भारत की राजधानी दिल्ली की हालात इस वक्त कुछ ठीक नहीं है। पहले वायु प्रदूषण ने लोगों का जीना हराम किया था और अब खाकी वर्दी और और काले कोट के बीच हुये विवाद की वजह लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। सब दिल्ली की हवा को साफ और शुद्ध बनाने में लगे हैं। इसके लिए सरकार भी कई तरह के उपाय कर रही है। जैसे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पंजाब और हरियाणा सरकार को दोषी ठहरा रहे हैं। केंद्र सरकार भी अपनी तरफ से उपाय कर रही है। केंद्र सरकार का कहना है कि केजरीवाल सरकार ने सही समय पर सही कदम नहीं उठाए। इसलिए ये स्थिति बन गई है। अभी ये बातें हो ही रही थीं कि उसी वक्त पटना से भी एक खबर आ गई। खबर प्रदूषण से ही संबंधित है।

ऐसे में अब ये सवाल उठने लगे हैं कि नीतीश सरकार इस प्रदूषण को रोकने के लिए क्या कर रही है? इससे पहले भी बिहार में जितनी भी आपदाएं आयीं, चाहे वो चमकी बुखार हो या फिर बाढ़ नीतीश कुमार की उसमें फजीहत ही हुई है। कहीं ऐसा न हो कि यह पटना की जहरीली हवा, नीतीश कुमार की कुर्सी न लेकर उड़ जाए क्योंकि अभी तक तो किसी भी आपदा पर एक सही और सटीक उत्तर नीतीश कुमार नहीं दे पाए हैं।

नीतीश कुमार भी इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं और इसके लिए उन्होंने सोमवार को एक उच्चस्तरीय बैठक भी की। नीतीश कुमार और उनकी टीम ने इस बैठक में पटना प्रदूषण को रोकने के लिए कई सारे उपाय भी निकाले हैं। इस बैठक के बाद 15 साल पुराने निजी वाहनों पर रोक लगाने या उसकी फिटनेस जांच कराने की बातें कही गई हैं। वहीं व्यवसायिक वाहन जो 15 साल पुराने हो चुके हैं, उन पर रोक लगा दी गई है। साथ ही पराली जलाने वाले किसानों को सब्सिडी न दिए जाने की बात भी कही गई है। मतलब उन किसानों को जो सरकारी लाभ मिलता है वो, खत्म हो जाएगा। ये सभी नियम 7 नवंबर से लागू हो जाएंगे।

पटना के प्रदूषण को लेकर एक रिपोर्ट भी आई है। यह रिपोर्ट है केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की। इसमें यह बताया गया है कि पटना में सबसे ज्यादा प्रदूषण के लिए 32 प्रतिशत गाड़ियां, 7 प्रतिशत उद्योग, 4 प्रतिशत ईंट भट्ठा, 12 प्रतिशत धूल कण, 7 प्रतिशत अवशेष का जलना, 10 प्रतिशत हीटिंग, 5 प्रतिशत डी जी सेट ज़िम्मेदार हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की वायु प्रदूषण पर साल 2016 में एक रिपोर्ट आई। इस रिपोर्ट के मुताबिक पूरी दुनिया में गया चौथे, पटना पांचवे और मुज़फ़्फ़रपुर नौंवे नंबर पर है।

प्रदूषण के लिए बैठक करते नीतीश कुमार और अन्य, फोटो सोर्स: गूगल
प्रदूषण के लिए बैठक करते नीतीश कुमार और अन्य, फोटो सोर्स: गूगल

नीतीश कुमार के इस फैसले के बाद अब कई तरह के सवाल भी खड़े हो रहे हैं। पहला सवाल किसानों का है। नीतीश कुमार ने सब्सिडी ख़त्म करने का फैसला किया है। जिसके बाद किसानों ने सवाल उठाना शुरु कर दिया है कि अगर पुआल (पराली) जलाने से पॉल्युशन होता तो सबसे ज्यादा गांव पॉल्युटेड होते। ऐसे में किसानों की गलती न होने के बाद अगर सरकार उनकी सब्सिडी रोकने की बात कह रही है तो, यह कहीं से भी सही नहीं है। इसके बाद मिनी ट्रक को रोकने की जो बात कही गई है, उस पर भी सवाल उठने शुरु हो गए हैं। मिनी ट्रक्स के ड्राइवर्स का कहना है कि अगर मिनी ट्रक्स से धुआं निकलने से प्रदूषण हो रहा है तो ट्रक्स के इंजन चेंज करवा दिए जाएं। अगर ट्रक ही चलना बंद हो जाएंगे तो, फिर ड्राइवर करेंगे क्या? ऐसे में तो वो बेरोज़गार हो जाएंगे।

बिहार मोटर ट्रांसपोर्ट फेडरेशन के अध्यक्ष जगन्नाथ सिंह  ने बीबीसी हिंदी से बात करते हुए कहा,

80 के दशक में ही बिहार सरकार ने ये आदेश जारी किया था कि गाड़ी को उसकी उम्र से नहीं बल्कि उसकी कंडीशन या हालत से जज किया जाएगा। ऐसे में सरकार का ये फ़ैसला केवल बेरोज़गारी ही फैलाएगा। क्योंकि अनुमान ये है कि एक ट्रक से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर 15 लोगों को रोज़गार मिलता है। आप लोगों को बेरोज़गार कर रहे हैं, यात्रियों को परेशानी में डाल रहे हैं. हमारी सरकार से मांग है कि सरकार बड़ी गाड़ियों की खरीदारी में इंस्टालमेंट मे रियायत और होम लोन जैसी सुविधाएं दे।

दरअसल, पटना में प्रदूषण को लेकर चिंता छठ पूजा के दिन हुई। जब कई छठ पूजा में शामिल महिलाएं गंगा के किनारे खड़े होकर सूर्य के उगने का इंतजार कर रही थीं लेकिन, सूर्य 8 बजे के बाद ही दिखाई दिया था। इसी के बाद प्रदूषण को लेकर सभी चर्चाओं की हवा तेज हो गई। वैसे नीतीश कुमार साल 2015 में भी प्रदूषण को लेकर चिंता जता चुके हैं। उस वक्त मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने डीजल और पेट्र्रोल गाड़ियों पर रोक लगाने की बात कही थी। लेकिन, हुआ क्या? नतीजा अब तक ‘ढाक के तीन पात’ ही रहा है। अब ऐसे में एक बार फिर नीतीश कुमार के इस फैसले का पटना में जमीनी स्तर पर कितना प्रयोग होता है, यह समय बताएगा।

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