‘देर आए दुरुस्त आए’ इस कहावत को सच कर दिखाया है पठानकोट स्थित विशेष अदालत ने। कठुआ गैंगरेप मामले में शामिल हुए सात लोगों में से छह लोगों को दोषी करार दे दिया गया है। इस मामले में दोषियों को सजा देने के लिए 2 बजे का समय दिया गया था लेकिन  अभी तक इस मामले में कोई अपडेट नहीं आ पाया है। जिन 6 लोगों को दोषी करार दिया गया है उनमें ग्राम प्रधान सांजी राम (मुख्य आरोपी), पुलिस ऑफिसर दीपक खजुरिया, परवेश, सब इंस्पेटर तिलक राज, सब इंस्पेरक्टर आनंद दत्ता और पुलिस ऑफीसर सुरेन्द्र कुमार को दोषी करार दिया गया है। इस मामले में सातवां दोषी विशाल कुमार जो सांजी राम का बेटा है, उसे बरी कर दिया गया है। जब इस मामले की सुनवाई चल रही थी तब पठानकोट कोर्ट परिसर छावनी में तब्दील कर दिया गया था। यहां लगभग एक हज़ार पुलिसकर्मियों को मुस्तैद किया गया।

पिछले साल कठुआ गैंगरेप पर काफी बवाल मचा था। केस फाइल के हिसाब से इस मामले में सात लोग शामिल थे। लेकिन इसके पीछे और भी कई लोगों का हाथ था। ऐसा इसलिए भी कहना सही है क्योंकि इस मामले की सुनवाई जब कठुआ जिले के सत्र न्यायालय में होनी थी तो कठुआ के कुछ वकीलों ने इस पर जम कर बवाल किया। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए कठुआ से तीस किलोमीटर की दूर पड़ोसी राज्य पंजाब के पठानकोट जिले को चुना।

फोटो सोर्स- गूगल

इस मामले में राजनीति शामिल न हो ऐसा तो हो नहीं सकता है। मामले की जांच में यह बात सामने भी आई। इस मामले में टांग अड़ाई थी बीजेपी के दो मंत्रियों ने। चौधरी लाल सिंह और चंद्र प्रकाश गंगा ने। दोनों ने आरोपियों के समर्थन में रैली करना शुरु कर दिया। शायद आरोपियों के दिलों में खास जगह बनाने की कोशिश की जा रही थी। जिसका उन्हें फायदा भी मिला। दोनों को अपनी मंत्री पद छोड़ना पड़ा था।

ये था पूरा मामला

10 जनवरी 2018 को एक 8 साल की बच्ची घोड़े को चराने के लिए घर से बाहर निकली थी लेकिन फिर वापस नहीं आई। आई तो सिर्फ 7 दिन बाद उसकी लाश के जंगल में पड़े होने की दुःखद खबर। 12 जनवरी को घर वालों ने लापता होने की शिकायत हीरानगर थाने में दर्ज कराई थी। 22 जनवरी को पुलिस ने इस मामले को क्राइम ब्रांच को सौंपा। इस बीच कुछ लोग आरोपियों के पक्ष में खड़े हो गए। जिससे पीड़िता के परिवार को इस मामले में आगे सुनवाई न होने का डर लगने लगा। परिजनों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को कठुआ से पठानकोट की सेशन कोर्ट मे ट्रांसफर कर दिया।

कोर्ट ने 8 जून 2018 को सात आरोपियों के खिलाफ दुष्कर्म और हत्या के आरोप तय किए थे। केस में कुल 221 गवाह बनाए गए हैं। 55वें गवाह के रूप में पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर पेश हुए। 56वें गवाह के रूप में फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी के एक्सपर्ट को पेश किया गया। जब से केस की सुनवाई शुरू हुई, तब से अब तक सभी तारीखों पर सुनवाई की वीडियोग्राफी कराई गई है।

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