ये खबर जो हम आपको पढ़वा हैं, उसे हम कुछ इस तरह से आपके सामने पेश करना चाहते हैं जिससे कि आपको फर्क पड़े. अगर इस खबर को पढ़कर आप परेशान हो रहे हैं तो, अच्छी बात है क्योंकि जब तक आप परेशान नहीं होंगे तब तक इस तरह की घटनाएँ होती रहेंगी. यह घटना ईद के दिन, अलीगढ़ की है.

एक बच्ची की हत्या कर दी गई है. उस बच्ची का नाम था ट्विंकल शर्मा. ट्विंकल शर्मा की उम्र ढाई साल थी. उसे बिस्किट का लालच दे कर बुलाया गया और उसकी हत्या कर दी गयी. उसकी आँखें निकाल दी गयी और उसके शरीर पर तेजाब डालकर उसे तीन दिनों तक बोरी में बंद रखा गया. बाद में उसकी लाश को कचरे के डिब्बे में फेंक दिया गया.

पर ये सच नहीं है…

इस पूरी घटना में बच्ची की हत्या और उसकी लाश को फेंके जाने तक की बात सही है. पर उसके अलावा आँखें निकाल लेने और तेज़ाब डालने वाली बात गलत है. Alt News द्वारा इस घटना की जांच-पड़ताल में सामने आया है कि ये सारी बातें सोशल मीडिया द्वारा फैलाई गई थी. जो पूरी तरह से सच नहीं हैं. इसकी पूरी रिपोर्ट आप यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं.

हम, आप इंसान हैं. ऐसी घटनाओं को सुन-पढ़ कर परेशान होना लाजिमी है. उस पर तुरंत प्रतिक्रया देना स्वाभाविक जैसा है. सोशल मीडिया का होना अच्छा और बुरा दोनों है. पर, इन सब मामलों में खबर को फैलाने, शेयर करने से पहले धैर्य रखना भी जरुरी है.

ट्विंकल की माँ , फोटो सोर्स- गूगल

आगे की बात…

बताया जा रहा है कि इस घटना के आरोपियों के नाम मोहम्मद ज़ाहिद और मोहम्मद असलम है. मंगलवार को ज़ाहिद और असलम को गिरफ्तार कर लिया गया है. उन दोनों ने अपना अपराध भी स्वीकार कर लिया है. उन दोनों ने बताया कि उन्होंने बच्ची की हत्या दुपट्टे से गला घोट कर की है. इस घटना के पीछे की मुख्य वज़ह पैसों के लेन-देन को बताया गया है.

गिरफ्तार आरोपी, फोटो सोर्स- गूगल

सोशल मीडिया पर इस घटना को कठुआ से जोड़ा जा रहा है. नाम के आधार पर आरोपियों को आरोपी कहने की बजाय ‘मुस्लिम आरोपी’ कहा जा रहा है. घटना की कुछ टाइम पहले हुए कठुआ मामले के साथ धर्म के आधार पर तुलना की जा रही है.

किसी एक घटना को किसी दूसरे घटना से जोड़ा कैसे जा सकता है? कठुआ मामले से जोड़े जाने का सीधा-सा मतलब यह है कि इस मामले को भी धार्मिक बनाया जा रहा है ताकि इस पर भी आने वाले दिनों में राजनीति खेली जा सके. असल में इस मामले में एक असमानताएं हैं जिसकी वजह से इसे कठुआ से नहीं जोड़ा जा सकता. पर इस पर ज्यादा लिखने-बोलने का मतलब है दोनों घटनाओं की तुलना करना कि कौन-सी घटना ज्यादा वीभत्स है, हम ऐसा नहीं कर रहे हैं. स्पष्ट भाषा में कहें तो कठुआ वाली घटना रेप की थी और अलीगढ़ वाली हत्या की है. यहाँ सबसे ज्यादा जोर इस बात पर होना चाहिए कि इंसानियत दोनों घटनाओं में शर्मसार हुई है.

यह था पूरा मामला. घटना के बाद से ही सोशल मीडिया का मौसम बदल गया है. हर तरफ ट्विंकल का नाम ही चल रहा है. यहाँ तक तो सब ठीक था पर आरोपियों के नाम के साथ मुसलमान जोड़ा जा रहा है और पीड़िता के नाम के साथ हिंदू और इस घटना को इंसानियत के नजरिये से देखने की बजाय धर्म के नजरिये से देखा जा रहा है. दोनों तरफ के कट्टर, लोगों की आँखों पर धर्म का चश्मा चढ़ा रहे हैं. यहाँ उस मासूम की जान ली गई है, वीभत्सता बरती गई है. समाज में रह रहे दरिंदों की दरिंदगी उजागर हुई है. इंसानियत की हत्या हुई है.

हमारा समाज कर क्या रहा है? इसे चाहिए क्या? यह समाज आरोपी को सजा दिलाने के बजाय एक पूरे समुदाय को कुसूरवार बताना चाह रहा है. हम आज ट्विंकल के आरोपियों के खिलाफ लड़ रहे हैं या एक धर्म के खिलाफ यह आपको और हमको ही तय करना होगा. सोचिये, तय कीजिये फिर आगे बढ़िए.

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