डेढ़ साल से तालिबान आतंकियों के चुंगुल में फंसे भारतीय इंजीनियर्स अब जल्द ही भारत लौट सकते हैं. अफगान-तालिबान और अमेरिका के बीच बातचीत के बाद भारतीय बंधको की रिहाई का रास्ता साफ हो पाया है. दरअसल इस्लामाबाद में तालिबान और अमेरिकी प्रतिनिधियों के बीच एक मीटिंग हुई थी, जिसमें 3 भारतीय इंजीनियर्स की रिहाई का मुद्दा उठा. तालिबान 3 भारतीय इंजीनियर्स को छोड़ने के लिए राजी हो गए लेकिन, इसके बदले में उन्होंने अपने 11 कैदियों की रिहाई की शर्त रखी थी. शर्त मानते हुए अमेरिका ने मीटिंग के बाद 11 तालिबानी कैदियों को रिहा कर दिया है. इन 11 कैदियो में कुछ बड़े अफगान-तालिबान नेता भी शामिल हैं. वही तालिबान द्वारा रिहा किए गए तीनों भारतीय इंजीनियर्स साल 2018 से की कैद में थे.

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स - गूगल
प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स – गूगल
सोमवार को मीडिया रिपोर्ट्स में यह जानकारी दी गई कि, अफगान-तालिबान ने अपने 11 सदस्यों के बदले में 3 भारतीय इंजीनियर्स को रिहा किया है. तालिबान के 2 सदस्यों के हवाले से जानकारी देते हुए एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने बताया, रविवार को इन बंधकों की अदला-बदली की गई. हालांकि ये अदला-बदली किस जगह हुई इसकी जानकारी उन्होंने नहीं दी.
प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स - गूगल
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RFI/RFL की रिपोर्ट के हवाले से ट्रिब्यून ने बताया, तालिबान के सदस्यों ने उनके नाम उजागर न करने की शर्त पर यह जानकारी दी है. इस संबंध में तालिबान सदस्यों से कई सवाल पूछे गए जैसे कि, आतंकवादी समूह ने किसके साथ बंदियों की अदला-बदली की? रिहा किए गए तालिबान सदस्यों को अफगान अधिकारियों ने बंधक बनाये रखा था या अमेरिकी सेना ने? इस प्रकार की कोई भी जानकारी देने से मना करते हुए तालिबान सदस्यों ने कहा ये बेहद संवेदनशील मामला है. इससे ज्यादा हम कुछ नही बता सकते.  

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स - गूगल
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तालिबान के जिन कैदियों को रिहा किया गया है उनमें शेख अब्‍दुर रहीम और मवालावी अब्‍दुर राशिद शामिल हैं. अमेरिकी सेनाओं द्वारा हटाए जाने से पहले अफगानिस्तान में चल रहे तालिबान प्रशासन के दौरान ये दोनों आतंकी गर्वनर के तौर पर कुनार और निमरोज प्रांत में तैनात थे.
प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स - गूगल
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अधिकारियों द्वारा एक फोटो और वीडियो फुटेज जारी की गई है. जिसमे बताया गया है कि, यह फोटो और वीडियो उसी समय का है जब तीन इंजीनियर्स के बदले आतंकियों को रिहा किया गया था.

तालिबान के सदस्यों द्वारा फोटो और वीडियो मुहैया कराया गया है जिसमें वो अपने रिहा सदस्यों का स्वागत कर रहे हैं. भारतीय इंजीनियर्स की रिहाई की पुष्टि अफगान-तालिबान ने की है लेकिन, अफगान सरकार और भारतीय अधिकारियों की तरफ से इस मामले को लेकर अब तक कोई टिप्पणी नहीं की गई है.

मई 2018 में अफगानिस्तान के उत्तरी बागलान स्थित पावर प्लांट में काम करने वाले 7 भारतीय इंजीनियर्स का अपहरण कर लिया गया था. हालांकि इस अपहरण की ज़िम्मेदारी किसी समूह ने नहीं ली थी. इन 7 बंधकों में से एक इंजीनियर को मार्च में रिहा कर दिया गया था. सभी इंजीनियर्स एक बस में सवार होकर सरकारी पावर प्लांट में जा रहे थे. उसी वक्त कुछ अज्ञात बंदूकधारियों ने बस ड्राइवर समेत सातों भारतीयों को अगवा कर लिया था. वहीं साल 2016 में भी एक भारतीय का अपहरण कर लिया गया था जिसकी रिहाई 40 दिन बाद हो पाई थी.

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