एक ऐसा नेता जिसके भाषण और लेख को पढ़ने के लिए लोग अखबार का इंतजार करते थे। ऐसा नेता जो देश को सिर्फ आजाद नहीं कराना चाहता था बल्कि विकसित कराना चाहता था। जो अंग्रेजों से तो नफरत करता था लेकिन उनकी नीतियों की सराहना करता था। यही शख्स कांग्रेस पार्टी की टूटने का कारण और उसकी मृत्यु ही कांग्रेस को एक करने का कारण बनी। आज उसी शख्स की पुण्यतिथि है। जिसकी विचारों पर गांधीजी पूरे जीवन चले। गोपाल कृष्ण गोखले का जन्म 9 मई 1866 को बाॅम्बे में हुआ था और 19 फरवरी 1915 मुंबई में निधन हुआ था।

Image result for gopalkrishan gokhaleगोपाल कृष्ण गोखले गरीब परिवार से थे। लेकिन उनके पिता शिक्षा का महत्व जानते थे। गोपाल कृष्ण को अच्छी शिक्षा दिलवाई। गोपाल कृष्ण पढ़ने में तेज थे इसलिए जल्दी ही वे मैथ्स के प्रोफेसर बन गये। 22 साल की उम्र में 1989 में कांग्रेस ज्वाइन कर ली। गोपाल कृष्ण गोखले गोविंद रानाडे से प्रभावित थे। गांधीजी ने अपनी किताब में लिखा है- गोखले हर बात में रानाडे का जिक्र ले आते हैं।

ब्रिटिश नीतियों से प्रभावित

गोखले का अक्सर ब्रिटिशों को हिमायती कहा जाता था। वे चाहते थे कि ब्रिटिशों का व्यवहारिक पक्षा हम भारतीयों में भी आये। वे देश में स्वायत्ता लाने के पक्षधर थे। इसी विषय पर उनके धुर-विरोधी थे बाल गंगाधर तिलक। तिलक, गोखले के बचपन के मित्र थे। लेकिन गोखले के विचारों ने कांग्रेस को गरम दल और नरम दल में बांट दिया।

एक बार एक ब्रिटिश ने पूछा था- तुम्हें कैसा लगेगा कि अगर हम आज ही भाारत छोड़कर चले जायें। गोखले का जवाब था- मुझे बहुत खुशी होगी। लेकिन आप जब लंदन पहुंचेगे, हम आपको वापस बुला लेंगे। कांग्रेस आने के बाद गोखले के विचारों से कांग्रेस में उनका कद बढ़ गया था। 1903 में उन्होंने बजट भाषण में कहा था कि हमारा भारत गरीब, दरिद्रता और असंतोष का नहीं होगा। भावी भारत उद्योग, शिक्षित और संपन्न होगा। वे पश्चिमी शिक्षा को बढ़ावा देना चाहते थे। वे मानते थे विचारों की दासता पश्चिमी शिक्षा से ही जायेगी।

गोपाल कृष्ण गोखले ही वो व्यक्ति थे जिन्होंने अंग्रेजों के जमाने में हिंदू कोड बिल से वाॅक आउट कर दिया था। उसके बाद वे खासे चर्चा में आ गये, लोगों के पसंदीदा नेता बन गये। 1905 में वे कांग्रेस के अध्यक्ष बने। उनके अध्यक्ष के एक साल बाद 1906 में पार्टी का विभाजन हो गया, वजह थी गंगाधर तिलक से विवाद। गोखले अंग्रेजों को भारत से हटाने के पक्ष में नहीं थे,  बल्कि अपना बनाने के पक्ष में थे। जबकि गंगाधर तिलक का मानना था कि ये गोरे हमारे कभी हो ही नहीं सकते हैं।

Image result for gopalkrishan gokhaleहिंदू-मुस्लिम एकता 

गोखले महात्मा गांधी के राजनीतिक गुरू थे और मोहम्मद अली जिन्ना के भी। गोखले ही वे व्यक्ति हैं जिन्होंने गांधीजी को भारत भ्रमण की सलाह दी थी। उनका कहना था कि हिंदू बहुसंख्यक हैं। उनका कर्तव्य है कि वे मुस्लिम भाईयों के सहायक बनें। गोखले जिन्ना को हिंदू-मुस्लिम भाईचारे को सबसे बड़ा पैरोकार मानते थे।

ब्रिटश सरकार का गोखले ने हमेशा पक्ष ही लिया। लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया जब गोखले ने अपने भाषण में अंग्रेजों की बुराई की। 1905 में बंगाल विभाजन का फैसला लाॅर्ड कर्जन ने लिया था। कर्जन जब भारत से चला गया, उसके बाद गोखले ने अपने भाषण में खरी-खोटी सुनाई। 1905 के कांग्रेस के बनारस सम्मेलन में अध्यक्षीय भाषण में कहा था- ‘सात वर्षों तक रहे लार्ड कर्जन के शासन का अंत हुआ है। मैं इसकी तुलना औरंगजेब के शासन से करता हूं। हमें इन दोनों शासकों में अनेक समानताएं मिलती हैं। कोई भी ये नहीं कह पायेगा कि कर्जन ने भारत को मजबूत किया है। सौ वर्षों से भी अधिक समय तक भारत इंग्लैंड के लिए ऐसा देश बन गया है। जहां से पैसा इकठ्ठा कर खर्च किया जा रहा है। इस देश की अपार दौलत देश से बाहर ले जाई गयी है।’

19 फरवरी 1915 को गोखले का मुंबई में निधन हो गया। वे महज 48 साल के थे। लगातार सफर करते रहने और राजनीति में सक्रियता के चलते वे बीमार रहने लगे थे। उनकी मृत्यु के बाद दिग्गजों ने उनकी याद में मीठे किस्से और बातों को याद किया था। यहां तक कि धुर विरोधी तिलक ने भी उनके सम्मान में बातें कहीं थीं और कांग्रेस को फिर से एकजुट कर दिया था।

Image result for gopal krishna gokhale and gandhiबाल गंगाधर तिलक ने कहा था- ये भारत का रत्न सो रहा है। देशवासियों को जीवन में इनका अनुकरण करना चाहिए। वहीं गांधीजी ने अपने गुरु को याद करते हुए कहा था- गोखले क्रिस्टल की तरफ साफ थे। एक मेमने की तरह दयालु थे। एक शेर की तरह साहसी थे और इन राजनीतिक हालात में आदर्श पुरुष थे। आज के वक्त में गोखले को याद करना बहुत जरूरी है। वो ऐसे शख्स थे जो संसद में अच्छी बहस करते थे। वे राजनीति को अलग रखते थे और निजी जीवन को अलग रखते थे।

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