बॉलीवुड के जाने माने कलाकार, नाटक, निर्देशन और लेखन में अधिकतर समय देने वाले गिरीश कर्नाड का सोमवार सुबह निधन हो गया। उनके निधन से पूरा बॉलीवुड सदमें में है। कर्नाड का जब निधन हुआ तो वह उस वक्त बेंगलुरु में थे। कर्नाड पीछले कई दिनों से बिमार चल रहे थे। उन्हें कई बार अस्पताल में भर्ती कराया गया। 19 मई 1938 को मुंबई के माथेराना में जन्मे गिरीश कर्नाड आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने स्कूल के समय से ही थियेटर में काम करना शुरु कर दिया था। गिरीश को सलमान खान की सुपरहिट फिल्म ‘एक था टाइगर’ और ‘टाइगर जिंदा है’ में भी देखा गया था।

गिरीश कर्नाड, फोटो सोर्स: गूगल
गिरीश कर्नाड, फोटो सोर्स: गूगल

एक पत्र ने बदल दिया करियर

गिरीश कर्नाड ने एक वाकये का अपने लेखन में ज़िक्र करते हुए लिखा था-

जब मै 17 साल का था तब मैने आइरिस लेखक ‘सीन ओ कैसी’ की स्केच बनाकर उन्हें भेजा था। तो उसके बदले में उन्होंने एक पत्र लिखकर जवाब दिया। उन्होंने पत्र में लिखा था कि यह सब करके आप अपना वक्त जाया ना करें। कुछ ऐसा करो जिससे लोग आपका ऑटोग्राफ ले। इस खत को पढ़ने के बाद जैसे मेरी जिंदगी यू टर्न ले चुकी थी और फिर वहीं से मैने अपना थियेटर शुरु किया।

फोटो सोर्स: गूगल
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करियर और उपलब्धियां

साल 1970 में कन्नड़ फिल्म संस्कार से बतौर स्क्रिप्ट राइटर अपने करियर की शुरुआत करने वाले गिरीश कर्नाड का लेखन के क्षेत्र में भी काफी महत्वपूर्ण योगदान था। गिरीश 1974-75 में FTII पुणे के डायरेक्टर के पद पर भी काम कर चुके थे। साथ ही उन्होंने संगीत नाटक अकादमी और नेशनल अकादमी ऑफ पर्फोर्मिंग आर्ट्स के चेयरमैन भी रह चुके थे। गिरीश कर्नाड ने कई सारे किताब और नाटक लिखे हैं, जो काफी फेमस भी हुआ। उनके द्वारा लिखी गई यायाती(1960), ऐतिहासिक तुगलक(1964) जैसे नाटकों को खूब सराहा गया। उनकी लिखी किताबों में हयवदन(1971), नगामंडला(1988) और तलेडेंगा(1990) ने पूरी दुनिया में वाहवाही लूटी थी।

फोटो सोर्स: गूगल
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कर्नाड को पद्मश्री और पद्म-भूषण से नवाजा जा चुका है। इसके अलावा 1972 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी, 1994 में साहित्य अकादमी पुरस्कार और 1998 में ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था। 4 फिल्म फेयर ऑवार्ड के अलावा उन्हें कन्नड़ फिल्म ‘संस्कार’ के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार भी मिल चुका है। गिरीश कर्नाड के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने ऐतिहासिक पात्रों को आज के संदर्भ में देखा और उसे समाज से रुबरु कराया। उनके लिखे कई नाटक इस बात के सबूत है।

पीएम ने जताया शोक

गिरीश कर्नाड का 81 वर्ष के उम्र में निधन होने पर पीएम मोदी ने भी गहरा शोक जताया है। पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा-

गिरीश कर्नाड को उनके बहुमुखी काम के लिए हमेशा याद रखा जाएगा। उनके काम आने वाले वर्षों में लोकप्रिय होते रहेंगे। उनके निधन से दुखी हूं। उनकी आत्मा को शांति मिले।

गिरीश कर्नाड के निधन पर केवल पीएम ही नहीं बल्कि पूरा बॉलीवुड सदमें में हैं। गिरीश कर्नाड की हिंदी के अलावा कन्नड़ और उर्दू में भी अच्छी पकड़ थी। कर्नाटक सरकार ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए तीन दिन का शोक और एक दिन की छुट्टी का ऐलान किया है।

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