राजनीतिक फायदे के लिए सेना के इस्तेमाल के खिलाफ़ पूर्व सेना अधिकारियों द्वारा राष्ट्रपति को पत्र लिखे जाने का मामला अब विवादों में फंसता दिख रहा है। राष्ट्रपति को लिखे गए पत्र में जिस पूर्व सेना अधिकारी का नाम था, उन्होंने इस तरह के पत्र लिखे जाने की बात को ख़ारिज किया है।

पिछले दिनों राष्ट्रपति को लिखा गया पत्र सोशल मीडिया के अलग-अलग माध्यमों पर वायरल हो रहा था। वायरल हो रही चिट्ठी में पूर्व सेना चीफ एस.एफ. रॉड्रिग्स का नाम पहले नंबर पर था। सेना के पूर्व अधिकारी एस.एफ. रॉड्रिग्स ने कहा कि ऐसी किसी भी चिट्ठी के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। इसके अलावा दूसरे सेना अधिकारी व पूर्व एयर चीफ मार्शल एनसी सूरी ने भी ऐसी किसी चिट्ठी के बारे में जानकारी होने से इंकार कर दिया।

इस मामले में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि ‘कुछ लोगों द्वारा यह पत्र गलत तरह से फैलाया जा रहा है। इस पत्र में जिन दो बड़े अधिकारियों के नाम लिखे हैं, उन्होेंने इस तरह के किसी भी पत्र के बारे में जानकारी होने से इंकार किया है। यही नहीं राष्ट्रपति ऑफिस ने भी इस तरह के किसी पत्र मिलने की बात को अफवाह बताया है। ऐसे में जो पत्र वायरल हो रहा है वह देश की सरकार को बदनाम करने की साजिश है।’

दरअसल, पिछले कुछ दिनों से मीडिया द्वारा यह खबर सामने आई थी कि 3 सेना प्रमुखों समेत देश के 156 पूर्व सेना के अधिकारी ने राष्ट्रपति को भाजपा व मोदी सरकार के खिलाफ़ पत्र लिखा है। इस पत्र में राजनीतिक फायदे के लिए सेना के नाम इस्तेमाल किये जाने का विरोध किया गया था। जिसके बाद सेना के पूर्व अधिकारी ने इस चिट्ठी के बारे में जानकारी होने से इंकार करते हुए राष्ट्रपति को लिखे पत्र में अपना नाम शामिल किए जाने को लेकर खेद जताया है।

यही नहीं राष्ट्रपति के सूत्रों ने भी मीडिया को ऐसी किसी भी पत्र के बारे में जानकारी होने से इंकार कर दिया।

इस मामले में सेना के पूर्व आर्मी चीफ रॉड्रिग्स ने कहा, “मैं नहीं जानता कि यह सब क्या है। मैं अपनी पूरी जिंदगी राजनीति से दूर रहा हूं। 42 साल तक अधिकारी के तौर पर काम करने के बाद अब ऐसा हो भी नहीं सकता। मैंने हमेशा भारत को प्रथम रखा है। मैं नहीं जानता कि यह कौन फैला रहा है। यह फेक न्यूज का क्लासिक उदाहरण है।”

इस मामले में दूसरे सेना के अधिकारी एनसी सूरी ने कहा, “यह एडमिरल रामदास की ओर से लिखा लेटर नहीं है। इसे किसी मेजर चौधरी ने लिखा है। उन्होंने इसे लिखा है और यह वॉट्सऐप और ईमेल किया जा रहा है। ऐसे किसी भी खत के लिए मेरी सहमति नहीं ली गई थी। इस चिट्ठी में जो कुछ भी लिखा है, मैं उससे सहमत नहीं हूं। हमारी राय को गलत ढंग से पेश किया गया है।”

जानकारी के लिए आपको बता दें कि पिछले महीने चुनाव आयोग की अहम बैठक हुई थी। जिसमें चुनाव के दौरान नियमों को कड़े तरीके से लागू करने पर चर्चा हुई। इसमें इस बात पर भी चर्चा हुई कि राजनैतिक दल अपने फायदे के लिए प्रचार सामाग्रियों में सेना और जवानों की तस्वीर लगाते हैं। लिहाजा अब आयोग ने इस पर प्रतिबंध लगाया है। आयोग का कहना था कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद चुनावी फायदे के लिए सैन्य बलों की तस्वीरों और नाम का इस्तेमाल न किया जाए।

भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा सेना का लगाया गया पोस्ट, फोटो सोर्स- गूगल

यह पहली बार नहीं हुआ था जब चुनाव आयोग को सेना के राजनीतिकरण करने पर इस तरह मजबूत फैसला लेना पड़ा है। इससे पहले भी चुनाव आयोग ने 4 दिसंबर 2013 को एक आदेश जारी किया था कि राजनीति के लिए सेना के नाम का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। लेकिन राजनैतिक दल अक्सर अपने फायदे के लिए सेना का इस्तेमाल करते रहते हैं। आयोग ने राजनैतिक दलों को सलाह दी है कि सेना और उससे सेना से जुड़ी किसी वस्तु का इस्तेमाल न करें तो बेहतर है।

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