1 मई 2016 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्ज्वला योजना को लॉंच किया था. इस योजना के तहत गरीबी रेखा के नीचे के परिवारों को एलपीजी का कनेक्शन दिया जाना था. 5 करोड़ कनेक्शन देने का संकल्प बीजेपी ने किया था. अगर आप सोच रहे हैं कि कनेक्शन सरकार मुफ्त में दे रही थी तो आप गलत हैं.

इस योजना में सरकार आपको पहले गैस का कनेक्शन देती है और फिर अगले तीन साल में आपको सरकार को 1600 रुपये इस गैस कनेक्शन के लिए चुकाना होता है. इस पूरे योजना के लिए 8 करोड़ रुपये खर्च के लिए निर्धारित किए गए थे.

साल 2019 के चुनाव में बीजेपी इस योजना को लेकर खुद की पीठ थपथापा रही है और रैलियों में उज्ज्वला योजना को बीजेपी सरकार की एक बड़ी जीत बता रही है.


यह ही नहीं, अगर आपको लगता है कि बीजेपी सिर्फ एक राजनीतिक पार्टी है तो आप गलत हैं. ऐसा लगता है कि बीजेपी अब एक विज्ञापन एजेंसी भी बन चुकी है. इसी वजह से 18 मार्च 2019 को उन्होंने एक विज्ञापन प्रकाशित किया जिसमें दिखाया गया था कि कैसे उज्ज्वला योजना एक हिट होजना साबित हुई है. यह भी पड़ताल का विषय है कि विज्ञापन पर खर्च किया गया पैसा किसके खाते में जमा कराये गए 15 लाख रुपयों में से निकाल कर खर्च किए गए हैं.

वैसे भी बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने समय-समय पर कहा है कि प्रधानमंत्री जी को अपना काम गिनवाने की ज़रूरत नहीं है और यह भी एक वजह है कि प्रधानमंत्री कभी प्रेस कान्फ्रेंस नहीं करते. बहुत अच्छे! शाबास! तो फिर विज्ञापन निकालने की भी क्या ही जरूरत है?


खैर आज बात उज्ज्वला योजना की होगी. विज्ञापन फिर कभी ज्ञान बाचेंगे. हाल ही में किए गए एक सर्वे में ये सामने आया है कि देहात में आज भो बहुत से लोग चूल्हे पर आश्रित हैं. RICE के सर्वे के मुताबिक बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में 85% उज्ज्वला लाभार्थी अब भी चूल्हे पर खाना बनाते हैं. आर्थिक तंगी इसका मुख्य कारण है. चूल्हे पर खाना बनाना स्वास्थ्य के लिए भी बहुत हानिकारक है. चूल्हे पर खाना बनाने के दौरान जो धुआं निकलता है, इतना धुआं एक नवजात बच्चे की मौत के लिए काफी है. लगातार धुएँ को अंदर लेने से फेफड़ों की कई बीमारीयाँ भी हो सकती है खासकर जो महिलाएं चूल्हे का इस्तेमाल करती हैं, उन्हें इस समस्या से ज्यादा जूझना पड़ता है.

साल 2018 में 1550 घरों में सर्वे किया गया था. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 7 करोड़ घरों में एलपीजी का कनेक्शन इस योजना के अंतर्गत लगा दिया गया है. यह एक बहुत ही अच्छा आंकड़ा है पर, जिन लोगों को इस योजना का लाभ मिला है उनमें से 73% लोग अब फिर से चूल्हे का ही इस्तेमाल करते हैं. सिर्फ 27% लोग ही ऐसे हैं जो अब सरकार द्वारा दिये गए गैस का इस्तमाल कर रहे हैं. 37% लोग चूल्हा और गैस दोनों का इस्तमाल कर रहे हैं जबकि 36% लोग पूर्ण रूप से चूल्हे पर ही निर्भर हैं. रिपोर्ट के मुताबिक-

“आम परिवार जो खुद से गैस खरीदते हैं उनकी तुलना में उज्ज्वला लाभार्थी गरीब हैं. गैस को फिर से भरवाना उनके लिए मुमकिन नही है. इस वजह से अगर एक बार गैस खाली हो जाता है तो वह उसे भरवाने नहीं जाते हैं.” 

सर्वे में ये भी बात सामने आई है कि गैस पर खाना बनाना ज़्यादा आसान है पर चूल्हे पर बनने वाली रोटी का स्वाद ज़्यादा अच्छा होता है. ज़्यादातर लोगों का यह भी मानना है कि चूल्हे में पकने वाला खाना ज़्यादा स्वस्थ होता है. लोगों में आम धारण ये भी पायी गयी है कि गैस पर बने हुए खाना को खाने से पेट में गैस बनती है. गलती केवल सरकार की नहीं है. कोई नयी योजना हमें समाज में लाने से पहले उसके बारे में जागरूक करना ज़रूरी होता है. अगर सरकार गैस फ्री में बटवा भी दे तो भी क्या लाभ. गरीब लोगों को तो हर बार गैस को खुद के खर्चे पर ही भरवाना पड़ेगा.

 

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