प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जाति को लेकर जिस तरह से बीते कुछ दिनों से सवाल उठाए जा रहे हैं उस पर आखिरकार अरुण जेटली ने चुप्पी तोड़ दी है। अरुण जेटली ने दावा किया है कि बीते कुछ दिनों में जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जाति को लेकर बहस शुरु हुआ है वह काफी घटिया है। क्योंकि प्रधानमंत्री ने आज तक जब भी वोट के लिए अपील की है तब केवल विकास के नाम पर ही वोट मांगे हैं। लेकिन विपक्षी पार्टियों में उनकी जाति का हवाला देकर वोट मांगने की जो प्रचलन चली है वह काफी गलत है।

फोटो सोर्स: गूगल

अरुण जेटली का यह दावा कितना सच है। इस बात की हमने जब पड़ताल की तो कुछ दिलचस्प बातें निकलकर सामने आए जो यह बताते हैं कि अरुण जेटली का यह दावा गलत है। 2014 में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद जिस तरह से पीएम मोदी जाति कार्ड को भुनाते रहे वह किसी से छिपा नहीं है। अब इस चुनाव प्रचार को ही ले लीजिए पिछले पंद्रह दिनों में प्रधानमंत्री मोदी ने चार बार अपनी जाति का ज़िक्र किया है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि मोदी हिन्दीभाषी प्रदेशों में ही जाति का ज़िक्र करते हुए देखे गए हैं क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी को भी पता है कि इन प्रदेशों में जातिय समीकरण पर चुनाव जीतने का प्रचलन बहुत पुराने समय से ही चला आ रहा है।

अब एक नजर डाल लेते हैं कि आखिर प्रधानमंत्री मोदी कहां-कहां अपनी भाषण में अपनी जाति का नाम लेते हुए नजर आए हैं। उन जगहों पर अरुण जेटली का दावा साफ-साफ गलत साबित होता दिख रहा है।

27 अप्रैल 2019: अगर आपको कन्नौज की रैली याद हो तो वहां उन्होंने मायावती के बयान पर कहा था कि मायावती जी कृपया मुझे जातिवाद की राजनीति में ना घसीटें, मैं हाथ जौड़कर आपसे विनती करता हूँ। पीएम मोदी ने कहा कि मेरे जाति के बारे में तबतक कोई नहीं जाना था जबतक मेरे विरोधियों ने मेरे बारे में नहीं बताया। मै मायावती जी, अखिलेश जी और कांग्रेस के लोगों का शुक्रगुजार हूं कि वेलोग मेरे जाति के बारे में सवाल उठा रहे हैं। यह 130 करोड़ लोग मेरे परिवार है। मुझे एक पिछड़ी जाति में जन्म लेने के बाद देश की सेवा करने का अवसर मिला है। पीएम मोदी का यह बयान मयावती के उस बयान का जवाब था जिसमें मायावती ने पीएम मोदी पर आरोप लगाया था कि नरेन्द्र मोदी जी राजनीतिक फायदे के लिए गुजरात में खुद को ओबीसी में शामिल करवा लिया था।

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25 अप्रैल 2019:  25 अप्रैल को पीएम मोदी ने सपा-बसपा पर अपने जाति पर उठाए गए सवाल का आरोप लगाया था। पीएम मोदी ने कहा था कि मेरे जाति के उपर ये लोग राजनीति खेल रहे हैं। चलिए एक समय के लिए अगर मान भी लें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सपा-बसपा पर जो आरोप लगाया वह सही है। लेकिन फिर उसके बाद पीएम मोदी ने कांग्रेस के लिए जो बयान दिया वह कहां तक सही है इस पर अरुण जेटली जी का ध्यान कब जाएगा? कांग्रेस के बारे में पीएम मोदी ने कहा था कि नामदार(नेहरु-गांधी के वंशज) उनकी जाति के पूरे समुदाय के प्रति नफरत फैला रहे हैं इसलिए उन्हें चोर कहा जा रहा है। अब पीएम मोदी को इस बात का इल्म बिल्कुल नहीं था कि इस तरह के बयान भी जातिवाद की राजनीति के अंतर्गत आता है। जब आप अपने समुदाय का पक्ष लेते है तो यह जातिवाद नहीं है तो और क्या है?

20 अप्रैल 2019:  ऊपर के दोनों बयान पीएम ने उत्तर प्रदेश में दिये लेकिन 20 अप्रैल को जब वह रायबरेली में एक रैली को संबोधित कर रहे थे तो एक बार फिर उन्होंने सपा-बसपा पर निशाना साधा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि महागठबंधन और महामिलावटी लोग दो चरणों में हुए चुनाव से काफी हताश और निराश हो गए हैं। इसलिए वे अब इतने नीचे उतर आए हैं कि मेरे जाति पर भी सवाल उठा रहे हैं।

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17 अप्रैल 2019:  जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि सभी मोदी सरनेम वाले भगोड़े साबित हुए हैं। इस बात पर पीएम मोदी ने अपने को पिछड़ा जाति का बताया था। फिर कहा था कि नेहरु-गांधी परिवार के लोग उनके समुदाय के लोगों को गाली दे रहे हैं। अब यह जातिवाद राजनीति नहीं तो और क्या है?

अरुण जेटली जिस दावे के साथ कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी केवल विकास के नाम पर वोट अपील कर रहे हैं तो शायद वह 2014 का साल भूल गए हैं जब 20 जनवरी 2014 को पीएम मोदी ने खुद को निचली जाति का बताया था। जब मणिशंकर अय्यर ने कहा था कि मोदी कभी पीएम नहीं बन सकते है। हां, अगर वो कांग्रेस के दफ्तर के आगे चाय बेचने का काम करना चाहें तो स्वागत है। फिर पीएम मोदी ने उनका पलटवार करते हुए कहा था कि कांग्रेस नहीं चाहती कि एक निचली जाति का चायवाला जिसकी मां झाडू-पोछा करती है, वह प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव लड़े।

अब अरुण जेटली को यह सोचना चाहिए कि प्रधानमंत्री का सफर ही जातिवाद के बुनियाद पर शुरु हुआ था। इसलिए उनका यह दावा किसी भी तरह से गलत है। 2015 में गुजरात विधानसभा चुनाव में भी उन्होने कहा था कि कांग्रेस वाले मुझे नीच कह रहे हैं। हाँ, मैं गरीब हूँ और अपनी जिन्दगी का हर पल गरीबों, दलितों, आदिवासियों और ओबीसी के लिए काम करने में लगा दूंगा।

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