2019 लोकसभा चुनाव में देश के नेताओं के पास जनता के हित में बात करने के लिए कुछ भी नहीं है। यही वजह है कि नेता अब मुद्दे की बात करना छोड़कर महिलाओं के बारे में बेहद घटिया बयान देने लगे हैं। जिस देश में “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता” की कहावत बोली जाती है। उसी देश के नेता लोकतंत्र के मंदिर विधानसभा में बैठकर पोर्न देखते हुए महिलाओं को टंच माल बताते हैं। यह हमारा दुर्भाग्य है कि नेताओं ने देश की आधी अबादी को सेक्स सिंबल के रूप में प्रस्तुत करना शुरू कर दिया है।

2019 के लोकसभा चुनाव में बात बेरोजगारी, अशिक्षा, भूखमरी पर होनी थी। लेकिन नेताओं की बातें इन सभी मुद्दों से हटकर महिलाओं की योनि और उसे ढ़कने के लिए बने अंडरवियर तक पहुंच गई हैं।

दरअसल, पिछले दिनों चुनाव प्रचार के दौरान समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान ने अभिनेत्री जयाप्रदा के बारे में घटिया बयान दिया। आजम खान ने कहा कि रामपुर के लोगों जिस जयाप्रदा को पहचानने में आपको 17 साल लग गए उसे मैंने मात्र 17 दिनों में पहचान लिया था। इसके बाद आजम खान ने कहा कि मैं 17 दिनों में जान गया था कि जयाप्रदा की अंडरवियर खाकी के रंग की है। इसके बाद भीड़ में खड़े लोग जोरदार तालियां बजाते हैं।

नेताओं के लिए जनसभा में कुछ भी बोलकर तालियां बटोरना वोट बटोरने से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। लेकिन नेता यह क्यों नहीं समझते कि जब वो इस तरह का बयान दे रहे होते हैं तब महिलाओं के खिलाफ एक खास तरह की मानसिकता को भी मजबूती दे रहे होते हैं। यही मानसिकता बाद में किसी की मां या बहन को भरी भीड़ में अपना शिकार बना लेती है।

आजम खान चाहते तो जयाप्रदा के द्वारा किए गए कामों पर भी बात कर सकते थे। आजम जयाप्रदा पर राजनीतिक टिका-टिप्पणी भी कर सकते थे। लेकिन जयाप्रदा के अंडरवियर की बात करके आजम खान ने यह प्रमाणित कर दिया कि उनकी नजर जनता के जरूरी मुद्दों पर कम महिलाओं की गुप्तांग की तरफ ज्यादा होती है।

ये भी पढ़े- जब ब्रिटिश महिला सांसद के सामने बस में ही मनोरोगी करने लगा हस्तमैथुन

जब आजम इस तरह की बात कर रहे होंगे तो क्या उनके दिमाग में कभी अपनी पत्नी, मां या बहन का ख्याल आया होगा? क्या आजम खान ने कभी सोचा होगा कि वो जो कुछ भी बोल रहे हैं उसे सुनकर घर पर उनकी पत्नी ने क्या सोचा होगा? इस बात में कोई दो राय नहीं कि किसी भी महिला को इस तरह की बातें असहज कर देंगी। महिला ही नहीं यदि आप एक संवेदनशील इंसान हैं तो पुरूष हो या महिला आपको ये बातें बिल्कुल पसंद नहीं आएंगी।

यह किसी एक दल के नेता की बात नहीं है सभी दलों के नेता इस तरह के बयान देते हैं। अभी हाल में हिमाचल प्रदेश के भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) प्रदेश अध्यक्ष ने राहुल गांधी को मां की गाली दी है। हिमाचल बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने कहा, “ मैं भारी मन से बोल रहा हूं। उसने लिखा है- इस देश का चौकीदार चोर है अगर तू बोलता है तो तू मा…..द है।”

सतपाल सिंह सत्ती उम्रदराज नेता हैं। वरिष्ट नेता होने के बावजूद उन्होंने किसी के मां के बारे में जिस तरह की घटिया बयानबाजी की है इससे उनके मानसिक संक्रमण का पता चलता है। सतपाल जैसे नेताओं के दिमाग में महिलाओं की योनि को लेकर बुरे ख्याल चलते रहते हैं। ये ख्याल इस हद तक गिरे हुए हो सकते हैं कि ऐसे ख्याल रखने वाले लोग किसी की भी मां के बारे कुछ भी सोच सकते है।

सतपाल ने शायद ऐसा कभी सोचा होगा कि यदि उनकी मां के बारे में कोई इस तरह की बात करे तो बेटा होने के नाते इस बात को वो कैसे महसूस करेंगे। यह सोचने वाली बात है कि क्या राहुल गांधी पर हमला करने के लिए सतपाल के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाए गए “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” और  उज्जवला योजना का डेटा नहीं था? सतपाल एक राज्य के भाजपा प्रमुख हैं एक बार पता कर लेते कि उनकी पार्टी महिलाओं के उत्थान के लिए कई योजनाएं चला रही है। लेकिन चुनाव के समय में सतपाल को लगा कि वोट योजनाओं के नाम गिनाकर नहीं मिलेंगे इसलिए औरतों के गुप्तांग तक पहुंच गए। सतपाल ने  राहुल गांधी को उनकी मां के बारे में भद्दी गाली दी।

2019 लोकसभा चुनाव में महिलाओं की सुरक्षा को मुद्दा बनाया जाना था लेकिन नेताओं ने महिलाओं को लेकर जिस तरह की बयानबाजी की है उससे समाज की हकीकत हमारे सामने आ गई है।

जब भी देश के संसद में 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण देने और महिलाओं को मुख्यधारा में लाने की बात होती है तो देश की आधी आबादी के लिए की जा रही हक की बात को संसद में बैठे नेता दबा देते हैं। संसद में जब महिला आरक्षण बिल आता है तो पुरूषवादी मानसिकता के सांसद इस बिल को ही फाड़कर कूड़े के डब्बे में डाल देते हैं।

अभी हाल में बंगलुरू में एक कांग्रेस नेता के लिए अभिनेत्री खुशबू सुंदर रोड शो कर रही थी। इस रोड शो के दौरान एक व्यक्ति ने खुशबू के साथ छेड़छाड़ की जिसके बाद खुशबू ने भरी भीड़ में मनचले को थप्पड़ लगा दिया। यह आश्चर्य की बात है कि जिन राजनीतिक सभाओं से महिला हित में बात निकलनी थी। जिन राजनीतिक आंदोलन से महिलाओं के हक की आवाज को बुलंदी दी जानी थी। उन्हीं सभाओं व आंदोलनों के मंच पर बैठे लोग महिलाओं के बारे में घटिया बयान दे रहे हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here