पीएम मोदी देश में जितने फेमस हैं. उससे कई ज्यादा विदेशों में फेमस हैं. यही वजह है कि उन्हें झोलियां भर-भर के अवार्ड दिए जा रहे हैं. जापान से लेकर सऊदी अरब तक ने उन्हें सम्मानित किया है. अभी हाल ही में मोदी जी भूटान का राष्ट्रीय सम्मान लेकर आए हैं. अब मोदी जी हैं ही इतने टैलेंटेड. तभी तो बेयर ग्रिल्स के साथ जंगल में मंगल कर पाए. माफ कीजिएगा सर्वाइवल टास्क कर पाए.

पर, ये बात कुछ लोगों को समझ नहीं आती है. खासकर उन पढ़े लिखे अर्बन नक्सलियों को तो बिल्कुल नहीं. इसलिए बात-बात पर मोदी जी को क्रिटिसाइज करने लगते हैं. अब इन्हीं की वजह से मोदी जी का एक अवार्ड अटक गया है. अबकी बार ये अर्बन नक्सली अंतर्राष्ट्रीय हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, फोटो सोर्स: गूगल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, फोटो सोर्स: गूगल

हुआ क्या है?

पीएम मोदी को बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने सम्मानित करने का फैसला किया है. उन्हें ग्लोबल गोलकीपर अवार्ड देने की घोषणा की गई है. उन्हें ये आवार्ड उनके फ्लैगशिप कार्यक्रम स्वच्छ भारत अभियान के लिए दिया जा रहा है. यह अवार्ड 24 सितंबर को दिया जाएगा. इस दिन फाउंडेशन के चौथे वार्षिक गोलकीपर्स ग्लोबल गोल्स अवार्ड फंक्शन का आयोजन किया गया है.

बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के संस्थापक दुनिया के सबसे अमीर आदमी बिल गेट्स हैं. पर, अब वो दुनिया के सबसे अमीर आदमी नहीं हैं. उनकी जगह अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस ने ले ली है. हालांकि, इसका अवार्ड से कोई लेना देना नहीं है. ये सिर्फ आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ाने के लिए था. खैर…मुद्दे पर आते हैं.

जैसे ही पीएम मोदी को ग्लोबल गोलकीपर अवार्ड मिलने की घोषणा हुई. दुनिया भर में बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की आलोचना होने लगी.

बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन,फोटो सोर्स:गूगल
बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन,फोटो सोर्स:गूगल

आलोचना की शुरूआत 1976 में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मेरिड मैग्वेइर ने की है. उनका कहना है,

हमें यह जान कर बहुत हैरानी हुई है कि बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन इस महीने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पुरस्कार देगा. नरेंद्र मोदी के राज में भारत, ख़तरनाक और घातक अव्यवस्था की तरफ बढ़ा है. जिसकी वजह से मानवाधिकार और लोकतंत्र लगातार कमज़ोर हुए हैं. यह हमें ख़ास तौर पर परेशान कर रहा है क्योंकि आपके फाउंडेशन का घोषित मिशन जीवन को संक्षिप्त करना और असमानता से लड़ना है.

उन्होंने बाकायदा फाउंडेशन को पत्र लिखकर ये सारी बातें कहीं हैं. उन्होंने अपने पत्र में भारत में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों का ज़िक्र भी किया है. साथ ही कश्मीर और असम को लेकर मोदी द्वारा लिए फैसलों की आलोचनाओं को भी इसमें शामिल किया है.

इनके अलावा दक्षिण एशियाई अमरीकियों के एक समूह ने भी इस फाउंडेशन को पत्र लिखा है. इसमें लिखा गया है कि

बीते एक महीने से अधिक समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के 80 लाख लोगों को नज़रबंद कर रखा है. बाहरी दुनिया से वहां संचार सुविधाएं और मीडिया कवरेज बंद हैं. वहां बच्चों समेत हज़ारों लोगों को हिरासत में लिया गया है.

इनका कहना है

यह पुरस्कार भारत सरकार के मानवाधिकारों के उल्लंघन के विरोध में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की अनदेखी और चुप्पी साधने को दर्शाएगा.

सोल  शांति पुरस्कार लेते पीएम मोदी, फोटो सोर्स: गूगल
सोल शांति पुरस्कार लेते पीएम मोदी, फोटो सोर्स: गूगल

यह पहली बार नहीं हो रहा है

मोदी जी के लिए ये कोई नई बात नहीं है. उनको जब भी कोई अवार्ड मिलता है. तब-तब कोई नया झमेला खड़ा हो जाता है.

मोदी जी को जब फिलिप कोटलर राष्ट्रपति पुरस्कार और सोल (साउथ कोरिया) शांति पुरस्कार दिया गया था. तब भी इसको लेकर खूब बवाल हुआ था. क्योंकि अर्थशास्त्र से जुड़े दुनिया भर के तमाम एक्सपर्ट्स ने मोदी के हर आर्थिक फैसले की आलोचना की थी. नोटबंदी और जीएसटी ने तो भारतीय अर्थव्यवस्था को रसातल में डाल दिया था.

दरअसल, फिलिप कोटलर राष्ट्रपति पुरस्कार, लोकतंत्र और आर्थिक विकास को नया जीवन देने के लिए दिया जाता है. वहीं सोल (साउथ कोरिया) शांति पुरस्कार, गरीब और अमीर के बीच सामाजिक और आर्थिक विषमताओं को कम करने के लिए दिया जाता है.

जब संयुक्त राष्ट्र ने पीएम मोदी को ‘चैंपियंस ऑफ़ द अर्थ’ पुरस्कार से नवाजा था. तब भी इसको लेकर खूब ड्रामा हुआ था. कहा जाने लगा था कि उनके ग्रीन लाइट प्रोजेक्ट से बड़े स्तर पर जंगलों की कटाई का ख़तरा है.

इसके अलावा पीएम मोदी पर यह आरोप लगाया गया कि उन्होंने दिल्ली को धरती का सबसे प्रदूषित शहर बनने दिया.

स्वच्छ भारत अभियान का हाल भी कुछ ऐसा ही है. जिसके लिए उन्हें गोलकीपर अवॉर्ड दिया जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स और ह्वेयर इंडिया का हवाला दे कर बीबीसी ने लिखा है कि

स्वच्छ भारत अभियान के तहत बने कई शौचालयों का इस्तेमाल इसलिए नहीं हो पा रहा क्योंकि पानी की उपलब्धता कम है.

जबकि मोदी सरकार का यह कहना है कि

इस योजना में अब तक 90 फ़ीसदी भारतीयों को स्वच्छ शौचालय मुहैया करवाया जा चुका है. अब मोदी जी से कोई पूछे, बिना पानी के कैसी स्वच्छता?

बिल गेट्स, फोटो सोर्स: गूगल
बिल गेट्स, फोटो सोर्स: गूगल

बिल गेट्स ने इस सब पर कुछ कहा है

बिल गेट्स ने हिंदुस्तान टाइम्स को इंटरव्यू दिया है. इस इंटरव्यू में उन्होंने इस पूरे विवाद पर खुल कर बात की है. साथ ही बताया है कि पीएम मोदी को ये पुरस्कार क्यों दिया जा रहा है?

बिल गेट्स का कहना है,

स्वच्छ भारत मिशन से पहले भारत में 50 करोड़ से अधिक लोगों के पास शौचालय नहीं थे और अब उनमें से ज्यादातर इसके दायरे में आ गए हैं. अभी भी लंबा रास्ता तय करना है. लेकिन, भारत में मोदी के स्वचछता अभियान के प्रभाव दिख रहे हैं.

वहीं इस पूरे विवाद पर बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने भी अपनी बात रखी है. उनका कहना है

स्वच्छ भारत मिशन दुनिया भर के अन्य देशों के लिए एक उदाहरण के तौर पर काम कर सकता है. खासकर उनके लिए, जिन्हें लगता है कि दुनिया भर में ग़रीब लोगों के लिए स्वच्छता में सुधार करने की तत्काल ज़रूरत है.

बिल गेट्स और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की तरफ से आये इन बयानों के बाद. ये तो साफ़ हो गया है कि पीएम मोदी को अवार्ड जरूर मिलने जा रहा है. पर क्या इससे फाउंडेशन की क्रेडिबिलिटी पर आंच नहीं आएगी? खासकर तब जब सारी दुनिया इसकी निंदा कर रही है. अब ये तो बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन को ही सोचना होगा.

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