देश में चुनावी माहौल है। जो कि दिन-ब-दिन हर चुनावी चरण के साथ गरमाता जा रहा है। लेकिन इस चुनावी माहौल के गरमाने का एक और कारण है। नेताओं के भाषण, उनके वादे और आए दिन मार्केट आते उनके अपडेटेड इंटरव्यू।

अपडेटेड इसलिए क्योंकि हर इंटरव्यू में वो नेता कुछ न कुछ नई बात और नया खुलासा करते रहते हैं। चाहे वो आम खाने के तरीके का खुलासा हो या प्रधानमंत्री बनने का ख़्वाब। लेकिन, फ़िलहाल जो अपडेटेड इंटरव्यू हमारे बीच आया है। उसमें वो नेता खुद पीएम बनने की बात न कहकर, किसी दूसरे नेता को पीएम बनाने की बात कह रहा है। इस नेता ने इतना बड़ा त्याग इसलिए किया क्योंकि इनको लगता हैं कि अभी ये कम अनुभवी हैं। इसलिए इन्हें फ़िलहाल उस राज्य का मुख्यमंत्री ही बनना है। वाह, नेता हो तो ऐसा। कितना संस्कारी है न?

पूरे अपडेटेड इंटरव्यू की बात

देश की चुनावी गर्मी छठे और सातवें चरण का चुनाव होते ही लगभग शांत हो जाएगी। लेकिन जब तक शांत नहीं हो रही, तब तक नेता भी शांत रहते तो बेहतर ही होता। अब नेता इस गर्मी में कैसे अपना योगदान देते हैं। इससे तो आप भली-भांति परिचित होंगे ही। रोज़ जगह-जगह पर मसालेदार भाषण देना। फिर रोड शो करना। मंदिर में आरती व दरगाह में मत्था टेकना। किसी और पार्टी या उम्मीदवार की कही बातों पर अपनी ज्वलनशील राय या बयान देना और काफी कुछ। जब इन सभी बातों के बाद जो चीज़ बच जाती हैं और जो एक नेता को बड़ा से और बड़ा बनती हैं, वो है इंटरव्यू देना। अब हर कोई तो गैर-राजनीतिक इंटरव्यू देने का दम-खम रखता नहीं हैं इसलिए बाकी नेता अपडेटेड इंटरव्यू देते हैं।

ऐसा ही एक अपडेटेड इंटरव्यू दिया गया हैं अंग्रेजी अखबार मुंबई मिरर को, अखिलेश यादव द्वारा। इस इंटरव्यू के दौरान जब अखिलेश से पूछा गया कि क्या यह गठबंधन आने वाले विधानसभा चुनाव में भी कायम रहेगा और अगर 23 मई को किसी भी पार्टी का बहुमत नहीं आता है तो, गठबंधन का क्या रोल रहेगा? इस पर अखिलेश यादव ने यह जवाब दिया:

“क्यों नहीं, क्या आप नहीं जानते मैं यूपी का सीएम बनना चाहता हूँ। मैं मायावती को पीएम बनने के लिए मदद दूंगा और वो मुझे यूपी का सीएम बनाने के लिए। यह काफी साफ समझौता और वादा है। मैं सिर्फ इतना कहूंगा कि अगला पीएम कौन होगा ये महागठबंधन ही तय करेगा”

अखिलेश को राजनीति का कैप्टन कूल कहा जाता है क्योंकि वो मुसकुराते हुए बड़े सहज तरीके से किसी भी सवाल का जवाब दे देते हैं। इसलिए जब उनसे, खुद को विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी का दावा करने वाली काँग्रेस से गठबंधन न करने पर सवाल दागा गया। तो उनका जवाब कुछ इस प्रकार था:

“हमने कांग्रेस के साथ साल 2017 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन किया था। इस बार भी मैं कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर काफी पॉजिटिव था। लेकिन कांग्रेस काफी अप्रत्याशित पार्टी है। गठबंधन को लेकर सब कुछ ठीक था, लेकिन राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जीत के बाद वो हमें भूल गए। बीजेपी की तरह कांग्रेस भी अपने विपक्षी दलों को नुकसान पहुंचाने में भरोसा करती है”

सम्पूर्ण विपक्ष जिस एक सबसे बड़े सवाल पर हमेशा मात खाता आया है कि अगर मोदी नहीं तो कौन? ऐसा नहीं है कि ये सवाल सिर्फ बीजेपी की तरफ से ही पूछा जाता जाता है बल्कि, ये सवाल विपक्ष के लिए भी एक नासूर सा बनता जा रहा था। क्योंकि जो लोग बीजेपी या मोदी को पसंद नहीं कर रहे, आखिर में उनका यही सवाल होता है कि मोदी नहीं तो कौन?

खैर, ऐसे लोगों का और विपक्ष का भी इंतज़ार ख़त्म हुआ। क्योंकि, अब उनके पास एक बहुते ताक़तवर माने हाथी माफ़िक उम्मीदवार आ गया है। जिसका एलान खुद अखिलेश यादव ने किया है।

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प्रतिकात्मक तस्वीर/ फोटो सोर्स: गूगल

आखिर में उन्होंने अपने गठबंधन को शायद स्वच्छ-भारत अभियान के तहत साफ-सुथरा बताते हुए कहा कि हमारा गठबंधन सिर्फ बीजेपी और पीएम मोदी के खिलाफ लड़ रहा है और उन्होंने दावा किया कि सिर्फ महागठबंधन ही बीजेपी से देश को बचा सकता है। ये सिर्फ एसपी-बीएसपी गठबंधन नहीं है, आरएलडी भी हमारे साथ है। खैर, यहाँ देश को बचाने की बात तो कह दी गई हैं। लेकिन, क्या किसी को पता है कि आखिर हमारे देश को खतरा किससे हो गया भला? पता चले तो जरूर बताना।

क्योंकि समझ नहीं आता, कभी मुसलमान को खतरा हो जाता है। तो, कभी हिंदुओं को खतरा हो जाता है और अब ये खतरा बढ़ते-बढ़ते हमारे देश तक पहुँच गया है। धन्य हो इन चुनावों का जो जितनी बार आते हैं, हमें खतरा महसूस करवाते हैं। लेकिन घबराइए मत ये चुनावी खतरा 23 मई को टल जाएगा। और फिर एक नए चुनाव और नए खतरे के लिए तैयार रहियेगा।

बाकी, फिलहाल पूरे विपक्ष को अखिलेश यादव का शुक्रिया अदा करना चाहिए। जो पिछले कई महीनों से विपक्ष की तरफ से पीएम उम्मीदवारी के इस सवाल पर बचते नजर आ रहे थे और नतीजों का इंतजार करने की बात कर रहे थे। आखिरकार उन्होंने खुलकर मायावती को पीएम बनाने की बात कह ही दी और सस्पेन्स ख़त्म हुआ।

आखिर में एक बात और कि अगर बबुआ ने बुआ को पीएम बनाने की ठान ली है तो, एक मशहूर कहावत के तहत हमारे मन में ये खयाल आ रहा है कि

‘अब राहुल गांधी का क्या होगा?’ 

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