जहां एक तरफ लोकसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीति पार्टियां काफी सोच समझकर कोई भी कदम उठा रही है तो वहीं अरुणाचल प्रदेश में भाजपा सरकार अपने नए फैसले को लेकर आम जनता के आक्रोश का शिकार होती दिख रही है।

दरअसल, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडु ने ऐलान किया था कि वह 6 गैर अरुणाचली समुदाय के लोगों को PRC (Permanent Resident Certificate) यानि स्थायी निवासी प्रमाण पत्र देने के लिए सोच रहे हैं। जिसके बाद लोगों ने विरोध प्रदर्शन जारी कर दिया। विरोध प्रदर्शन ने उस वक्त बड़ा रूप ले लिया जब ITBP के जवानों द्वारा भीड़ पर काबू पाने के लिए की गई फायरिंग में दो लोगों की मौत हो गई।

जिसके बाद शव को लेकर लोगों ने नाहरलागुन हाईवे पर रास्ता रोका हुआ है। सैकड़ों लोग इंदिरा गांधी पार्क में जुटे हुए हैं। वे अंतिम संस्कार के लिए वहां पर खुदाई कर रहे हैं। लोगों का गुस्सा उस वक्त काफी बढ़ गया जब प्रदर्शन करने आई भीड़ ने देखते ही देखते उपमुख्यमंत्री के घर में आग लगा दी और साथ ही साथ सीएम के आवास पर भी हमला कर दी।

अरुणाचल प्रदेश: भीड़ पर काबू पाने की कोशिश करते हुए ITBP के जवान, फोटो सोर्स :गूगल

क्या है PRC?

अरुणाचल प्रदेश में जिस मुद्दे को लेकर हिंसा शुरु हुई है उसे स्थायी निवासी प्रमाण पत्र यानि Permanent resident certificate (PRC) कहा जाता है। यह एक कानूनी दस्तावेज है जो निवास के सबूत के तौर पर देखा जाता है। साथ ही साथ इसे सरकारी काम में निवास प्रमाण पत्र के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इसी दस्तावेज को बीजेपी की अगुआई वाली सरकार नमसई और चैंगलैंग जिले में रहने वाले 5 गैर आदिवासी समुदाय और विजय नगर में रहने वाले गोरखाओं को यह सर्टिफिकेट देने पर विचार कर रही है।

कौन-कौन सी जातियां है शामिल?

अरुणाचल प्रदेश सरकार जिन लोगों को यह प्रमाण पत्र देने की बात कर रही हैं उनमें देअरी, सोनोवाल कचारी, मोरन, आदिवासी और मिशिंग मुख्य रुप से शामिल हैं। सबसे खास और अहम बात कि इनमें से अधिकतर समुदायों को असम में अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है। एक जॉइंट हाई पावर कमिटी (JHPC) ने संबंधित लोगों से विस्तार से विचार-विमर्श के बाद छह समुदायों को पीआरसी देने की सिफारिश की। इस समुदाय के लोग अरुणाचल प्रदेश के बाशिंदे नहीं हैं, लेकिन नमसई और चैंगलैंग जिले में दशकों से रह रहे हैं।

हिंसा के दौरान स्थिति संभालते हुए सुरक्षा बल, फोटो सोर्स – गूगल

लोगों ने क्यों इसका विरोध किया?

अरुणाचल प्रदेश में रहने वाले लोग राज्य की बीजेपी सरकार के इस फैसले का पूरी तरह से विरोध कर रहे हैं। कई समुदायों और संस्थाओं ने इसका भरपूर विरोध किया हैं। उन लोगों का मानना है कि अगर सरकार यह फैसला लेती है तो अरुणाचल प्रदेश के स्थानीय आदिवासियों के अधिकारों और उनके सम्मान को ठोस पहुंचेगी। उनके सम्मान में कमी आएगी इसलिए लोग PRC को लागू करने के खिलाफ़ है।

वर्तमान स्थिति

PRC लागू करने के फैसले का असर जिस तरह से अरुणाचल प्रदेश में दिख रहा है उससे सरकार भी एक बार अपने फैसले पर पुर्नविचार करने में लगी हुई है। सरकार का यह फैसला शनिवार को विधानसभा में पेश किया जाना था लेकिन वर्तमान स्थिति को देखकर इस पर अभी विराम लगा दिया गया है। फिलहाल कई संगठनो के विरोध और विधानसभा भंग होने की वज़ह से इसे पेश नहीं किया गया है।

केन्द्र सरकार की भूमिका

माना जा रहा है कि राज्य सरकार के इस फैसले में केन्द्र सरकार की भी सहमति शामिल थी। केन्द्र सरकार भी चाहती थी कि इस फैसले पर अंतिम मोहर लगे लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने राज्य के लोगों से अमन और शांति बनाए रखने की अपिल की है। अपनी सफाई में केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजु ने कहा है कि राज्य सरकार PRC जैसा कोई बिल नहीं लाने जा रही हैं। उनका कहना है कि सरकार का मकसद केवल JHPC ( Joint High Power Comity) की रिपोर्ट को पेश करना था। जिसका मतलब यह है कि राज्य सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया है। इस बीच कांग्रेस पर हमला करते हुए रिजिजु ने कहा कि कांग्रेस खुद PRC के लिए लड़ रही है लेकिन साथ ही साथ लोगों को गलत तरीके से भड़का भी रही है। आपको बता दे कि JHPC की मांग नबम रेबिया कर रहे है जो खुद राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।

फोटो सोर्स: गूगल
फोटो सोर्स: गूगल

 राहुल गांधी ने भी जताया दुःख

अरुणाचल प्रदेश की स्थिति को देखते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दुःख जताया है। ITBP की फायरिंग में दो लोगों की मौत होने से राज्य में मची खलबली के बाद राहुल गांधी ने उम्मीद जताई कि राज्य में जल्द ही शांति लौट आएगी।

मुख्यमंत्री दे सकते हैं इस्तीफा

इस दौरान राज्य के हालात नियंत्रण में नहीं होने के कारण मुख्यमंत्री पेमा खांडु अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। पूरे राज्य में जिस तरह की स्थिति बनी हुई है उससे कोई भी डर के कारण घर से बाहर नहीं निकल रहा है। हालत को नाजुक होता देख राष्ट्रपति शासन लागू करने पर भी विचार किया जा रहा है। वहीं तनाव क्षेत्र में किसी भी तरह का मूवमेंट नहीं हो रहा है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि आखिर कब तक में इस हिंसक लड़ाई पर विराम लग रहा है? क्या अपने आत्म सम्मान की लड़ाई लड़ने का सिर्फ और सिर्फ एक यही तरीका है?

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