राजनीति से नैतिकता का समापन, एक युग का अंत। 

यह सब कुछ किसी बुरे सपने जैसा था। दिवास्वप्न की तरह। सुबह से कुछ लोग कश्मीर के भूत को मिटाकर एक नया वर्तमान और उसके लिए अपने हिसाब से उसका भविष्य तय कर रहे थे। यह तय करना हीं भयावह था। यह दृश्य अपने आप में एक सवाल था। कश्मीर से धारा 370 को हटाए जाने का पूरा मामला ही अनैतिकता और राजनीति से नीति के अलग होने की कहानी है।

यह किसी अपराध की तरह है। भारतीय जनता पार्टी ने जो किया वह कहीं से इंसानियत या उसके आसपास भी नहीं भटकता। आज हमारे देश में जो हालात हैं। वो डर पैदा करता है। वो आपको एक अंधेरी जगह छोड़ जाता है। कश्मीर राज्य को बंदूक के नोक पर अपने हिस्से किया गया।

धारा 370 क्या है? इस सवाल के जवाब से अनभिज्ञ भी कल मुझे इस पर खूब चर्चा करते दिखें। यह खतरनाक है। यह इस देश को गर्त में लेकर जा सकता है। धारा 370, 35 A पर चर्चा करना अब कोई बड़ी बात नहीं। इसे हटाए जाने से किसी को दुख नहीं। यह सभी बातें ठीक हैं पर, दिक्कत वहाँ होती है जब यह सबकुछ हम खुद हीं तय कर लेते हैं। किसी बिहारी, मराठी या बंगाली के भविष्य का फैसला यदि कोई कश्मीरी ले तो यह नैतिकता के आधार पर कहाँ तक सही है?

फोटो: द कच्चा चिट्ठा / पूजा मार्कुना

इस पूरे घटनाक्रम में कश्मीर था, धारा 370 थी, आप थे, हम थे, बस जो मौजूद नहीं था वो थे कश्मीरी। उनके भविष्य को तय करने वाले नैतिक आधार पर हम कोई नहीं होते हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब संसद में यह सबकुछ हो रहा था तो किसी कश्मीरी से इसपर कोई राय नहीं लिया गया। आप मेरे भविष्य का फैसला नहीं कर सकते। न मैं आपके।

भारतीय जनता पार्टी के इस फैसले से स्टालिन के सोवियत और चीनी कम्युनिस्ट संरचना की बू आती है। यह कुछ वैसा हीं है। भौगोलिक तौर पर खुद को फैलाने के लिए कम्युनिस्ट राष्ट्र हमेशा से जाने जाते रहे हैं। राष्ट्र का अर्थ क्या है? यह कब से जमीन का बस एक टुकड़ा भर रह गया है? बीते पाँच अगस्त को जो हुआ उसने कश्मीर से एक धारा तो खत्म कर दी पर, उसे मुख्यधारा से अलग कर दिया यह भी सच है।

पूरा देश इस जश्न में डूबा हुआ है कि धारा 370 खत्म हो गया है लेकिन, धारा 370 के खत्म हो जाने भर से क्या सबकुछ बदल जाएगा? यह सवाल उन जश्न मनाने वालों से पूछा जाना चाहिए और उनके जवाब को तब-तक सुना जाना चाहिए जब-तक वो उस जवाब में कश्मीरियों को न ले आएँ। भारतीय जनता पार्टी ने अपने बहुमत से जो किया उसे कहीं से भी न्यायसंगत नहीं माना जा सकता है। अपने भाषण में अमित शाह ने कहा कि 1947 भी ऐतिहासिक था और आज जो मैं कर रहा वह भी ऐतिहासिक है। भारतीय राजपत्र में प्रकाशित होते हीं देश ने अपने पुराने इतिहास को मिटा दिया। अब एक नया इतिहास लिखा जाएगा। धारा 370 एक प्रतीक रही है इस बात की कि राष्ट्र वास्तव में एक प्रक्रिया है, वह एक विकसित होता हुआ रिश्ता है, कोशिश है, एक-दूसरे का यकीन हासिल करने की। वह एक सफ़र है, वह धमकी नहीं है, वह गुंडई नहीं है।

सत्ता के नशे में चूर लोग अपनी सारी हदें पार कर रहे हैं, उनके हिसाब से यही एक तरीका था। लेकिन उन्हें समझना चाहिए कि यह तरीका नहीं था, एक नशा था। जीतने के लिए किसी भी हद तक जाने का नशा। यह सरेआम गुंडई थी। जिसे अंजाम दिया गया। कश्मीर जीता नहीं गया है, उसे तोड़ा गया है। उसे अपाहिज कर दिया गया है।

इसे वीडियो से समझें :

भारतीय जनता पार्टी के इस फैसले से स्टालिन सोवियत और चीनी कम्युनिस्ट संरचना की बू आती है.

भारतीय जनता पार्टी के इस फैसले से स्टालिन सोवियत और चीनी कम्युनिस्ट संरचना की बू आती है.

Posted by The Kachcha Chittha on Tuesday, August 6, 2019