टीपू सुल्तान, एक बहादुर योद्धा था इसमें कोई शक नहीं है। उसने अंग्रेजों से बहादुरी से लड़ाई लड़ी। इसके साथ ये भी सच है कि उसने अपने आसपास के राज्यों को अधीन करना चाहा और यही टीपू सुल्तान के लिए हार की वजह बनी। जब अंग्रेजों ने उस पर हमला किया तो किसी ने उसका साथ नहीं दिया। टीपू सुल्तान का जन्म 20 नवंबर 1950 को हुआ था और 4 मई 1799 को अंग्रेजों से लड़ते हुये मौत हुई। टीपू सुल्तान के बारे में कुछ रोचक बातें जानिये।

Related imageरॉकेटमैन

कहते हैं टीपू सुल्तान दुनिया का पहला मिसाइलमैन है। लंदन के मशहूर साइंस म्यूजियम में टीपू के कुछ रॉकेट रखे हैं। ये उन रॉकेट में से थे जिन्हें अंग्रेज अपने साथ 18वीं सदी के अंत में ले गए थे। उनके इस रॉकेट की वजह से ही भविष्य में रॉकेट बनाने की नींव रखी थी। भारत के मिसाइल कार्यक्रम के जनक एपीजे अब्दुल कलाम ने अपनी किताब ‘विंग्स ऑफ फायर’ में लिखा है कि उन्होंने नासा के एक सेंटर में टीपू की सेना की रॉकेट वाली पेंटिग देखी थी।

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असल में टीपू और उनके पिता हैदर अली ने दक्षिण भारत में दबदबे की लड़ाई में अक्सर रॉकेट का इस्तेमाल किया। उन्होंने जिन रॉकेट का इस्तेमाल किया वो बेहद छोटे लेकिन मारक थे। ये रॉकेट करीब दो किलोमीटर तक मार कर सकते थे। माना जाता है कि पोल्लिलोर की लड़ाई में इन रॉकेट ने ही खेल बदलकर रख दिया था।

टीपू की हार

टीपू सुल्तान ने कालीकट पर हमला करवा दिया। हजारों लोग वहां से भाग-भागकर ट्रावनकोर चले गए। ये शहर 17वीं शताब्दी के प्रतापी राजा मार्तंड वर्मा ने बसाया था। मार्तंड ने अपनी सेना को एक फ्रांसीसी अफसर की मदद से बड़ी सही ट्रेनिंग दी थी। पर टीपू की सेना बहुत बड़ी थी और जमीनी लड़ाई में सेना की संख्या मायने रखती है।

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तब ट्रावनकोर के राजा ने ईस्ट इंडिया कंपनी से मदद मांगी। तब 1791 में अंग्रेजों ने निजाम, मराठा सबको मिलाकर मैसूर पर चढ़ाई कर दी और टीपू हार गया। उसका आधा राज्य ले लिया गया, उसके दो बेटों को अंग्रेजों ने अपने पास रख लिया क्योंकि टीपू पर उनको भरोसा नहीं था।

टीपू की तलवार

टीपू सुल्तान की तलवार पर रत्नजड़ित बाघ बना हुआ था। टीपू की मौत के बाद ये तलवार उसके शव के पास पड़ी मिली थी। टीपू सुल्तान की तलवार का वजन 7 किलो 400 ग्राम है। आज के समय में टीपू की तलवार की कीमत लगभग 21 करोड़ रुपए है।

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टीपू सुल्तान के 12 बच्चे थे जिसमें से सिर्फ दो बच्चों के बारे में पता चल पाया है। बाकी बच्चों के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है। टीपू के बेटे गुलाम मोहम्मद शाह के वंशज कोलकाता में रहते हैं। अली प्रिंस मूनीरुद्दीन के वंशज हैं जो कि टीपू सुल्तान के बेटों में से एक थे। टीपू सुल्तान के अन्य वंशज शाहिद आलम हैं।

सेहत के पक्के टीपू

सवेरे-सवेरे रोज टीपू के सितारों की गति देख भविष्य बताने वाले और डॉक्टर साहब हाजिरी देने आ जाते। सब अपने ज्ञान के हिसाब से टीपू और राज्य के बारे में बताते। टीपू के पापा को खून में इन्फैक्शन के चलते घाव हो गया था। टीपू अपनी सेहत को लेकर तब से ज्यादा फिक्रमंद रहने लगा था।

Image result for tipu sultanमैसूर राज्य में हुसड़ के बगिया थीं। खूब फल फूल सब्जियां होतीं। सब तरफ से राजा को डलिया पहुंचती। टीपू सबको देखते, जो अच्छे फल-सब्जियां होते। उसे अपनी रसोई के लिए भिजवा देते और बाकी मंडी में बेच दिए जाते।

टीपू के कार्य

टीपू को मैसूर का शेर कहा जाता है। उन्होंने सैंकड़ों निर्माण कार्य किए थे। जिसमें सड़कें बनवाना, सिंचाई के लिए व्यवस्था करना, जिसमें कृष्णराज सागर बांध को मजबूत बनाना, लाल बाग परियोजना को सफलतापूर्वक अंजाम देना और आधुनिक कैलेण्डर के अलावा नई भूमि राजस्व व्यवस्था को लागू करना इत्यादि प्रमुख कार्य थे।