अमित तिवारी पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. पर कोडिंग के साथ-साथ व्यंग्य भी लिखते हैं. इनके लिखे सार्कास्टिक वनलाइनर्स फेसबुक, ट्वीटर पर खूब चलते हैं. उन्हीं वन लाइनर्स के साथ कभी-कभी कविताएं भी लिख देते हैं. अमित के इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप स्टोरीज़ के जरिये हमने इनकी कई बेहतरीन कविताएं पढ़ी हैं.

सरल शब्दों में गहरी बात कह देने की कला व्यंग्य से लेकर इनकी कविताओं तक में बखूबी दिखाई देती है. अमित की कविताओं में भाषा की सजीवता झलकती है. सुंदर भाषा और सधे हुये लहजे में कही गई बात कविता के ढांचे में और भी सुंदर लगती है. आज हम आपको प्रेम पर लिखी उनकी एक ऐसी ही कविता पढ़वाने जा रहे हैं.

ये रही अमित तिवारी की लिखी हुई कविता –

हम बातें करते हैं
चिड़ियों के रंगों की
पड़ोसी के प्रेम प्रसंग की
उस लाल धारीदार शाम की
जिसमें हम घुल गये थे
पिछले महीने

हम बातें करते हैं
चाय के स्वाद की
नींद में पड़ रही बर्फ़ की
और उस पुराने तालाब की
जिसके किनारे होना
बादल पर होने जैसा था

हम बातें करते हैं
मुहल्ले के बदतमीज मुर्गे की
पुरानी बदसूरत फोटो की
और उस रेस्त्रां की
जहाँ चपाती की ज़िद पर
बैरा भी लजा गया था

हम बातें करते हैं
और भूल जाते हैं
कि क्या बात की
फिर सब के आख़िर में
पीठ पर उतरती है वो बात
जिसके जवाब में
गहरा जाती हैं तुम्हारी पुतलियाँ
तमाम बातों और किस्सों के बाद
याद रखने को
ये उपसंहार काफी होता है