विकास दुबे, जिसके ख़िलाफ़ कुल साठ मुक़दमे दर्ज हैं, को गिरफ़्तार करने गई पुलिस टीम पर हुए ज़बर्दस्त हमले में आठ पुलिसकर्मी मारे गए और सात पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए.

विकास दुबे

विकास दुबे

विकास दुबे के ख़िलाफ़ कानपुर के चौबेपुर थाने में कुल साठ मुक़दमों में हत्या और हत्या के प्रयास जैसे कई गंभीर मुक़दमे भी शामिल हैं.

बीबीसी में छपी एक ख़बर के अनुसार कानपुर के पुलिस महानिरीक्षक मोहित अग्रवाल ने बताया कि जिस मामले में पुलिस विकास दुबे के यहां दबिश डालने गई थी वह भी हत्या से जुड़ा मामला था और विकास दुबे उसमें नामज़द है.

पुलिस टीम पर हुए ज़बर्दस्त हमले में मरने वालों में बिल्हौर के पुलिस क्षेत्राधिकारी देवेंद्र मिश्र और एसओ शिवराजपुर महेश यादव भी शामिल हैं. जिस विकास दुबे को गिरफ़्तार करने यह टीम गई थी, उस पर न सिर्फ़ अपराधों के संगीन आरोप हैं बल्कि दर्जनों मुक़दमे भी दर्ज हैं. राजनीतिक दलों में भी उसकी अच्छी-ख़ासी पहुंच बताई जाती है. कई बार उसकी गिरफ़्तारी भी हुई लेकिन अब तक किसी मामले में सज़ा नहीं मिल सकी है.

विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस

विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस

चौबेपुर थाने में दर्ज मुक़दमों के आधार पर कहा जा सकता है कि पिछले क़रीब तीन दशक से अपराध की दुनिया से विकास दुबे का नाम जुड़ा हुआ है.

आइये पहले हम आपको कुछ जघन्य अपराध बता देते हैं जिनके कारण विकास दुबे सुर्खियों में रहा।

  1. साल 2001 में विकास दुबे पर थाने के अंदर घुसकर बीजेपी के दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री संतोष शुक्ला की हत्या करने का आरोप लगा. संतोष शुक्ला की हत्या एक हाई प्रोफ़ाइल हत्या थी. इतनी बड़ी वारदात होने के बाद भी किसी पुलिस वाले ने विकास के ख़िलाफ़ गवाही नहीं दी. कोर्ट में विकास दुबे के ख़िलाफ़ कोई साक्ष्य नहीं पेश किया जा सका जिसकी वजह से उसे छोड़ दिया गया।
  2. साल 2000 में कानपुर के शिवली थाना क्षेत्र स्थित ताराचंद इंटर कॉलेज के सहायक प्रबंधक सिद्धेश्वर पांडेय की हत्या के मामले में भी विकास दुबे को नामज़द किया गया था।
  3. साल 2000 में ही विकास दुबे के ऊपर रामबाबू यादव की हत्या के मामले में साज़िश रचने का आरोप भी लगा था. बताया जा रहा है कि यह साज़िश विकास ने जेल से ही रची थी.
  4. साल 2004 में एक केबल व्यवसायी की हत्या में भी विकास दुबे का नाम सामने आया था. पुलिस के मुताबिक़, इनमें से कई मामलों में विकास दुबे जेल जा चुका है लेकिन ज़मानत पर लगातार छूटता रहा. साल 2013 में भी विकास दुबे का नाम हत्या के एक मामले में सामने आया था.
  5. साल 2018 में विकास दुबे पर अपने चचेरे भाई अनुराग पर भी जानलेवा हमला कराने का आरोप लगा था जिसमें अनुराग की पत्नी ने विकास समेत चार लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कराई थी.
  6. विकास दुबे अवैध तरीक़े से ज़मीन की ख़रीद-फ़रोख़्त भी करता था. इसी की बदौलत विकास दुबे ने कथित तौर पर ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से करोड़ों रुपए की संपत्ति बनाई और बिठूर में ही उसके कुछ स्कूल और कॉलेज भी चलते हैं.

बताया जाता है कि हर राजनीतिक दल में विकास दुबे की पैठ है और यही वजह है कि आज तक उसे नहीं पकड़ा गया. पकड़ा भी गया तो वो कुछ ही दिनों में जेल से बाहर आ गया। विकास दुबे मूल रूप से कानपुर में बिठूर के शिवली थाना क्षेत्र के बिकरू गांव के रहने वाला है. गांव में उन्होंने अपना घर क़िले जैसा बना रखा है जिसमें उसकी मर्ज़ी के बिना घर के भीतर कोई जा नहीं सकता।

विकास दुबे का घर

विकास दुबे का घर

साल 2002 में जब उत्तरप्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की सरकार थी, उस वक़्त विकास दुबे का नाम चलता था. इस दौरान उसने अपराध की दुनिया में अपना दबदबा क़ायम करने के साथ ही पैसा भी ख़ूब कमाया और न सिर्फ़ अपने गांव में बल्कि आस-पास के गांवों में भी विकास का दबदबा क़ायम था. ज़िला पंचायत और कई गांवों के ग्राम प्रधान के चुनाव में विकास दुबे की पसंद और नापसंद काफ़ी मायने रखती रही है.

बिकरू गांव के एक बुज़ुर्ग के अनुसार गांव में पिछले 15 साल से उम्मीदवार निर्विरोध प्रधान चुने जा रहे हैं जबकि विकास दुबे के परिवार के ही लोग पिछले पंद्रह साल से ज़िला पंचायत सदस्य का भी चुनाव जीत रहे हैं।

विकास दुबे के पिता किसान हैं और ये कुल तीन भाई है जिनमें एक भाई की क़रीब आठ साल पहले हत्या कर दी गई थी. भाइयों में विकास दुबे सबसे बड़ा है। पत्नी ऋचा दुबे फ़िलहाल ज़िला पंचायत सदस्य हैं.

बताया जाता है कि विकास दुबे के ख़िलाफ़ थाने में चाहे जितने मुक़दमे दर्ज हों लेकिन गांव में उसकी बुराई करने वाला कोई नहीं मिलेगा और न ही उसके ख़िलाफ़ कोई ग़वाही देता है। साल 2000 के आस-पास शिवली के तत्कालीन नगर पंचायत के चेयरमैन लल्लन वाजपेयी से विवाद के बाद विकास दुबे ने अपराध की दुनिया में क़दम रखा था।

विकास दुबे के दो बेटे हैं जिनमें से एक इंग्लैंड में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है जबकि दूसरा बेटा कानपुर में ही रहकर पढ़ाई कर रहा है.