बात है गुजरात के अरवल्ली जिले की। जहां एक दलित की बारात को जाने से रोक दिया गया। इतना ही नहीं इस दूल्हे के घरवालों ने आरोप लगाया कि बारात को रोकने के लिए सड़क को ही जाम कर दिया गया। अरवल्ली जिले के खंभिसर गाँव के पाटीदार समुदाय के कुछ सदस्यों ने बारात को रोकने के लिए बीच सड़क पर ही यज्ञ और भजन करने का आयोजन कर दिया।

ऐसा नहीं है कि सिर्फ ऐसा एक ही मामला है। गुजरात के सबरकांठा जिले से एक और घटना सामने आई जहां एक दलित दूल्हे की बारात को पुलिस सुरक्षा प्रदान करनी पड़ी। जब ठाकुर समुदाय के कुछ लोगों ने दूल्हे द्वारा स्थानीय मंदिर में पूजा के लिए जाने पर आपत्ति जताई। हालांकि पुलिस के सही समय पर आ जाने की वजह से बारात आराम से निकल गयी।

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल।

पुलिस ने मीडिया को बताया कि अनिल राठौड़ के परिवार ने उस वक़्त सुरक्षा की मांग की जब सितवड़ा गाँव के ठाकुर समुदाय के सदस्यों ने शनिवार के दिन बारात को गांव से निकालने और दूल्हे के मंदिर जाने से आपत्ति जताई।
इस पर पुलिस उपाधीक्षक मीनाक्षी पटेल ने मीडिया से बातचीत में बताया:

“अनिला राठौड़ ने पुलिस को अर्ज़ी देकर बारात जाने के लिए पुलिस की सुरक्षा की मांग करी थी। उन्होंने अपनी उस अर्ज़ी में कहा कि गाँव के दलित समुदाय ने इस बात की आशंका जताई है कि अन्य समुदाय के लोग कोई परेशानी पैदा कर सकते हैं।”

डीएसपी ने कहा:

“हमने बारात को पुलिस सुरक्षा दी और बारात शांतिपूर्वक गुज़र गयी। शादी समारोह में पहुंचने के पहले दूल्हा गाँव के मंदिर में पूजा करने के लिए भी गया।”

शुक्रवार को एक और मामला सामने आया था जिसमें ठाकुर समुदाय के लोगों ने अन्य बारात पर भी आपत्ति जताई थी क्योंकि वहाँ पर भी दलित समाज का दूल्हा घोड़ी पर सवार होकर बारात में जा रहा था।

अब दलित दूल्हा शादी करने भी पैदल जाएगा ?

अभी कुछ ही समय पहले 26 अप्रैल को उत्तराखंड से एक ऐसी ही घटना सामने आई थी जहां ऊंची जाति के लोगों ने जितेंद्र नाम के एक दलित युवक को इतना पीटा कि उसकी जान चली गयी। जितेंद्र एक शादी में गया था जहां वो खाना खाने के लिए ऊंची जाति वाले लोगों के साथ कुर्सी पर बैठ गया था, जिस पर ऊंची जाति के लोग इतना भड़क गए कि उन्होंने जितेंद्र को पीट-पीट कर मार डाला।

इस तरह की घटनाएँ बता रही हैं कि हमारे समाज का मानसिक विकास कितना पीछे चल रहा है। छोटी-छोटी बातों पर लोगों की भावनाएं आहत हो जाती हैं। आदमी अपने काम से कम और जाति से ज्यादा जाना जाता है। ये सारी घटनायें कहीं न कहीं समाज के मानसिक विकृति को दिखाता है जिसमें सुधार करने की सख्त जरूरत है।

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