चुनाव के वक़्त जिस चीज़ से देश के भीतर एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव होने मे अड़चन आए; उस पर चुनाव के दौरान रोक लगा दी जाती हैं। जैसे उदाहरण के लिए देश मे शराब के ठेके बंद रहते है, ताकि कोई इसका गलत इस्तेमाल न कर सके। लेकिन, पिछले डेढ़ महीने से आचार संहिता के तहत एक ऐसी चीज़ पर रोक लगी हुई है, जिस पर यक़ीन करना थोड़ा मुश्किल है। यह रोक लगी है ‘गानों’ पर। देश में चुनाव के चलते आदर्श आचार संहिता लगी हुई है। जिसकी वज़ह से आकाशवाणी कुछ गाने प्रसारित नहीं कर रहा। यह वो गाने हैं, जिसमें चुनाव लड़ रही पार्टियों से मिलते-जुलते शब्द हैं। जैसे पार्टियों के चुनाव चिह्न, उम्मीदवार और कोई भी ऐसी लाईन, जिससे चुनाव लड़ रही किसी भी पार्टी या उम्मीदवार का प्रचार हो।

जाने पूरी बात

रविवार सुबह 9.30 बजे आकाशवाणी पर आपकी फरमाईश कार्यक्रम आ रहा था। इसमें मध्यप्रदेश से एक श्रोता ने साल 1968 में आई फिल्म का गाना ‘फूल तुम्हे भेजा है खत में, फूल नहीं मेरा दिल है.’ सुनाने के लिए फरमाईश पत्र लिखा था। लेकिन, आकाशवाणी ने इसे आचार संहिता का हवाला देते हुए सुनाने से इंकार कर दिया। इसी तरह भारतीय सिनेमा के पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना पर फिल्माया गाना ‘हाथी मेरे साथी’ और मिस्टर परफेक्शनिस्ट कहे जाने वाले आमिर खान की फिल्म ‘फना’ का गाना ‘तेरे हाथ में मेरा हाथ हो’ जैसे मशहूर गाने की फरमाईश की गई। लेकिन इस श्रोता की चाहत भी पूरी नहीं हो पाई, क्योंकि इन गानो में बसपा और कांग्रेस के चुनाव चिह्न का ज़िक्र हैं। वहीं, शनिवार रात को फिरोज खान पर केंद्रित फिल्मों के गीतों का प्रसारण हुआ। लेकिन, उनके सबसे लोकप्रिय गानो में से एक ‘तेरे चेहरे में वो जादू है’ नहीं सुनाया गया। क्योंकि गाने में हेमा मालिनी प्रमुख कलाकार थीं, जो फिलहाल बीजेपी की टिकट से मथुरा लोकसभा सीट से चुनावी रण में उतरी हुई हैं।

फोटो सोर्स- गूगल

इस पर आकाशवाणी में काम कर रहे हितांशु भूषण का कहना है कि-

आचार संहिता के चलते हम इसका पालन कर रहे हैं। प्रसार भारती से इस बारे में हमें दिशा-निर्देश मिले थे।”

फरमाईशी पत्र लिखने वाले श्रोता मनपसंद गाना न सुनाने को लेकर फोन करके भी पूछ रहे हैं। आचार संहिता समाप्त होने के बाद उनकी पसंद के सारे गाने सुनाए जाएंगे।  वैसे, आदर्श आचार संहिता का पालन करवाना चुनाव आयोग का काम है। अगर कोई भी पार्टी या कोई उम्मीदवार इसका पालन न करे, तो उसे सज़ा देने की ज़िम्मेदारी चुनाव आयोग की है। जिसमें वो खुद काफी कमज़ोर नज़र आता दिख रहा है। अब तो चुनाव आयोग की याददाश्त भी कमज़ोर हो गई हैं। इतनी कमज़ोर की सुप्रीम कोर्ट को उसे याद दिलाना पड़ रहा है कि उसके पास कौन-कौन सी ज़िम्मेदारियां और शक्तियां हैं। चुनाव आयोग को शायद उम्मीदवारों और पार्टियों के बड़े-बड़े होर्डिंग्स और टीवी चैनल्स नहीं दिख रहे हैं। तभी तो सड़कों से लेकर घरों के भीतर तक आदर्श आचार संहिता का कितना पालन हो रहा है, ये देखना और समझना कोई बड़ी बात नहीं है।

खैर, इन सब के बावजूद आदर्श आचार संहिता के तहत आकाशवाणी का यह कदम काबिल-ए-तारीफ़ है।

इन गानों और कलाकारों पर भी है रोक

इस सूची में 1982 में आई प्रेमरोग फिल्म का गाना ‘भंवरे ने खिलाया फूल, फूल को ले गया राजकुंअर’, 2004 में आई फ़िल्म वीर-ज़ारा का गाना ‘तेरे हाथ में मेरा हाथ हो’ और 1982 में आई फिल्म विधाता का गाना ‘हाथों की चंद लकीरों में’ जैसे गाने शामिल हैं। वहीं, भारतीय सिनेमा कलाकारों की बात करें तो अभिनेत्री से नेता बनी जया प्रदा, हेमा मालिनी, उर्मिला मातोंडकर, अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा, राज बब्बर, सनी देओल, मनोज तिवारी, गायक दलेर मेहंदी, हंसराज हंस जैसे दिग्गजों से जुड़े गानों को आकाशवाणी नहीं सुना रहा है।

ये ख़बर अशरफ अली ने लिखी है, अशरफ द कच्चा चिट्ठा में इंटर्न हैं।