आप लोग मुझे सिर्फ 50 दिन का समय दीजिए, यानि सिर्फ 30 दिसंबर तक। अगर मेरी बात सही नहीं हुई या मेरे अंदर कोई कमी दिखी तो, आप मुझे जिस चौराहे पर बुलाएंगे मैं चला आऊंगा।

क्या यह लाइन याद है आपको? यह लाइन है 8 नवंबर 2016 की। बयान ज्यादा पुराना नहीं है। इसलिए लोगों को याद रहना स्वाभाविक है। यह वादा था, पीएम नरेन्द्र मोदी का। लेकिन, यह वादा लगता है, पीएम मोदी के वादों की फेहरिस्त में कुछ ज्यादा ही पुराना हो गया है। पुराना हो भी सकता है क्योंकि हमारे देश के सबसे ऊंचें पद पर सवार श्री नरेन्द्र मोदी रोज़ कई सारे वादें करते हैं। अब तीन साल पुराने वादे को कौन याद रखने वाला है?

लेकिन, ऐसा नहीं है। वो वादा भी याद है लोगों को और वो भाषण का क्लिप भी। लोगों की नाराजगी इसी बात से देखी जा सकती है कि, आज बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का जन्मदिन है लेकिन, आज पूरे दिन ट्विटर पर ‘#आओ मोदी चौराहे पर’ ट्रेंड करता रहा।

मतलब जिस पीएम की तारीफ विदेशों में होती है, आज उसके देश के लोग ही ट्विटर पर उन्हें ट्रोल कर रहे हैं। अब यह ट्रोल पीएम के उस बयान के लिए किया जा रहा है या फिर यह उन लोगों का दर्द बोल रहा है जो, नोटबंदी के समय लोगों ने झेला था। ऐसे में पीएम मोदी को चाहिए कि सामने आकर इन सभी ट्रोलर्स को जवाब देना चाहिए। मोदी साहब हमेशा से अपने बयान में कहते आए हैं कि भारतीय जनता पार्टी ने जो वादा किया, उसे पूरा करके दिखाया है। क्योंकि बीजेपी कोई जुमलेबाजों की पार्टी नहीं है। अब ऐसे में मोदी साहब ऐसे ट्रोलिंग पर अगर मुंह बंद कर लेंगे तो, ये ठीक नहीं होगा।

अगर ट्विटर के पोस्ट पर ध्यान दें तो, यह नोटबंदी के वक्त जितने लोगों ने तकलीफ़ें झेली थी, उनका गुस्सा साफ दिख रहा है। साल 2016 के उस मंजर को याद करने पर रुह भी कांपने लगती है। सभी ATM के सामने लोगों की लंबी लाइनें, कुछ लोगों को तो उसी लाइन में दम तोड़ते देखा गया। घर में शादी थी लेकिन, पास पैसा नहीं कि कुछ सामान खरीद सकें। इसके अलावा बैंक कर्मचारियों ने दिन-रात एक करके जो मेहनत की थी, उसका रिजल्ट तक मोदी सरकार नहीं दे पाई।

नोटबंदी के पीछे कई सारी वजह बताई गई थी। जिसमें कैश लेस इंडिया, कालाधन, आतंकवाद और चरमपंथी प्रमुख मुद्दा था। लेकिन, इसकी जमीनी स्तर पर जो हकीकत है वो केवल एक साल बाद ही दिखने लगी थी। जिस आतंकवाद का हवाला देकर मोदी जी ने मास्टर स्ट्रोक खेला था, नोटबंदी के बाद उसमें बढ़ोत्तरी ही हुई। साल 2016 में 155 आतंकी हमले हुए लेकिन, नोटबंदी के बाद साल 2017 में यह संख्या 155 से 184 हो गई।

अपनी हर उपलब्धियों को मोदी सरकार गिनवाने में या बताने में कभी पीछे नहीं हटी लेकिन, जब भी बात नोटबंदी की होती है तो सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंगती। अब ऐसे में जिस दिन को, जनता द्वारा जयंती के रुप में मनाया जाना चाहिए, उस दिन को काला दिन(Blackday) करार देना कितनी शर्म की बात है। आज लालकृष्ण आडवाणी का बर्थडे है लेकिन, किसी को इसकी चिंता नहीं है। यह भी मोदी जी की उपलब्धियों में गिना जाएगा।

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