कहते हैं कि एक महिला की सबसे बड़ी दुश्मन एक महिला ही होती है। इसके लिए तरह-तरह के एग्जाम्पल भी दिये जाते हैं। उन पुराने एग्जाम्पल्स को अभी किनारे रख देते हैं क्योंकि हमारे पास एक लेटेस्ट वाला है। दरअसल एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो को शिवानी सिंह नाम की एक लड़की ने शेयर किया है।

वीडियो में क्या है?

इस वीडियो में एक 40-50 साल की एक औरत है जो अपनी वाहियात-सी सोच को खुल कर डिफ़ेंड करने की कोशिश कर रही है। शिवानी इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखती हैं-

“वो अपनी दोस्तों के साथ शॉर्ट ड्रेस पहनकर रेस्टोरेंट गई थी। वहां वीडियो में दिख रही महिला आसपास खड़े लगभग 6 से 7 आदमियों को देख कर कहने लगी कि इन लड़कियों का रेप होना चाहिए। इन्होंने शॉर्ट ड्रेस पहना है। इसीलिए वो डिजर्व करती हैं कि उनका रेप हो।”

शिवानी आगे लिखती हैं कि उन्होंने उस महिला को मौका भी दिया कि वो अपने कहे पर माफी मांगे पर, उस महिला ने एक बार भी माफी नहीं मांगी। आप यह विडियो देखिये –


इस वीडियो में जब शिवानी और उनकी दोस्त उस महिला से माफी मांगने के लिए कहती हैं तो बजाय इसके कि महिला उन लोगों से माफी मांगे, वो उल्टा उन्हें और भी भद्दी बातें कहने लगती है। वो महिला कहती है –

“तुम रिकॉर्डिंग कर रही हो? हैलो, ये लड़कियां छोटे से छोटे कपड़े पहनना चाहती हैं क्योंकि ये चाहती हैं कि सब उन्हें देखें, ये सभी लड़कियां छोटे कपड़े पहनती हैं और नंगी रहती हैं, उनका रेप होना चाहिए।”

शिवानी ने ये वीडियो इंस्टाग्राम पर भी पोस्ट किया था लेकिन कुछ देर बाद ही यह वीडियो वहाँ से गायब हो गयी। जिसके बाद शिवानी ने इंस्टाग्राम को आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा है –

शिवानी का इन्स्टाग्राम पोस्ट। फोटो सोर्स: शिवानी के इन्स्टाग्राम पेज से।

इन सब के जवाब में वहाँ मौजूद एक लड़की कहती भी है कि अगर कपड़ों की वज़ह से ही किसी का रेप होता है तो उन 2 साल की बच्चियों का और 80 साल की बूढ़ी औरत का रेप क्यों होता है? ये एक बेहद ही सही सवाल है। इसका जवाब बस यही है कि रेप जैसी घटना को अंज़ाम देने वाले पुरुष एक घटिया मानसिकता वाले इंसान होते हैं। इस पर किसी महिला के कपड़े या किसी चीज से कोई फर्क नहीं पड़ता है।

सबसे अफसोस की बात यह है कि ये सारे इल्जाम एक महिला ही दूसरी महिला के ऊपर लगा रही है। एक महिला ही कहती है कि उस दूसरी महिला का छोटे कपड़े पहनना उसकी गलती है और इसी वज़ह से उसका रेप होना चाहिये। कमाल की बात है कि एक औरत रेप जैसी घटनाओं के लिए एक महिला को ही जिम्मेदार ठहरा रही है।

तमाम लोग इन लड़कियों के समर्थन में उतर आए हैं और उस महिला को भला-बुरा कह रहे हैं। यह सही भी है क्योंकि महिला ने अपनी सोच जिस तरह से ज़ाहिर की है उससे किसी का भी माथा ठनक सकता है। एक औरत का एक महिला के लिए इस तरह की सोच होना कतई घटिया है। पर, अगर सिक्के का दूसरा पहलू देखें तो यह बात महसूस करने की जरूरत है कि इस महिला की सोच ऐसी हुई क्यों? एक औरत, महिला अधिकारों के खिलाफ क्यों बोल रही है?

इसका सीधा सा जवाब है। इस औरत के आस-पास का माहौल उसकी ऐसी सोच के लिए जिम्मेदार है। हम पितृसत्तात्मक समाज में रहते हैं। जहां एक औरत का चरित्र उसके कपड़े की लंबाई और घर से बाहर रहने के समय से डिसाइड होता है। जहां एक सिगरेट औरत की छवि को भी धुएँ में उड़ा देती है और उस महिला के मुंह से निकली गाली उसके ही माथे पर चिपका कर उसे हमेशा उसी सरनेम के साथ घूरा जाता है। इसी संकीर्ण सोच वाले माहौल में ही इस महिला की परवरिश हुई है जो अब इसके सोच पर इतनी बुरी तरह से हावी हो चुकी है कि खुले आम अब यह ज्ञान की पंजीरी बांटती घूम रही है।

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