बिहार में बहार है क्योंकि नितीश कुमार है

फिलहाल यह लाइन वे लोग जरुर नहीं बोलते होंगे जो गुटखे का सेवन करते हैं। यानि जिनका गुटखा खाने के बाद ही दिन शुरु होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि नितीश कुमार ने बिहार में शराबबंदी के बाद अब गुटखाबंदी भी कर दी है। इस बात को कोई पचा नहीं पा रहा है क्योंकि, इसमें एक कंडीशन है और वो ये हैं कि यह गुटखा पूरे एक साल के लिए ही बैन किया गया है। यानि आने वाले एक साल तक लोगों को बिना गुटखे के ही दिन की शुरुआत करनी पड़ेगी। यह निर्णय स्वास्थ्य विभाग की बैठक के बाद लिया गया।

विपक्ष इसको लेकर पूरी तरह से नितीश कुमार के पीछे पड़ा हुआ है। विपक्ष को इस बात का एहसास हो गया है कि नितीश कुमार ने आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बहुत ही सेफ गेम खेला है। वैसे भी नितीश कुमार की छवि लोगों के हितों में फैसले लेने वाली है। नितीश कुमार ने जब यह फैसला सुनाया तो उन्होंने यह बताया कि पान मसालों में मैग्नीशियम कार्बोनेट का इस्तेमाल हो रहा है, ऐसी शिकायत मिली है।  इसलिए सरकार ने इसकी जांच कर बैन करने का फैसला किया है।

नितीश कुमार, फोटो सोर्स: गूगल

नितीश कुमार, फोटो सोर्स: गूगल

बिहार सरकार के इस फैसले के बाद कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं। पहला सवाल यह कि क्या यह मामला सिर्फ खतरनाक केमिकल की मिलावट का है? या नितीश कुमार पान मसाला/गुटखा को सेहत के लिए खतरनाक मानते हैं। अगर ऐसा है तो यह बैन सिर्फ एक साल के लिए ही क्यों? क्या एक साल बाद जिन-जिन कंपनियों को बैन किया गया है वो केमिकल के बिना पान मसाला/ गुटखा बनाएंगे?

इन सभी सवालों के बीच जिन कंपनियों के पान मसाले या गुटखे को बैन किया गया है उनमें रजनीगंधा, राज निवास, राजश्री, पान पराग, मधु पान मसाला इत्यादि कंपनियां हैं। अब एक और बात, ऐसा बिल्कुल नहीं है कि यह बिहार में पहली बार हुआ है। जब नितीश कुमार से पहले जीतन राम मांझी सरकार में थे तो उस वक्त भी गुटखा बैन किया गया था। इसका रिजल्ट भी सामने आया। उसी साल आम जनता के बीच तो गुटखा नहीं देखा गया लेकिन, स्टेज पर भाषण देते वक्त जदयू के नेता गुटखा खाते हुए जरुर पकड़े गए थे। अब आम जनता पर रोक लगाने के लिए सरकार ने नियम तो लगा दिए लेकिन, शायद सरकार खुद पर नियम लगाना भूल गई थी। ऐसे में कहीं नितीश कुमार जी ऐसी गलती दोहराते हुए तो नज़र नहीं आ रहे हैं?

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल

गुटखे पर बैन लगाने की डिमांड साल 2011 में उठी थी। इसके पीछे कारण बताया गया कि इसके सेवन से एक तो लोग कई खतरनाक बीमारियों के शिकार होते जा रहे थे तो दूसरी तरफ इसकी लत से लोगों की आर्थिक स्थिति भी बद से बदतर होती जा रही थी। ऐसे में यह मांग काफी तेजी से उठी और पूर्णत: मध्य प्रदेश, देश का पहला राज्य बना जिसने 1 अप्रैल 2012 को गुटखे पर बैन लगा दिया। इसके बाद कुछ राज्यों ने गुटखे पर बैन लगाने से मना कर दिया था। जब बाद में इसके लिए शिकायत की गई तो उन राज्यों ने भी अपने यहां बैन लगाना शुरु किया। परिणाम यह निकला कि साल 2012 में कुल 29 राज्यों में से 14 राज्यों में गुटखा बैन हो गया।

आखिर एक सर्वे से बाद में पता चला कि देश में कुल गुटखे और पान मसाले का व्यापार 60,000 करोड़ रुपये का है। इससे सरकार को भी टैक्स जाता है। ऐसे में गुटखा बैन होना सरकार के लिए घाटे का सौदा था। फिर जब सर्वे में यह भी पता चला कि देश के लगभग 13% पुरुष और 3% महिलाएं गुटखे/पान मसाले का सेवन करते हैं तो इस पर तेजी से कार्रवाई की गई और देखते-देखते यह बैन कर दिया गया। आज देश के लगभग 18 राज्यों में गुटखा बैन है लेकिन, जमीनी स्तर पर इसमें कितनी हकीकत है यह आप सभी जानते हैं।

ऐसे में नितीश कुमार के द्वारा लिया गया यह फैसला किस हद तक सफल होता है यह तो वक्त के साथ पता चलेगा लेकिन, फिलहाल विपक्ष इसे महज चुनाव के पहले, वोटरों को अपनी तरफ रिझाने का एक फैसला मानती है, इसके अलावा कुछ नहीं।