मेनका गांधी, गांधी परिवार की वो कड़ी जो पूरे परिवार से अलग गईं। संजय गांधी की पत्नी और इंदिरा गांधी की बहू जो कांग्रेस में न होकर बीजेपी में गईं। मेनका गांधी, कांग्रेस में नहीं है उसकी एक बड़ी वजह है, पारिवारिक कलह। ये कलह है इंदिरा गांधी और मेनका गांधी के बीच का। जो संजय गांधी की मौत के बाद शुरू हुआ।

Related imageये तो जगजाहिर है कि इंदिरा गांधी शुरू से ही मेनका गांधी को पसंद नहीं करती थीं। इंदिरा गांधी नहीं चाहती थीं कि संजय, मेनका से शादी करे लेकिन संजय गांधी ने जब मेनका से शादी करने का फैसला कर लिया तो उन्होंने कुछ नहीं कहा।

23 जून 1980 को प्लेन क्रैश में संजय गांधी की मौत हो गई। उस समय राजीव गांधी और सोनिया गांधी विदेश में छुट्टी मना रहे थे। मेनका गांधी की मां अमृतेश्वर कौर आनंद और बहन अम्बिका भी विदेश में थे। जिस एयर इंडिया के प्लेन से राजीव और सोनिया को दिल्ली लाया जा रहा था। उसी प्लेन से अमृतेश्वर कौर आनंद और अम्बिका को भी दिल्ली लाया गया। दोनों परिवार एक ही प्लेन से दिल्ली आये। इंदिरा गांधी संजय से बहुत प्यार करती थीं और संजय की वजह से ही मेनका गांधी को इंदिरा कुछ नहीं कहती थीं।

संजय की मौत के बाद इंदिरा गांधी और मेनका गांधी के रिश्ते में दरार आ गई। संजय की मौत के वक्त मेनका गांधी की उम्र 23 साल की थी और उनका तीन माह का बेटा वरुण गांधी था। मेनका उस समय को याद करते हुये बताती हैं, ‘वे अपने दूसरे बेटे को चाहती थीं। तब राजीव आगे आए और अब उन्हें फिर से आगे जाने पड़ा। वो तीन से आपस में बात भी नहीं कर रहे थे। संजय की मौत के बाद उन्हें फिर से राजीव को मनाना पड़ा। उन्हें आगे लाना पड़ा, उस काम के लिए जिसके लिये उन्हें प्रशिक्षित ही नही किया गया था।

Related imageइंदिरा गांधी को मेनका गांधी इसलिये भी नहीं पसंद थीं क्योंकि संजय गांधी प्रधानमंत्री आवास से ज्यादा मेनका के परिवार के साथ ज्यादा वक्त बिताते। इंदिरा को यही बात अच्छी नहीं लगती थी। संजय की मौत के बाद मेनका गांधी का बुरा वक्त शुरू हो गया। इंदिरा गांधी ने मेनका गांधी से कहा वे उनकी सेक्रेटरी के रुप में काम करें। कुछ दिनों बाद धीरेन्द्र ब्रम्हचारी ने मेनका गांधी को बताया कि वे मेनका को बताने में संकोच कर रही हैं कि आप सेक्रेटरी का काम नहीं करेंगी। इसकी वजह हैं राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी। सोनिया गांधी जिद पर अड़ी हैं कि अगर आपको ये पद दिया तो वे अपने परिवार समेत इटली चली जायेंगी।

आपातकाल के दौरान संजय के साथ मेनका गांधी भी सियासत सीख रही थीं और उनको लगता था कि संजय के बाद उनको ही मौका मिलेगा। इंदिरा ने जब राजीव को अपना वारिस चुना तो मेनका गांधी का माथा ठनक गया। अब मेनका को अपने पति की जगह जेठ को देखना होगा। इंदिरा ने एक बेटे की जगह, दूसरे बेटे को चुना। इंदिरा नहीं चाहतीं थी कि उनकी सियासत किसी दूसरे परिवार में जाये। इसलिए वो राजीव के अलावा किसी दूसरे को चुनने के पक्ष में नहीं थीं। 1977 के बाद का समय इंदिरा के लिये बहुत कठिन रहा था, वे दोबारा उस दौर से नहीं गुजरना चाहती थीं।

इंदिरा गांधी को मेनका गांधी की उपस्थिति खराब लगने लगी थी, वे उसके हर काम में गलतियां निकालने लगीं। जब मार्गरेट थैचर के सम्मान में दावत रखी गई थी। उस मेज पर मार्गरेट थैचर के साथ इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी बैठे थे। मेनका गांधी को उस मेज से दूर, स्टाॅफ की मेज पर बैठाया गया। ये मेनका की उपेक्षा करने की शुरुआत थी। दोनों महिलाओं के बीच रिश्ते तेजी से बिगड़ने लगे। दोनों एक-दूसरे को भला-बुरा कहने लगी। हद तो तब हो गई जब इंदिरा ने मेनका को कहा, सब लोग तुमसे नफरत करते हैं, ‘तुमने अपने पिता की हत्या की है’।

Image result for menka gandhi and indira gandhiमेनका गांधी को समझ में आ गया था कि ये सब उनको प्रधानमंत्री आवास से जाने का एक संकेत था। मेनका जाने से पहला कुछ करना चाहती थीं, शक्ति प्रदर्शन। इंदिरा गांधी जब भारत उत्सव के लिये लंदन गई थीं, वे अपने साथ अपनी प्यारी बहू सोनिया गांधी को ले गईं थीं। तब मेनका और अकबर अहमद ने संजय विचार मंच की शुरूआत की। मेनका ने लखनउ में 1982 के मार्च महीने में ये मंच शुरू किया। ये वो दौर था जब राजीव गांधी देश की सियासत को सीखने में लगे थे और वे जींस से कुर्ता-पायजामा में आ गये थे। राजीव गांधी ने मेनका का वो भाषण इंदिरा को तार से भेज दिया। इंदिरा ने मेनका को चेतावनी भी दी थी कि अगर वे उस सभा में गईं तो वे लौटकर सफदरगंज न आये।

मेनका लौटीं और कड़े तेवर में लौटीं। वे तैयार थीं इंदिरा का विरोध करने के लिये। इंदिरा गांधी 28 मार्च 1982 को लंदन से लौटीं, जब मेनका ने उनको प्रणाम किया तो इंदिरा बोलीं, मैं तुमसे बाद में बात करूंगी। इंदिरा ने मेनका को कहलवा दिया कि आज वे खाने पर न आये, उनका खाना कमरे में ही भेज दिया जायेगा। लगभग एक बजे मेनका को इंदिरा गांधी ने बुलाया। मेनका बैठक में पहुंची, थोड़ी देर बाद तेज कदमों से इंदिरा गांधी भी आ गईं। इंदिरा ने उबलते हुये मेनका को कहा,

तुम वाहियात टिन्नी-सी, झूठी, धोखेबाज। तुम इस घर से बाहर निकल जाओ। मेनका ने पूछा, क्यों, मैंने क्या किया? इंदिरा गांधी ने चिल्लाकर कहा, तुमने जो भाषण दिया है। उसका एक-एक शब्द मुझे मालूम है। मेनका ने जवाब दिया, वह तो आपने देख ही लिया होगा। इंदिरा को इस जवाब की कल्पना नहीं थी। इंदिरा फिर चीखीं और बोलीं, ‘तुम्हें तुम्हारी मां के घर ले जाने के लिए गाड़ी खड़ी है’।

मेनका गांधी ने सामान बांधने के लिये समय मांगा लेकिन इंदिरा इसी वक्त उनका बोरिया-बिस्तर बांधना चाहतीं थीं। इंदिरा ने कहा, तुम जाओ, तुम्हारा सामान भेज दिया जायेगा, मेनका फिर भी अड़ी रहीं। कुछ देर बाद मेनका की बहन अम्बिका और भाई भी प्रधानमंत्री आवास पहुंच गये। लेकिन दोनों को ही बाहर रोक दिया गया। ये पहला मौका था जब उन दोनों को प्रधानमंत्री आवास जाने से रोक दिया गया। इंदिरा गांधी ने उनको अंदर बुला लिया, अम्बिका सीधे मेनका के कमरे में गईं। पीछे-पीछे इंदिरा भी मेनका के कमरे में आ गईं। इंदिरा ने फिर से मेनका से कहा, यहां से निकल जाओ। अम्बिका ने कहा, वो नहीं जायेगी, ये उसके पति का घर है।

Related imageइंदिरा गांधी चिल्लाते-चिल्लाते रोने लगीं और बोलीं, मैंने उससे जाने को नहीं कहा, वो ही अपने आप जा रही है। मैंने अपनी जिंदगी में कभी झूठ नहीं बोला है। मेनका ने पलटकर जवाब दिया, आपने जिंदगी में कभी सच नहीं बोला है।
धीरेन्द्र ब्रम्हचारी इंदिरा को कमरे से बाहर ले गये।

इसके बाद रात के 11 बजे खुद अपनी मर्जी से मेनका अपनी बहन और बेटे फिरोज वरूण गांधी के साथ बाहर जाने लगीं। प्रधानमंत्री की गाड़ी से मेनका को भेजा गया और आदेश दिया गया, जहां वे ले जाएं, चले जाना। इंदिरा गांधी को सबसे ज्यादा दुख था अपने पोते से दूर होने का। इंदिरा ने अपने सचिव पी.सी. अलेक्जेंडर से कहा, ये लड़की वरुण को मेरे पास से दूर ले गई। इसके बाद इंदिरा गांधी ने आखिरी खत मेनका को लिखा और उसमें अपना गुस्सा जाहिर किया। मेनका ने उस खत का जवाब खुले खत के रूप में दिया। जिसे इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने छापा भी। उस खत का मजमून ऐसा है-

‘‘संजय की मौत के बाद से ही आपने मुझे बात-बात पर सताना शुरू कर दिया। मैंने आपके लिए कितना कड़ा संघर्ष किया। मैं आपके पक्ष में बोली थी और हमेशा बोलती रहूंगी। जब आपका बाकी परिवार अपना सामान बांधकर विदेश जाने की तैयारी में था’’।

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