भारत और पाकिस्तान दोनों ही देश एशिया की दो प्रमुख परमाणु संपन्न राष्ट्र है। इन दोनों ही पड़ोसी मुल्क में कई समानताएं हैं। इन दोनों देशों के बीच एक समानता यह भी है कि दोनों ही देशों को परमाणु संपन्न बनाने वाले वैज्ञानिक मुस्लिम भारतीय थे। आप सही समझ रहे हैं , भारतीय परमाणु वैज्ञानिक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम और पाकिस्तानी वैज्ञानिक डॉ कादिर खान दोनों का जन्म भारत में हुआ था।

डॉ अब्दुल कादिर खान। फोटो सोर्स: गूगल

कादिर खान का जन्म भारत के भोपाल शहर में 1935 में हुआ था। जन्म के कुछ साल बाद जब भारत का विभाजन हुआ तो कादिर खान पाकिस्तान नहीं जाना चाहते थे। यही वजह थी कि विभाजन के दौरान कादिर के भाई पाकिस्तान चले गए लेकिन कादिर ने पाकिस्तान जाने से साफ मना कर दिया। लेकिन बाद में कादिर ने भारत से पाकिस्तान जाने का फैसला किया।

यह कहा जाता है कि कादिर खान पाकिस्तान जाने के बाद कट्टर हो गए थे। इसी कट्टरता की वजह से कादिर खान ने परमाणु बम पाकिस्तान को बनाकर दिया। वहीं दूसरी तरफ कलाम देशभक्त तो थे ही साथ ही एक कुशल लेखक और विचारक भी थे। उन्हें देशभक्ति और कट्टर देशभक्ति का मतलब भी पता था।

कलाम इस मामले में कादिर से इसलिए भी अलग थे क्योंकि कादिर ने युद्ध के दौरान पाकिस्तान को शक्तिशाली बनाने के लिए परमाणु बम बनाया था। जबकि कलाम को राष्ट्र की सुरक्षा के लिए परमाणु की आवश्यकता और इसके उपयोग के बाद किसी समाज को होने वाले नुकसान के बारे में भी पता था। कलाम किसी भी मामले में कट्टर नहीं थे। एक लेखक, शिक्षक व इंसान के रूप में कलाम करोड़ों लोगों के आदर्श थे।

अब्दुल कादिर खान (photo: google )

भारत ने पाकिस्तान से बंग्लादेश को 1971 के दौरान अलग कर दिया। इसके बाद पकिस्तान और वहां के लोग भारत से बुरी तरह चिढ़ गए। इसी के बाद भारत ने 1974 के दौरान पोखरण में परमाणु परीक्षण किया। इस परीक्षण के बाद पाकिस्तान बुरी तरह से भारत से चिढ़ने लगा। तब पाकिस्तान का एकमात्र उद्देश्य परमाणु बम का निर्माण करना हो गया था। इसके लिए पाकिस्तान को जरूरत थी एक ऐसे इंसान की जो परमाणु बनाने की कला जानता हो। इस दौरान अब्दुल कादिर खान एम्सटरडैम से पाकिस्तान की हालत पर नजर बनाए हुए थे।

एक लेखक गॉर्डन कोरिया के मुताबिक, “यह सच बात है कि अब्दुल कादिर के मन में परमाणु बम बनाने के जज्बे के पीछे भारत ही सबसे बड़ी वजह था। जब अब्दुल ने 16 दिसंबर 1971 में ढाका में पाकिस्तानी सेना को भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण करते हुए देखा तो उसने ठान लिया कि वह अब दोबारा ऐसा नहीं होने देगा।“

इससे साफ हो गया कि पाकिस्तानी वैज्ञानिक के मन में परमाणु बनाने की मुख्य वजह भारत से बदला लेना ही था। यह कहा जाता है कि कादिर के पिता शिक्षक थे और वहीं उनके दादा सेना के अधिकारी थे। कादिर के मन में कट्टर राष्ट्रवाद पैदा होने की मुख्य वजह विभाजन को माना जाता है। यही वजह है कि कादिर खान अक्सर कहा करते थे कि जिसका कोई देश नहीं होता है उसे हर कोई लात मारता है।

यूरेनको के लिए काम करने के दौरान कादिर ने बम बनाने की तकनीक को चुराने का काम किया। कादिर ने गुप्त तरह से परमाणु फैक्ट्री के हर तकनीक को समझ लिया। इसके बाद वो ऐम्सटरडैम छोड़कर पाकिस्तान आ गए। इसके बाद उन्होंने भारत से बदला लेने के लिए यहां परमाणु बम बनाना शुरू कर दिया।

1976 में पाकिस्तान ने यूरेनियम संवर्धन करने के लिए इंजीनियरिंग रिसर्च लैबोरेटरीज की स्थापना की। इस लैबोरेटरी के मुख्य कर्ताधर्ता अब्दुल खान ही थे। बाद में अब्दुल खान के सम्मान में लैब का नाम खान रिसर्च लैबोरेटरीज कर दिया गया था।

इसके बाद खुलकर कादिर खान परमाणु तकनीक को खरीदने के लिए दूसरे देशों के साथ सौदा करने लगे। इसे पाकिस्तान सरकार ने नहीं रोका क्योंकि कादिर की सीधी पहुंच सेना के आला अधिकारियों तक थी। यही वजह था कि कादिर खान पाकिस्तान के विदेश व रक्षा जैसे मामलों में हद से ज्यादा महत्व रखते थे।

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