत्यु की सुविधा दी थी। पर तब उस डॉक्टर को दोषी ठहराया गया था। उसके बाद से अदालत के ने मानदंड निर्धारित किए। 1980 के दशक के दौरान कई अदालती मामलों के दौरान मानदंडों के इस सेट को औपचारिक रूप दिया गया था। अप्रूवल और असिस्टेड सुसाइड एक्ट (रिव्यू प्रोसीजर) पर लाइफ ऑफ टर्मिनेशन को अप्रैल 2001 में लागू किया गया और 1 अप्रैल 2002 को अप्रूव किया गया। ये बहुत ही सीरियस मुद्दो में इच्छामृत्यु और चिकित्सक-सहायता प्राप्त आत्महत्या को कानूनी मान्यता देता है। कानून का प्रस्ताव तब के वहां के स्वास्थ्य मंत्री एल्स बोरस्ट ने किया था। कानून में संहिताबद्ध प्रक्रिया बीस वर्षों से डच चिकित्सा समुदाय का एक सम्मेलन थी।

नीदरलैंड की सरकार ने भले ही इस मांग को पास कर दिया हो लेकिन इसके अंदर कुछ शर्तें भी उन्होंने रखी हैं-

  • सुधार की कोई संभावना नहीं होने के कारण रोगी की पीड़ा असहनीय है।
  • इच्छामृत्यु के लिए रोगी का अनुरोध अपनी इच्छा से होना चाहिए और समय के साथ बना रहना चाहिए।(यह अनुरोध तब नहीं किया जा सकता है जब दूसरों के प्रभाव में, या मनोवैज्ञानिक बीमारी या ड्रग्स वगैरह ले रहा हो।)
  • रोगी को उसकी स्थिति, संभावनाओं और विकल्पों के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। 
  • कम से कम एक अन्य स्वतंत्र चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए, जो ऊपर बताई गई शर्तों की पुष्टि करने के लिए आवश्यक है।
  • मृत्यु को चिकित्सक या रोगी द्वारा चिकित्सकीय रूप से उचित तरीके से किया जाना चाहिए, और चिकित्सक को उपस्थित होना चाहिए।
  • रोगी अगर 17 साल से कम उम्र का है (12 से 16 वर्ष के बीच के रोगियों को) तो उसे अपने माता-पिता की सहमति की आवश्यकता होती है।

अब बात करते हैं नोआ की समस्या के बारे में जिससे वह गुज़र रही थी.

नीदरलैंड में एक क्लीनिक में “कानूनी रूप से इच्छामृत्यु” लेने की वजह से अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने इस खबर पर काफी जोर दिया है। नोआ ने अपनी मर्ज़ी से खाने या पीने से मना करने के बाद बिना किसी सबूत के चिकित्सकों की सहायता से अपनी जान दे दी। वहाँ की मीडिया ने ये भी बताया कि नोआ पोथोवन कई वर्षों से गंभीर डिप्रेशन और एनोरेक्सिया जैसी बीमारी का इलाज अलग-अलग जगहों से करा रहीं थी। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

नोआ नीदरलैंड के अर्नहेम शहर में रहती थीं। उनका बचपन में कई बार यौन उत्पीड़न हुआ। 11 और 14 साल की उम्र में उनके साथ रेप हुआ। इसके बाद उनकी जिंदगी कभी भी नॉर्मल नहीं हो पाई। वो डिप्रेशन में आ गई। वो कई सालों तक गहरे सदमे में रहीं। इसके बाद नोआ को एनोरेक्सिया बीमारी हो गई। इस बीमारी में भूख लगनी बिल्कुल बंद हो जाती है। पिछले साल उनका डिप्रेशन और बढ़ गया था जिसको वह बर्दाश्त नहीं कर पायी।

अपने लिए इच्छामृत्यु मांगने के लिए उन्होंने यूथेनेशिया क्लीनिक में आवेदन दिया था। उन्होंने अपने मां-बाप को लेटर लिख कर इसके बारे में बताया। इसके बाद उन्हें तीन अलग-अलग चाइल्ड केयर फैसिलिटी में डाला गया, ताकि वे डिप्रेशन और सदमे से निपट सकें। लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। आखिरकार उन्हें एक अस्पताल में भर्ती कराया गया।नीदरलैंड में इच्छामृत्यु यानी “टर्मिनेशन ऑफ लाइफ ऑन रिक्वेस्ट एंड असिस्टेड एक्ट ऑफ 2001” के तहत लीगल है। लेकिन इसके लिए एक डॉक्टर की मंजूरी जरूरी है, अगर डॉक्टर तय कर दे कि इच्छामृत्यु मांगने वाले इंसान का कष्ट उसकी सहन शक्ति से बाहर है, तो इच्छामृत्यु की मंजूरी मिल जाती है।

नोआ के इस कदम से बाकी के देशों में बहस का सिलसिला शुरू हो गया

ऑस्ट्रेलिया से लेकर ब्रिटेन और भारत तक के भारतीय संगठनों ने इसे डच “एंड-ऑफ़-लाइफ क्लिनिक” के द्वारा चलाये जाने वाले “कानूनी इच्छामृत्यु” के मामले के रूप में रिपोर्ट किया। नोआ का नाम बुधवार से सोशल मीडिया पर इटली सहित कई देशों में ट्रेंड कर रहा था। जहां पर नोआ की कहानी फ्रंट पेज की खबर थी।

नोआ की मौत और उसकी आखिरी इंस्टाग्राम पोस्ट ने सोशल मीडिया पर इस बात पर बहस छेड़ दी है कि क्या वह इस तरह के बड़ा कदम उठाने के लिए पर्याप्त परिपक्व थीं? कुछ ने डच कानूनों की भी आलोचना की है जो नोआ के मामले में आत्महत्या की तरह मदद करते हैं।

2017 में ऐसे केस के आंकड़े उपलब्ध हैं, जहां नीदरलैंड में सभी मौतों में से 4% लोगों ने इच्छामृत्यु चुनी थी। 80% से अधिक लाइलाज कैंसर, न्यूरोलॉजिकल सबंधित बीमारियों, हृदय रोग या फेफड़े के रोग से मरे थे।

फोटो सोर्स- गूगल

नोआ पिछले एक साल से इच्छामृत्यु के लिए लड़ रहीं थी। 2 जून को नोआ ने एक सरकारी क्लीनिक की मदद से खुद को खत्म कर लिया। नोआ ब्लॉग के जरिये लोगों को मेंटल हेल्थ और डिप्रेशन के बारे में बताती थीं। उन्होंने विनिंग एंड लर्निंग नाम की बायोग्राफी में यौन शोषण, रेप और डिप्रेशन के बारे में लिखा. किताब में बताया कि शर्म की वजह से सालों तक उन्होंने ये बात छुपा कर रखी थी।

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