1991 में राजीव गांधी की हत्या के समय SPG अधिनियम में संशोधन करके SPG सिक्योरिटी को पूर्व प्रधानमंत्रियों के सभी परिजनों को 10 साल तक देने की बात कही गई थी. फिर 2003 में वाजपेयी सरकार ने इस बिल में संसोधन करते हुए इसकी समय सीमा को घटाकर कर 10 साल की जगह एक साल कर दिया था. इसके साथ यह फैसला भी लिया गया था कि, आने वाले समय में केंद्र सरकार खतरे की समीक्षा करते हुए SPG सुरक्षा की समय सीमा कम–ज्यादा कर सकती हैं.

मनमोहन के साथ रहती SPG सिक्योरिटी, फोटो सोर्स - गूगल
मनमोहन के साथ रहती SPG सिक्योरिटी, फोटो सोर्स – गूगल

संसोधित नियम के आधार पर तब से समय के साथ पूर्व प्रधानमंत्रियों की सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की जाती रही है. केंद्र सरकार ने इसी खतरे का आकलन करने के बाद पाया कि अब गांधी परिवार को किसी तरह का कोई सीधा खतरा नहीं है. जिसके बाद केन्द्र की बीजेपी सरकार ने ‘स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG)’ की सुरक्षा पाने वाले लोगों के लिए नया दिशा-निर्देश जारी करते हुए कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी, पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की SPG सिक्योरिटी हटाने का आदेश दिया हैं.

प्रधानमंत्री के साथ हमेशा साये की तरह रहते है SPG कमांडो, फोटो सोर्स - गूगल
प्रधानमंत्री के साथ हमेशा साये की तरह रहते है SPG कमांडो, फोटो सोर्स – गूगल

एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के मुताबिक, बीते सोमवार को केंद्र सरकार ने साफ कहा था कि, SPG सुरक्षा पाने वाले नेता जब भी विदेश यात्रा करेंगे, उनके साथ SPG सुरक्षाकर्मी मौजूद रहेंगे. इस फ़ैसले का विरोध करते हुए कई नेताओं द्वारा विदेश जाने के दौरान SPG सुरक्षाकर्मी नहीं ले जाने पर यह फैसला किया गया है.

इसी साल के अगस्‍त महीने में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की SPG सुरक्षा भी हटाकर उन्‍हें भी z+ सुरक्षा उपलब्‍ध कराई है. SPG सुरक्षा हटाने से पहले प्रियंका गांधी को नोटिस भेजकर उनके बंगले को लेकर भी सवाल पूछा गया था. इस पर जवाब देते हुए प्रियंका गांधी ने कहा था कि उनको सरकारी बंगला छोड़ने में कोई दिक्‍कत नहीं है

केंद्र सरकार द्वारा दिए गए दिशा-निर्देश में SPG सुरक्षा पाने वालों को सरकारी दिशा-निर्देशों का हार हाल में पालन करना अनिवार्य ही होगा. इस दिशा-निर्देश को नहीं माने-जाने की सूरत में सुरक्षा के लिहाज से उस नेता की विदेश यात्रा भी रद्द करने का आदेश भी केंद्र सरकार दे सकती है. SPG सुरक्षाकर्मी हमेशा यह विशेष सुरक्षा पाने वाले के साथ हर वक्त मौजूद रहते हैं.

 SPG सुरक्षा के जवान, फोटो सोर्स - गूगल
SPG सुरक्षा के जवान, फोटो सोर्स – गूगल

गांधी परिवार की SPG सुरक्षा हटाऐ जाने को लेकर डी. राजा ने बीजेपी के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की कही एक बात याद दिलाते हुए कहा कि,”सरकारें आती जाती रहती हैं, लेकिन इस देश के लोकतंत्र को जिंदा रहना चाहिए”.

डी. राजा ने कहा,

गृह मंत्रालय को फैसले लेते समय उसके नफा-नुकसान के बारे में ध्‍यान रखना चाहिए. BJP सत्‍ता में आने के बाद से देश की हर संवैधानिक संस्‍था और व्‍यवस्‍था को कमतर करने की कोशिश कर रही है. इससे बीजेपी की राजनीतिक मंशा साफ दिखाई दे रही है.

क्या फर्क होता है SPG सुरक्षा और Z प्लस सुरक्षा में

दरअसल केंद्र सरकार के इस फैसले से पहले भारत में प्रधानमंत्री और गांधी परिवार को SPG की सुरक्षा प्राप्त थी. देश में सुरक्षा का सबसे ऊंचा स्तर SPG का ही होता है.

SPG का एक ही मूल मंत्र होता है "शौर्यम् समर्पणम् सूरक्षणम् ", फोटो सोर्स - गूगल
SPG का एक ही मूल मंत्र होता है “शौर्यम् समर्पणम् सूरक्षणम् “, फोटो सोर्स – गूगल

देश की सबसे पेशेवर एवं फौलादी जवानों वाली Special Protection Group- SPG(विशेष सुरक्षा दल) का गठन 2 जून, 1988 को भारत की संसद के एक अधिनियम पारित करके किया गया था. अधिनियम के मुताबिक SPG सुरक्षा गृह मंत्रालय के अधीन रहेगा. SPG का मुख्यालय नई दिल्ली में है. SPG, केंद्र सरकार का सबसे विशेष सुरक्षाबल होता है. SPG कमांडो की तुलना अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा करने वाली ‘US Secret Service‘ से की जाती है. SPG में शामिल होने वाले जवान पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स (BSF, CISF, ITBP, CRPF) से किया जाता है. SPG कमांडो देश की सबसे पेशेवर एवं आधुनिकतम सुरक्षा बलों में से एक है.

सबसे घातक होने के साथ-साथ सबसे रक्षात्मक कमांडोज़ होते हैं SPG, फोटो सोर्स - गूगल
सबसे घातक होने के साथ-साथ सबसे रक्षात्मक कमांडोज़ होते हैं SPG, फोटो सोर्स – गूगल

एक फुली ऑटोमेटिक गन FNF-2000 असॉल्ट राइफल से लैस SPG कमांडोज के पास ग्लोक-17 नाम की एक खतरनाक पिस्टल भी होती है. SPG कमांडो की सेफ्टी के लिए इन्हें एक लाइट वेट बुलेटप्रूफ जैकेट भी दी जाती है. इसके साथ ही अपने साथी से बात करने के लिए SPG कमांडोज़ कान में लगे ईयर प्लग या फिर वॉकी-टॉकी का सहारा लेते हैं. इनके जूते की खासियत ये होती है कि ये कभी किसी भी प्रकर की जमीन पर फिसलते नहीं हैं. वहीं हाथों के लिए खास दस्ताने होते है जो कमांडो को चोट लगने से बचाते हैं. किसी हमले से आखों को बचाने के लिए SPG कमांडोज को काले रंग का एक खास चश्मा दिया जाता हैं.

SPG कमांडोज़, फोटो सोर्स - गूगल
SPG कमांडोज़, फोटो सोर्स – गूगल

सुरक्षा के दृष्टि से दूसरे नंबर की सबसे मजबूत Z प्लस सिक्योरिटी

ज़ेड प्लस सुरक्षा देश के प्रमुख मुख्यमंत्रियों को मिलती हैं , फोटो सोर्स - गूगल.
ज़ेड प्लस सुरक्षा देश के प्रमुख मुख्यमंत्रियों को मिलती हैं , फोटो सोर्स – गूगल.

जेड प्लस(Z plus) सुरक्षा, भारत की दूसरी सबसे सर्वोच्च सुरक्षा है. इस श्रेणी में देश के विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा में 36 जवान तैनात होते हैं. इनमें 10 से ज्यादा NSG कमांडो होते हैं. इसके साथ ही इसमे शामिल बाकी के जवान दिल्ली पुलिस, ITBP या CRPF के कमांडो और राज्य के पुलिसकर्मी से होते हैं. Z प्लस सुरक्षा में लगे NSG कमांडो के पास MP-5 मशीन गन के साथ-साथ आधुनिक संचार उपकरण से लैस होते है.

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