घटिया क्वालिटी के गोला बारूद और युद्ध उपकरणों की सप्लाई किए जाने के चलते बढ़ते हुये हादसों की संख्या पर भारतीय सेना ने चिंता जताई है. सेना को ये गोला बारूद, टैंक, आर्टिर्ली गन व सभी सैन्य उपकरण की सप्लाई सरकारी ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड (OFB) की तरफ से की जाती हैं. इस संबंध में सेना ने रक्षा मंत्रालय से बात की है. सेना की ओर से बताया गया कि घटिया किस्म के गोला-बारूद की वज़ह से होने वाले हादसों में बड़ी संख्या में सैनिक घायल हो रहे हैं. साथ ही कई सैनिकों की जानें भी जा रही हैं. वहीं दूसरी तरफ सैन्य उपकरणों को नुकसान पहुँच रहा हैं. सेना ने आशंका जताई है कि इन घटनाओं की वज़ह से सरकारी ऑर्डिनेंस फैक्टरी द्वारा बनाए गए सैन्य उपकरणों पर से सेना का भरोसा उठ सकता है.

फोटो साभार – गूगल

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक खबर में रक्षा मंत्रालय के सूत्रों का हवाला देते हुये लिखा है कि- सेना ने इस गंभीर मुद्दे को लेकर डिफेंस प्रॉडक्शन सेक्रेटरी अजय कुमार के सामने चिंता जाहिर की हैं. जिसमे कहा गया है पिछले कुछ सालों से खराब किस्म के गोला-बारूद इस्तेमाल करने की वजह से सेना के प्रमुख सैन्य उपकरणों और हथियारों को भारी नुकसान पहुँच रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, अजय कुमार ने सैन्य उपकरणों को लेकर आने वाली समस्याओं पर विस्तार से लिखित रिपोर्ट देने को कहा है.

फोटो सोर्स – गूगल

सालाना 19 हजार करोड़ रुपये का टर्नओवर करने वाली सरकारी ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड (OFB) के अंतर्गत देश भर में स्तिथ 42 फैक्ट्रियाँ आती है. ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड (OFB) 12 लाख जवानों वाली भारतीय सेना को युद्ध सामग्री मुहैया कराने का एक मात्र प्रमुख स्रोत है. जानकारी के मुताबिक सेना का मानना है कि, ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड के गोला-बारूद की क्वॉलिटी में होने वाली गिरावट से सेना की युद्ध लड़ने की क्षमताओं पर गहरा असर पड़ रहा है.

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सेना ने अपनी रिपोर्ट मे क्या कहा?

15 पन्नों की इस रिपोर्ट में सेना ने बेहद गंभीर समस्याएं सामने रखी हैं. जिसमें बताया गया है कि 105एमएम की इंडियन फील्ड गन, 105 एमएम लाइट फील्ड गन, 130 एमएम एमए1 मीडियम गन, 40 एमएम एल-70 एयर डिफेंस गन से सबसे ज्यादा हादसे हो रहे हैं. वहीं टी-72, टी-90 और अर्जुन टैंक जैसे युद्धक टैंकों की तोपों में ख़राबी आने की वजह से लगातार दुर्घटनाएं हो आ रही हैं. इसके अलावा खराब किस्म के गोला-बारूद के कुछ केस 155 एमएम की बोफोर्स तोपों के मामले में भी सामने आए हैं.

सेना से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड इस समस्या को सुलझाने के प्रति गंभीर नज़र नहीं आ रही है जिस वजह से सेना ने अपने कुछ लॉन्ग रेंज के गोला-बारूद की फायरिंग प्रैक्टिस पर फिलहाल रोक लगा दी है. इन सब के अलावा सेना ने उन घटना घटनाओं का ज़िक्र भी किया हैं जिन जिनमें जवान खराब गोला बारूद के चलते घायल हुये हैं.

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इस मुद्दे पर सेना को युद्द उपकरणो की सफ्लाई करने वाली ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड(OFB) का क्या कहना हैं?

इस मामले पर OFB ने अपनी तरफ से सफाई पेश करते हुये कहा- सेना को सप्लाई किए जाने वाले सैन्य उपकरणों और गोला बारूद पहले क्वालिटी कंट्रोल डिपार्टमेन्ट डायरेक्टरेट जनरल ऑफ क्वालिटी एन्स्योरेंस (DGQA) द्वारा जांच टेस्ट किए जाते है उसके बाद ही वो गोला बारूद सेना को सप्लाई किया जाता है. हमारी ज़िम्मेदारी सिर्फ गोला बारूद बनाने से लेकर सेना को हैंडओवर करने तक की होती हैं. अब सेना उन गोला बारूद और सैन्य उपकरणों को कहाँ रखती है, कैसे रख रखाव करती है? इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं होती हैं.

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