दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्रों में से एक सियाचिन ग्लेशियर में कल अचानक हुए हिमस्खलन में पेट्रोलिंग कर रही भारतीय सेना की एक टीम के 4 जवान शहीद हो गए. इनके अलावा 2 पोर्टर्स की भी मौत हुई है, वहीं एक अन्य जवान की हालत गंभीर है. सियाचिन में आई, इस प्राकृतिक आपदा पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत से बात कर घटना की ताजा जानकारी ली है.

उत्तरी लद्दाख में स्थित सियाचिन ग्लेशियर की लगभग 19 हजार फुट की ऊंचाई पर, सोमवार दोपहर को ये भीषण हिमस्खलन हुआ. अचानक आए इस बर्फीले तूफान में सेना की गश्‍ती दल के 8 जवान फंस गए. बर्फ में दबे जवानों की जान बचाने के लिए सेना ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया. खराब मौसम के बीच सेना की तरफ से लगातार सर्च ऑपरेशन चला कर बर्फ से जमे जवानों को बाहर निकाला गया था.

सियाचिन में पेट्रोलिंग करती भारतीय सेना की एक टीम की तस्वीर, फोटो सोर्स - गूगल
सियाचिन में पेट्रोलिंग करती भारतीय सेना की एक टीम की तस्वीर, फोटो सोर्स – गूगल

सैन्य सूत्रों के अनुसार, सियाचिन के माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तापमान में सेना की एक 8 सदस्यीय टीम नियंत्रण रेखा के पास पेट्रोलिंग करने गई हुई थी. इस गश्ती दल में सेना के दो पोर्टर (कुली) भी शामिल थे. सेना की ये टुकड़ी अपने एक बीमार साथी को पोस्ट से अस्पताल पहुंचाने के लिए निकली थी लेकिन, दोपहर करीब 3 बजे उनके रास्ते में अचानक हुए हिमस्खलन के साथ आए बर्फीले तूफान में 8 जवानों वाली पेट्रोलिंग टीम फंस गयी.

सियाचिन में आए भीषण हिमस्खलन की सूचना मिलते ही भारतीय सेना ने बर्फ में फंसे जवानों की खोज के लिए तत्काल सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया. कई फुट बर्फ के नीचे दबे गश्ती दल के 8 जवानों को निकालने के बाद उन्हें हेलीकॉप्टर के जरिए सेना के अस्पताल पहुंचाया गया. इनमें से चार जवान और दो पोर्टर शहीद हो गए. एक अन्य जवान की हालत गंभीर है. आठवें जवान की हालत सामान्य है. सियाचिन में आए हिमस्खलन में बचे दो जवानों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है. दोनों को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है.

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स - गूगल
प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स – गूगल
कर्नल राजेश कालिया ने बताया कि ,

गभीर रूप से घायल सभी जवानों को समय रहते सैन्य अस्पताल पहुंचा दिया गया था लेकिन, बर्फ में दबे रहने के कारण हुई हाइपोथर्मिया की वजह से 4 जवान और 2 पोर्टर शहीद हो गए.

सेना सूत्रों के मुताबिक, लापता जवानों की तलाश में ऊंचे पर्वतीय इलाकों में राहत अभियान चलाने में माहिर एवलांच पैंथर्स को उतारा गया. इसके साथ ही इस सर्च अभियान में सेना की माउंटेन रेस्क्यू टीम को भी शामिल किया गया. खराब मौसम के बावजूद भी रेस्क्यू टीम ने सर्च ऑपरेशन जारी रखा, जिसके चलते सभी जवानों को जो कि गंभीर हालत में थे, उन्हें ढूंढ निकाला गया था.

क्या है हाइपोथर्मिया ?

सियाचिन की खून जमा देने वाली ठंड में रहने वाले जवानों को हाइपोथर्मिया का खतरा बना रहता है. अल्पताप (हाइपोथर्मिया) में शरीर का तापमान सामान्य से काफी कम हो जाता है. सामान्य तौर पर शरीर का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस (98.6 फारेनहाइट) रहता है. बहुत अधिक ठंडे वातावरण के कारण यह 35 डिग्री से भी नीचे चला जाता है. इस स्थिति को अल्पताप कहते हैं. सियाचिन में तापमान शून्य से भी 30 डिग्री या इससे अधिक नीचे रहता है. ऐसे में वहां शरीर का तापमान तेजी से नीचे गिरता है.

बताते चलें कि सियाचिन में इससे पहले भी कई बार इस तरह की प्रकृतिक आपदाओं में भारतीय सेना के सैकड़ों जवान अपनी जान गंवा चुके हैं. साल 2016 में इसी तरह के हिमस्खलन की वजह से आए बर्फीले तूफान में मद्रास रेजीमेंट के जवान हनुमनथप्पा समेत कुल 10 जवान बर्फ में दब कर शहीद हो गए थे. आंकड़ों के अनुसार, साल 1984 से लेकर अब तक सियाचिन में हुए हिमस्खलन की घटनाओं में सेना के 35 ऑफिसर्स समेत 1,000 से अधिक जवान शहीद हो चुके हैं.

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