हमारे समाज में काफी ऐसे लोग हैं जिनके खुद के कपड़े की लंबाई कितनी ही बड़ी क्यों न हो पर उनकी सोच की लंबाई काफी छोटी है. ऐसे लोग बलात्कार में दोषी हमेशा पीड़ित लड़की को ही मानते हैं. ऐसे लोगों का मानना है कि लड़कियों के कपड़े का साइज़ डिसाइड करता है कि उनके साथ रेप होगा या नहीं. इस तरह की सोच का बीज घर में ही पनपता  है. घर में कई बार पहनावे पर आपत्ति जताई जाती है. हमारे घरों में ही हमें बार बार बोलकर हमारे दिमाग में बैठा दिया जाता है कि कौन सा कपड़ा पहनने लायक है और कौन सा नहीं. कपड़ों से कैरेक्टर को मापने वाले लोग अब चैन की सांस ले पाएंगे. आ गयी हैं हमारे समाज में ‘सुपर संस्कारी साड़ियाँ’. ये मज़ाक नहीं है हम सच बता रहे हैं पर अभी  ये कन्फ़र्म करना बाकी है कि ये साड़ियाँ सिर्फ संस्कारी लड़कियां और औरतें पहनेंगी या मर्दों को भी अपना संस्कारी होने का प्रूव इस साड़ी को पहन कर देना होगा.

रेप प्रूफ कपड़े/ फोटो सोर्स गूगल

कुछ दिन पहले ही गुरुग्राम में एक घटना घटी थी जहां एक महिला ने छोटे कपड़े पहनने पर कमेंट किया था. मासूम सी लड़कियां जिनके ऊपर महिला ने कमेंट किया था उन्हें इस बात पर बहुत गुस्सा आया था और उनहोंने उस महिला का विडियो बना लिया था. विडियो में आपने देखा होगा कि उन्हें माफी मांगने के लिए बहुत मजबूर किया गया था पर हठी महिला ने माफी नहीं मांगी. ये विडियो भी काफी वायरल हुई थी.

इसके बाद एक गंभीर सवाल उठा की मैडम बात तो सही ही बोल रही होंगी. रेप समस्या तो है ही और हो सकता है शायद कपड़े इसकी वजह हो. अब सब कोइ राखी सावंत वाला फॉर्मूला तो इस्तमाल नहीं कर सकता न क्योंकि ताला और चेन काफी भारी होता है इसे लेकर चलने में काफी तकलीफ होगी. ज़्यादातर लोग कहते हैं कि लड़कियों को उनके कपड़े का चुनाव सोच समझकर करना चाहिए. उन्हें संस्कारी कपड़े ही पहनने चाहिए. हमें लगता है कि संस्कारी कपड़ों का एक पैरामीटर सेट करना चाहिए और जैसे की राष्ट्रीय पशु और राष्ट्रीय फल होता है वैसे ही राष्ट्रीय कपड़े भी घोषित कर देना चाहिए.

राखी सावंत/ फोटो सोर्स गूगल

ऐसे लोगों की मानसिकता पर हम और आप कई बार प्रहार कर चुके हैं. लेकिन, अब ऐसा लगता है कि जैसे औरतों को खुद के पहनावे में बदलाव की ज़रूरत है. बॉस्टन में रहने वाली तन्वी टंडन एक व्यंगकार हैं. समाज में औरतों पर होने वाले अत्याचारों पर वह काफी तीखा व्यंग करती हैं. उनकी एक वेबसाइट भी है जिसके पीछे 4 लोग काम करते हैं. उन्होनें बताया कि नज़रिये पर पूरा समाज बात कर रहा है तो हमने सोचा कि क्यों न पहनावे पर ही व्यंग किया जाये. वह कहती हैं कि उन्होनें यौन उत्पीड़न पर गंभीर बात करने के बजाय ऐसे लोगों की सोच का मजाक उड़ाने के बारे में सोचा जो  सिर्फ लड़कियों को  दोषी मानते हैं. इसके बाद वेबसाइट ने ‘सुपर संस्कारी साड़ी’ पेश कर दी.

साइट पर सुपर संस्कारी साड़ी के बारे में बताया गया है कि साड़ी ऐन्टी रेप तकनीक से बनाई गयी है. यह साड़ी कुछ भारतीयों की सोच को ध्यान में रख कर भी बनायी गयी है और साड़ी पहनने वाली महिलाएं गायब हो जाएंगी. ये साड़ी आपको वहशी नज़रों से बचा कर रखेगी क्योंकि आपके शरीर का कोई भी अंग नहीं दिखेगा. जब दरिंदे को आपका कोई अंग दिखेगा ही नहीं तो आपका रेप भी नहीं होगा.

साड़ियाँ भी कई प्रकार की  हैं. आफिस जाने के लिए महत्वाकांक्षी साड़ी भी है जिसकी कीमत 500 रूपये है. आइटम नंबर साड़ी भी है जिसकी कीमत 100 रूपये है. संस्कारी बीच वियर साड़ी की कीमत 200 रूपये है.

हमें लगता है कि इस तरह की साड़ियां मर्दों को भी पहनना चाहिए जो सोचते हैं कि कपड़े के वजह से लड़कियों का रेप होता है. इससे फायदा यह रहेगा कि उनकी विचारधारा भी इस तरह के पोशाक से शुद्ध हो जाएंगी क्योंकि गर्मी इतनी है कि इनकी सारी सोच पसीना बनकर बह जाएगी.

 

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