बिहार के सीतामढ़ी में पुलिस कस्टडी में दो लोगों की मौत हो गई है। इन दोनों ही आरोपियों को पुलिस हिरासत में बुरी तरह से पीटा गया। पुलिस ने दोनों ही लोगों की पीटाई लोहे के कीलों से किया था। यही नहीं मृतकों के शरीर पर नाखून के निशान भी मिले थे। मीडिया से आ रही खबरों के मुताबिक दोनों ही अपराधी को पुलिस हिरासत में बुरी तरह से पीटा गया था। बिहार पुलिस द्वारा की गई बेरहमी से दोनों लोग बुरी तरह से घायल हो गए थे। मृतकों के घर वालों ने कहा कि दोनों लोगों को पुलिस ने हिरासत में काफी प्रताड़ित किया था, जिसकी वजह से दोनों लोगों की मौत हो गई।

आइए पहले पूरा मामला जानता हैं..

मीडिया से आ रही खबरों के मुताबिक पिछले बुधवार को पुलिस ने गुफरान और तस्लीम नाम के दो लोगों को बाइक चोरी के मामले में गिरफ्तार किया था। पुलिस कस्टडी में मृत तस्लीम पर पहले से चार अपराधिक मामले दर्ज थे। वहीं गुफरान पर इससे पहले कोई भी अपराधिक मामले दर्ज नहीं हुए थे। पुलिस के मुताबिक दोनों अपराधी ने बाइक चोरी करने के दौरान बाईक के मालिक राकेश कुमार की हत्या कर दी थी। इसी वजह से दोनों ही मृतकों पर बाइक चोरी के साथ हत्या का मुकदमा चल रहा था।

सीतामढ़ी जेल में मृतकों के परिजन (Photo Creadit: Express Group)

मृतक के घरवालों का ये कहना है…

मृतक तस्लीम के बड़े भाई सनावर अली का कहना है कि गिरफ्तारी के बाद जब वो अपने भाई से मिलने थाने गए तो उन्हें मिलने नहीं दिया गया। जब उन्होंने पुलिस से बात की तो पुलिस ने बताया कि उनके भाई को डुमरा थाना भेज दिया गया है। सनावर ने बताया कि इसके बाद उन्होंने अपने भाई से फोन पर बात की। सनावर ने बताया कि फोन पर जब वो गुफरान से बात कर रहे थे तो उसकी आवाज में कराहने की आवाज आ रही थी। बाद में थाने में मौजूद महिला पुलिस ने सनावर को बताया कि गुफरान और तस्लीम दोनों को हॉस्पिटल भेज दिया गया है।

सनावर वहां पहुंचा तो उसे मालूम चला कि दोनों लोगों की मौत हो चुकी है। दोनों के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। यही नहीं परिवार के लोगों को भी शव देखने नहीं दिया गया। गुफरान के पिता ने इंडियन एक्सप्रेस के पत्रकार को बताया कि दाह संस्कार के दौरान गुफरान के शरीर पर नाखून और लोहे के कील के दाग देखे गए थे। जिसका फोटो भी उन्होंने मोबाईल में क्लिक कर लिया था। परिवार के लोगों ने कहा कि पुलिस का काम इस तरह बेरहमी से सजा देना नहीं है। अदालत के काम को पुलिस कैसे कर सकती है? क्या पुलिस अदालत से बड़ी हो गई? यही नहीं घरवालों ने सरकार से मुआवजे की मांग भी की है। उन्होंने विधवा को नौकरी देने की मांग भी की है।

प्रतिकात्मक तस्वीर (photo credit: google )

मामले पर पुलिस ने क्या बयान दिया है..

खबरों के मुताबिक बिहार के डीजीपी ने आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन तो दिया है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि मामले से संबंधित एफआईआर में किसी पुलिस वाले का नाम नहीं है। यही नहीं इंडियन एक्सप्रेस को दिए अपने इंटरव्यू में डीजीपी ने यह भी कहा कि हमने सीतामढ़ी के डुमरा थाना प्रभारी सहित पुलिस के पांच जवानों को सस्पेंड कर दिया है। जिले के एसपी को कारण बताओ नोटिस भी भेजा गया है।

बिहार में पुलिसिया दमन कोई नया नहीं है…   

बिहार पुलिस के लिए अपराधियों को इस तरह से बेरहमी भरी सजा देना कोई नई बात नहीं है। जानकारी के लिए आपको बता दें कि बिहार पुलिस ने भयावह अंखफोड़वा कांड को भी अंजाम दिया है। इस घटना के तीन दशक बीत गए हैं, लेकिन पुलिस की बेरहमी को याद करके आज भी लोगों के शरीर के रूह खड़े हो जाते हैं।

दरअसल, 1980-81 के दौरान भागलपुर सेंट्रल जेल में बंद 33 संदिग्ध अपराधियों की आंखों में तेजाब डाल दिया गया था। कानून हाथ में लेकर पुलिस के कुछ अधिकारियों ने अपराधियों की आखों में बेरहमी से तेजाब डाल दिया था। सभी 33 लोगों को हमेशा के लिए अंधा बना दिया गया। पीड़ित लोगों में कुछ लोग अंडर ट्रायल थे जबकि कुछ लोग दोषी करार दिए गए अपराधी थे।

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