मोदी जी अक्सर झटके देने के लिए जाने जाते हैं. कभी अपने विरोधियों को तो कभी अनुशासन के नाम पर अपने ही मंत्रियों को. पर इस बार झटका खुद मोदी जी को लग गया है. इलाहबाद हाईकोर्ट ने बीएसएफ से निकाले गए जवान तेज बहादुर यादव के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नोटिस जारी किया है.

क्या है मामला?

2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान तेज बहादुर यादव का नामांकन चुनाव आयोग ने रद्द कर दिया था. तेज बहादुर यादव समाजवादी पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बनारस लोकसभा सीट से महागठबंधन के उम्मीदवार थे. नामांकन रद्द होने के बाद उनका कहना था कि,

‘मेरा नामांकन गलत तरीके से रद्द किया गया है. इस मामले में मैंने सबूत भी दिए हैं. इसके बावजूद मेरा नामांकन रद्द कर दिया गया. हम इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे.’

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने तेज बहादुर की याचिका खारिज कर दी थी.

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इलाहाबाद हाईकोर्ट, फोटो सोर्स: गूगल

इसके बाद जुलाई महीने में तेज बहादुर यादव ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की. इस याचिका में कहा गया था कि,

वाराणसी के डीएम व रिटर्निंग अफसर ने पीएम मोदी के दबाव में मनमाने तरीके से उनका नामांकन पत्र खारिज किया था. पर्चा खारिज होने की वजह से वह चुनाव नहीं लड़ सके. तेज बहादुर का दावा था कि अगर वह चुनाव मैदान में होते तो फैसला बदल जाता. ऐसे में बनारस लोकसभा सीट पर निष्पक्ष चुनाव नहीं हुआ, इसलिए पीएम मोदी के निर्वाचन को रद्द कर बनारस सीट पर नये सिरे से चुनाव कराया जाना चाहिए.

इसी याचिका के तहत प्रधानमंत्री मोदी को इलाहबाद हाई कोर्ट की तरफ़ से नोटिस जारी किया गया है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर, तेज बहादुर यादव लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान, फोटो सोर्स: गूगल

नामांकन पत्रों की जांच के बाद तेज बहादुर यादव द्वारा दो नामांकन पत्रों में बीएसएफ से निकाले जाने की दो अलग-अलग जानकारियां सामने आयीं थी. इसके बाद उन्हें 24 घंटे के अंदर बीएसएफ से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेकर जवाब दने को कहा था. जिससे यह साफ हो सके कि उन्हें किस वजह से नौकरी से निकाला गया था.

कौन है तेज बहादुर यादव?

साल 2017 में तेज बहादुर यादव तब सुर्खियों में आ गए थे. जब सेना में खाने की क्वालिटी खराब होने को लेकर उनका वीडियो वायरल हुआ था. इस वीडियो में तेज बादुर फ़ौजियों को मिलने वाले खाने की शिकायत कर रहे थे. उन्होंने बताया था कि, किस तरह का खाना फौजियों को दिया जाता है. उनका कहना था कि अफसरों से शिकायत करने पर भी कोई सुनने वाला नहीं है. यहां तक कि गृहमंत्रालय को चिट्ठी भी लिखी लेकिन इसका भी कोई फायदा नहीं हुआ.

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तेज बहादुर यादव, फोटो सोर्स: गूगल

हालांकि, वीडियो वायरल होने के बाद इसको लेकर खूब हंगामा हुआ. सेना से लेकर राजनीतिक हलके में इस मसले को ज़ोरो से उठाया गया. सरकार की मंशा को लेकर सवाल पूछे गए. कहा जाने लगा कि, सेना और देश की सुरक्षा को लेकर सरकार केवल राजनीति कर रही है. पर ये मामला भी बाकी सारे मामलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. वहीं इस वीडियो के चलते तेज बहादुर यादव को जांच के बाद बीएसएफ से निकाल दिया गया था.

इसी के बाद वो बतौर निर्दलीय उम्मीदवार 2019 के लोकसभा चुनाव में बनारस से प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे थे. उसी दौरान समाजवादी पार्टी ने उन्हें अपनी पार्टी में शामिल कर लिया था. हालांकि, नामांकन रद्द होने की वजह से वह चुनाव नहीं लड़ पाए थे.

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