शिव कुमार बटालवी पंजाबी शायरी की दुनिया के सचिन तेंदुलकर हैं. इनकी कविताएं प्रेम के लिए, जुदाई के लिए, पीड़ा के लिए और करूणा के लिए याद की जाती हैं.

शिव कुमार बटालवी की लिखी पंजाबी नज़्में इतनी मशहूर हुई हैं कि आम लोगों के मुंह ज़बानी याद हैं, हां भलें ही इनका नाम न जानते हो लेकिन इनकी रचनाएं ज़रूर जानते होगें. इक कुडी जिद्दा नाम मोहब्बत, आज दिन चड्या, लट्ठे दी चादर आदि.

इनके लिखे को हिंदुस्तान-पाकिस्तान के लगभग हर गायक ने आवाज़ दी हैं. 1967 में साहित्य आकादमी पुरस्कार पाने वाले ये सबसे कम उम्र के साहित्यकार थे. पढ़िए इनकी नज़्म. ये नज़्म पंजाबी में लिखी गई थी जिसका अनुवाद तरकश प्रदीप ने किया है.

पीड़ाएँ जब पाँवों में पड़ीं और हिम्मत के क़ुरबान गईं
पीड़ाएँ जब पाँवों में पड़ीं
और हिम्मत के क़ुरबान गईं
तो लोग देखने आए
ये तेरा बिरहा रे
हमने जब इश्क़ से रुतबा पाया
जगत बधाई देने आया
रोया हमें गले लगाए
ये तेरा बिरहा रे
हमको तो कुछ भी अक्ल नहीं
दुनिया आकर बतलाय रही
अब हमको तख़्त बिठाए
ये तेरा बिरहा रे
सौ मक्के हज्ज कराए
ये तेरा बिरहा रे

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