दुई चार दिन पहले ही एनिमल हसबेंडरी के मिनिस्टर गिरिराज सिंह ने गाय की फैक्टरी लगाने की बात की थी पर उन्हीं के गृहराज्य में गाय को ज़िंदा दफनाया जा रहा है. सॉरी-सॉरी ‘गाय’ नहीं ‘नीलगाय’. वो ट्रेंडिंग में गाय चलती रहती है इसलिए गलती से हमारे मुँह से निकल गया. जितने लोग इस खबर को पढ़ रहे हैं और गाय के नाम पर डंडा और भाला लेकर निकल गए थे वह आराम से घर बैठे बेरोज़गारी काट सकते हैं क्योंकि गाय नहीं नीलगाय को ज़िंदा दफनाया गया है और उसे न ही हम माँ मानते हैं और न ही बाप. अब खबर जान लीजिए।

बिहार के वैशाली ज़िले में शूटरों को भाड़े में लाया गया था उन्हें सुपारी दी गयी थी नीलगायों को मारने की. अधिकतर नीलगाय जिसे उन्होंने मारा वो मौके पर ही मर गयी. फॉरेस्ट डिपार्टमेंट वालों ने क्लेम किया है कि 4 दिनों के अंदर 300 नीलगायों को मारा गया है. सभी नीलगायें तो मर गईं पर एक ज़ख़्मी बची हुई थी तो उन्होंने जेसीबी की मदद से ज़िंदा ही ज़मीन में खुदाई करके दफना दिया। वीडियो देखने के लिए नीचे वाले लिंक पर आप क्लिक कर सकते हैं

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वैशाली के एमएलए राजकिशोर सिंह और स्टेट गवर्नमेंट की साथ-गाँठ में नीलगायों को मारने का फैसला लिया गया था क्योंकि गाँव वालों की शिकायत थी कि नीलगाय उनकी फसल खराब कर देती हैं. नीलगायों को उस जगह से हटाया भी जा सकता था लेकिन हो सकता है कुछ मजबूरियां रही होंगी नेताओं की. तो इस घटना से ये सीख मिलती है कि अगर हाथ में घाव हो जाय तो उसका इलाज़ न कराओ बस हाथ काटकर हटा दो प्रॉब्लम सॉल्व हो जायगी। इन्ही सब कारणों की वजह से हमनें पहले भी कहा था और अब भी कह रहे हैं कि नेताओं का पढ़ा-लिखा होना ज़रूरी है. अब यहीं देखिये अगर राजकिशोर जी पढ़ाई किये होते, मतलब डिग्री सिर्फ दिखाने के लिए नहीं समझदारी बढ़ाने के लिए होती तो आज शायद 300 नीलगायें ज़िंदा रहती।

राजकिशोर सिंह / फोटो सोर्स गूगल
राजकिशोर सिंह / फोटो सोर्स गूगल

नेता जी के समझदार न होने का एक और उदाहरण यह भी है कि जब ये वीडियो सोशल मीडिया पर फैलने लगा तब बिना किसी के कुछ सवाल किये ये नेता जी ये प्रूव करने लगे कि वीडियो बनावटी है जिसे अंग्रेजी में डॉक्टर वीडियो भी कहा जाता है. अब नेता जी से किसी ने पूछा तो था नहीं पर समझ गए कि कोई न कोई ज़रूर घेरेगा तो पहले से ही पल्ला झाड़ने का रिहर्सल करने लगे.

इस वीडियो के बाहर आते ही वैशाली के एसपी मानवजीत सिंह ने लोकल पुलिस को जांच करने का आदेश दिया है. उधर गायों की फैक्ट्री बनाने में व्यस्त गिरिराज सिंह जी को बताना ज़रूरी है कि सभी जानवर एनिमल हसबेंडरी के अंदर आते हैं सिर्फ गाय नहीं। हमें ऐसा लगता है कि गायों के साथ भी रंग के आधार पर भेदभाव होने लगा है. तभी तो नीली वाली गाय माता की कोई खोज-खबर ही नहीं रखता। इस तरह का भेदभाव हमें खात्म करना ज़रूररी है वरना गाय का तो संरक्षण हो ही जाएगा लेकिन उसके अलावा और कोई भी जानवर बचेंगे नहीं।