14 फरवरी के पुलवामा हमले के बाद देश का माहौल बदल गया है। देश के लोग गुस्से में भी और शोक में भी। सोशल मीडिया से लेकर हर जगह सबकी प्रतिक्रिया आ रही हैं। कोई पाकिस्तान को नेस्तानाबूद करने की बात कह रहा है तो कोई जनभावना को शांत करने की बात कह रहा है।

वहीं सेना और पुलिस अपना काम कर रही है। 18 फरवरी को सेना को दक्षिण कश्मीर में आतंकवादी गाजी राशिद के छिपे होने की सूचना मिली। जिसके बाद सर्च ऑपरेशन के दौरान हुई मुठभेड़ में दोनों तरफ से गोलीबारी हुई। जिसमें जैश-ए-मोहम्मद कमांडर राशिद मारा गया। सेना के चार जवान भी इस मुठभेड़ में शहीद हुये। लेकिन इसके बाद जो हुआ वो शायद न होता तो सुकून की बात होती।

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स – गूगल

आतंकवादी राशिद के मरने के बाद कश्मीर के नौजवान सड़कों पर उतर आये। कश्मीर के वे लड़के शोर कर रहे थे और विरोध जता रहे थे। उनके सामने सेना थी लेकिन फिर भी वे खड़े थे। जैसे कि उनको पता था कि सेना हमको नहीं मारेगी, वो सही थे। सेना की गाड़ियां रूक गईं। तभी उनमें से एक जवान ने उन नौजवानों को समझाते हुये अपील की।

लाउस्पीकर पर जवान ने कहा-

“मैं पुलवामा पुलिस की तरफ से (नौजवान शोर करने लगते हैं) आप सब से गुजारिश करता हूं कि आपकी जान हमारे लिए निहायती कीमती है। (शोर अब भी जारी है, पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे सुनाई दे रहे हैं।) आप नौजवान हैं, आगे आपकी ज़िंदगी है। आप मेहरबानी करके वापस चले जाइये। आगे सर्च ऑपरेशन जारी है, आप अपनी जान के खातिर वापस चले जाइये। (नौजवान अब भी शोर कर रहे हैं।) मैं आपका बड़ा भाई होने के नाते आपको संदेश देता हूं, खबरदार करता हूं। आप जज्बात से मत काम लीजिये, आप वापस चले जाइये। (नौजवान शोर कर रहे हैं और सीटी बजा रहे हैं।) घर पर आपके वालिद और भाई आपका इंतजार कर रहे हैं, आप वापस चले जाईये। मेहरबानी करके वापस चले जाइये आपकी जान बहुत कीमती है।”

आतंकी राशिद के मरने के बाद कश्मीरी नौजवानों का विरोध हमारे लिये बहुत खराब है। एक आतंकी के मरने पर ये कश्मीरी नौजवान सड़कों पर उतर रहे हैं। पुलवामा पुलिस उन्हें वापिस जाने की सलाह देती है लेकिन वे सीटी बजाकर, पाकिस्तान ज़िंदाबाद कहकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। ये सब दो बातें बता रहे हैं, पहली कि सेना और पुलिस इन लोगों को नहीं मारना चाहती और इसी का ये फायदा उठाते हैं। दूसरा ये कि विरोध हमारे लिये चिंता की बात है। हम जिनकी सुरक्षा कर रहे हैं वो ही हमारा विरोध कर रहे हैं। ये ही लड़के फिदायनी बन रहे हैं और पुलवामा जैसे हमले को अंजाम दे रहे हैं।

इसके बाद भी कश्मीर हमारा है और वो नौजवान भी। हमें कैसे भी करके उस कश्मीर को बदलना है और इन लोगों को भी। हमें ऐसी ही अपील चाहिए जैसी वो पुलिस वाला कर रहा था। क्योंकि हिंसा से कश्मीर और कश्मीर के लोग हमसे दूर हो जायेंगे।

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