ट्रक में टाटा और चप्पल में बाटा, का कोई मुकाबला नहीं है.

ये लाइंस बचपन में हम सबने सुनी है तब से हमारे दिमाग में टाटा और बाटा के लिए जो इज्जत बनी है वो आज तक कायम है. लेकिन, आज बात सिर्फ टाटा कंपनी की करेंगे. देश की दिग्गज बिजनेस कंपनी टाटा ग्रुप और इस नामी कंपनी के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा का नाम कौन नहीं जानता है. टाटा ग्रुप के साथ काम करने के सपने तो बहुत से लोग देखते हैं लेकिन, कुछ खास ही लोग होते हैं जिनकी ये ख़्वाहिश पूरी होती है. लेकिन, अब हम अगर आपसे कहें कि अगर खुद रतन टाटा आपको कॉल करके अपने साथ काम करने का ऑफर दें तो आपको कैसा लगेगा. तो यकीनन वो मोमेंट आपको आम से अचानक सबसे खास होने का सुखद एहसास दिलाएगा.

रतन टाटा के साथ शांतनु, फोटो सोर्स - गूगल

रतन टाटा के साथ शांतनु, फोटो सोर्स – गूगल

तो आज आपको उस खास लोगों में शामिल हुए 27 साल के शांतनु नायडू से मिलवाएंगे. जो आज की तारीख में रतन टाटा ग्रुप के साथ काम कर रहे हैं. दरअसल, शांतनु ने एक ऐसा काम किया जिसके लिए खुद रतन टाटा ने उनको कॉल करके जॉब ऑफर किया था. हाल ही में शांतनु ने रतन टाटा के साथ अपनी एक तस्वीर सोशल साइट पर शेयर की है, जिसके चलते वह खबरों में आ गए. अपनी इस खास तस्वीर के साथ ही शांतनु ने फेसबुक पेज ‘ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे’ पर एक अच्छी पोस्ट भी लिखी. इस पोस्ट के जरिये उन्होंने बताया कि, आख़िर कैसे वह इस ड्रीम जॉब को हासिल करने में सफल रहे. उनकी ये सक्सेस पोस्ट स्टोरी खूब वायरल हो रही है.

शांतनु की वायरल फेसबुक पोस्ट, फोटो सोर्स - 'ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे

शांतनु की वायरल फेसबुक पोस्ट, फोटो सोर्स – ‘ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे

अपनी इस पोस्ट में शांतनु ने बताया, 5 साल पहले मैंने सड़क पर एक आवारा कुत्ते को एक्सीडेंट की वजह से मरते हुए देखा था. जिसे देख कर मेरा मन विचलित हो गया था, इसके बाद मैंने आवारा कुत्तों को सड़क दुर्घटना से बचाने के लिए सोचना शुरू किया. काफी दिनों बाद मुझे आवारा कुत्तों के लिए चमकदार कॉलर बनाने का आइडिया आया. जिससे कि सड़क पर गाड़ी चलाते ड्राइवरों को दूर से ही कुत्ते दिख सकें.

शांतनु द्वारा बनाई गयी आवारा कुत्तों के लिए चमकदार पट्टी, फोटो सोर्स - गूगल

शांतनु द्वारा बनाई गयी आवारा कुत्तों के लिए चमकदार पट्टी, फोटो सोर्स – गूगल

अपनी पोस्ट में आगे शांतनु ने लिखा,

मेरा ये आइडिया बहुत तेजी से फैलने लगा. जिसके बाद टाटा समूह की कंपनियों के समाचार पत्र में मेरे इस आइडिया के बारे में लेख लिखा गया. शांतनु ने बताया कि, ‘उस दौरान मेरे पिता (जो खुद एक डॉग लवर हैं) ने मुझे, रतन टाटा को एक पत्र लिखने के लिए कहा था, पिता ने बताया कि रतन टाटा को भी कुत्तों से बहुत प्यार है’.

शुरुआत में पत्र लिखने के लिए मैं हिचकिचा रहा था लेकिन, फिर मैंने खुद से कहा, ‘क्यों नहीं?’  मेरे पत्र लिखने के दो महीने बाद टाटा समूह की ओर से जवाब आया, जिसमें मुझे एक मीटिंग के लिए आमंत्रित किया गया था.

रतन टाटा के साथ शांतनु, फोटो सोर्स- गूगल

रतन टाटा के साथ शांतनु, फोटो सोर्स- गूगल

शांतनु ने मुस्कुराते हुए बताया कि , ‘टाटा ग्रुप के इस आमंत्रण पर मैं यकीन नहीं कर पा रहा था’. हालांकि, फिर कुछ दिनों बाद मैं टाटा के मुंबई ऑफिस गया जहां खुद रतन टाटा मुझसे मिले और कहा, आप जो काम करते हैं उससे मैं बहुत प्रभावित हुआ हूँ. इसके बाद रतन टाटा मुझे अपने घर ले गए कुत्तों से मिलवाने के लिए. जिसके बाद रतन टाटा ने शांतनु को उसके नेक काम के लिए फंड मुहैया कराया.

फोटो सोर्स - गूगल

फोटो सोर्स – गूगल

शांतनु ने बताया, उस दौरान मैं US में रहकर johnson and cornell यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की पढ़ाई कर रहा था. लेकिन, मैंने रतन टाटा से वादा किया कि मैं अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद पूरी तरह से टाटा ट्रस्ट के लिए काम करूंगा.

शांतनु कहते हैं, मास्टर्स डिग्री पूरी कर जैसे ही मैं भारत वापस आया तो, रतन टाटा का मुझे फोन आया. कॉल पर रतन टाटा ने मुझसे कहा कि ‘ऑफिस में मुझे बहुत सारा काम करवाना है, क्या तुम मेरे असिस्टेंट बनोगे?’ इस फोन कॉल पर शांतनु को यकीन नहीं हुआ दरअसल, शांतनु को ये सब एक सपने जैसा लग रहा था. लेकिन, उसके बाद वह पिछले 18 महीनों से रतन टाटा ट्रस्ट के लिए काम कर रहे हैं.

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