देश की तमाम ख़बरों के साथ ये भी एक ख़बर है। देश की पुरानी सरकार को एक नई सरकार बने कुछ ही दिन हुए हैं। राष्ट्रपति भवन में नई सरकार और नए मंत्रियों ने शपथ भी ले ली है कि मैं फला आदमी फला पद की पूरी ईमानदारी के साथ संविधान को सबसे आगे रखकर और मान कर, बगैर किसी गुस्से या नफरत की भावना से देश और देशवासियों की सेवा करूंगा। जनता लोग बधाई हो..। आपको पिछले 72 सालों की तरह ही फिर से ईमानदार लोग मिल गए हैं जो, आपकी सेवा करेंगे। आज की बात सेवा से ही जुड़ी हुई है।

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प्रधानमंत्री मोदी/ फोटो सोर्स- गूगल

असल में देश की 17वीं लोकसभा का पहला सत्र 17 जून से शुरू होने वाला है। साथ ही, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली नई सरकार अपना पहला बजट पांच जुलाई को संसद में पेश करेगी। चलिए, बजट तो पेश हो ही जाएगा अपने टाइम से। लेकिन असल में इस सत्र की शुरुआत में ही कुछ अध्यादेश पेश होने वाले हैं। जिन्हें मोदी सरकार अब पक्का क़ानून बनाने की तैयारी में हैं। इनमें से कई ऐसे अध्यादेश हैं, जिससे आप भली-भांति परिचित हैं। जैसे कि ट्रिपल-तलाक़(मुस्लिम वुमेन- प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज) का बिल। जो कि अध्यादेश के रूप में तो देश के सामने आ गया लेकिन, पुख्ता क़ानून नहीं बन पाया। जिसका ज़ोरों-शोरों से विरोध भी हुआ और कई लोगों के बीच समर्थन भी।

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प्रतिकात्मक तस्वीर/ फोटो सोर्स- गूगल

अब जिस सरकार को देश की जनता ने चुना है देखते हैं, वो कौन सा बिल संसद के पहले ही सत्र में क़ानून के रूप में देखना चाहती है। ये हैं वो 10 अध्यादेश जो पहले सत्र में क़ानून बन सकते है:-

1- मुस्लिम वुमेन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज) दूसरा अध्यादेश: यह अध्यादेश साल 2019 में 21 फरवरी को लाया गया था।

2- इंडियन मेडिकल काउंसिल (संशोधन) दूसरा अध्यादेश: यह अध्यादेश 21 फरवरी, 2019 को लाया गया था।

3- कंपनी सुधार (दूसरा अध्यादेश): यह अध्यादेश 21 फरवरी, 2019 को लाया गया था।

4- अनियमित जमा योजनाओं के अध्यादेश पर प्रतिबंध: यह अध्यादेश 21 फरवरी, 2019 को लाया गया था।

5- जम्मू एवं कश्मीर आरक्षण (संशोधन) अध्यादेश: यह अध्यादेश 1 मार्च 2019 को लाया गया था।

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प्रतिकात्मक तस्वीर/ फोटो सोर्स- गूगल

6- आंध्र एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस: यह अध्यादेश 2 मार्च, 2019 को लाया गया था।

7- न्यू दिल्ली इंटरनेशनल आरबिट्रेशन सेंटर ऑर्डिनेंस: यह अध्यादेश 2 मार्च, 2019 को लाया गया था।

8- होम्योपैथी सेंट्रल काउंसिल (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस: यह अध्यादेश 2 मार्च, 2019 को लाया गया था।

9- स्पेशल इकोनॉमिक जोन (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस: यह अध्यादेश 2 मार्च, 2019 को लाया गया था।

10- सेंट्रल एजुकेशन इंस्टिट्यूशंस (रिजर्वेशन इन टीचर्स कैडर) ऑर्डिनेंस: यह अध्यादेश भी 2 मार्च, 2019 को लाया गया था।

ये वो 10 बिल हैं, जिन्हें मोदी सरकार संसद से अपनी पिछली पारी में पास नहीं करवा पाई थी। लेकिन इस बार शायद सरकार मूड बना कर आई है और इस बार तो मोदी लहर नहीं, मोदी सुनामी है। तो फिर इस बार बिल तो पास होना बनता ही है, बाकी देखिए क्या होता है!

लेकिन अगर इन 10 विधेयकों को इस सत्र में मोदी सरकार दोनों सदनों से पास नहीं करा पाई तो, फिर से इन विधेयकों पर अध्यादेश लाना पड़ सकता है। उसकी वजह ये है कि क़ानून के मुताबिक़ अगर

‘इन अध्यादेशों को सत्र शुरू होने के 45 दिनों के अंदर कानून में बदलना होगा, नहीं तो उनकी अवधि समाप्त हो जाएगी’

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प्रतिकात्मक तस्वीर/ फोटो सोर्स- गूगल

इन 10 अध्यादेशों में चर्चित ट्रिपल तलाक़ बिल के अलावा भी कुछ ऐसे महत्वपूर्ण अध्यादेश हैं जिसे जानना ज़रूरी है। असल में भारतीय चिकित्सा परिषद अध्यादेश के जरिए एक कमेटी को गठित किया गया था जो, घोटाले में घिरे भारतीय चिकित्सा परिषद (MCI) का संचालन करती है। वहीं, अनियमित जमा योजना प्रतिबंध अध्यादेश के जरिए पोंजी योजनाओं और अनियमित जमा योजनाओं को दंडात्मक बनाया गया था। इस अध्यादेश को बनाने पर सरकार ने अपना तर्क रखा था कि,

‘इस अध्यादेश से सारदा घोटाला और रोज वैली चिट फंड घोटाला जैसे मामलों को रोकने में मदद मिलेगी’

अगर ऐसा हो सकता है, तब तो पक्का इन जैसे बिलों को जल्द से जल्द पास हो जाना चाहिए। बाकी इतिहास गवाह है कि जिन घोटालों में नेता शामिल हों, ऐसे घोटाले या तो सामने नहीं आते और अगर आ भी जाए तो कुछ अपवादों को छोड़ कर ज़्यादातर नेताओं को जेल नहीं होती। लेकिन ये भी जान लीजिए कि…

अध्यादेश होता क्या है?

असल में अध्यादेश का सीधा सा मतलब होता है कि जो पूरा क़ानून न हो लेकिन, क़ानून जैसी शक्ति रखता हो। अध्यादेश सरकार के लिए एक विशेष अधिकार के तौर पर काम करता है। इसकी ज़रूरत तब पड़ती है या कोई भी सरकार इस विशेष अधिकार का उपयोग तभी कर सकती है। जब संसद के दोनों सदन या कोई एक एक सदन न चल रहा हो। या फिर सरकार का कोई ज़रूरी बिल राज्य सभा में सांसदों की कम संख्या या किसी दूसरी वजह से लटका हो। तो ऐसी परिस्थिति में सरकार अध्यादेश लाने के विशेष अधिकार को इस्तेमाल करती है। ये बहुत स्पष्ट तरीक़े से जान लें कि अध्यादेश का असर कानूनी रूप से संसद के द्वारा बनाए गए क़ानून के बराबर ही होता है।

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प्रतिकात्मक तस्वीर/ फोटो सोर्स- गूगल

संविधान का अनुच्छेद-123 राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने का अधिकार देता है। लेकिन इस अनुच्छेद में ये साफ-साफ लिखा है कि अध्यादेश बेहद ज़रूरी या आपात स्थितियों में ही लाया जाना चाहिए।

वहीं पहला बजट पांच जुलाई को संसद में पेश करने पर सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शुक्रवार को बताया कि, ‘संसद का यह सत्र 40 दिनों तक चलेगा और और इसमें 30 बैठकें होंगी और संसद सत्र के पहले दो दिनों के दौरान नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाई जाएगी’

अच्छा ये भी जान लीजिए कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण, इंदिरा गांधी के बाद पहली महिला वित्तमंत्री होंगी जो संसद में बजट पेश करेंगी।

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प्रतिकात्मक तस्वीर/ फोटो सोर्स- गूगल

प्रधानमंत्री मोदी सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में एक फरवरी को अंतरिम बजट पेश किया था क्योंकि आगे लोकसभा चुनाव आने वाला था। चार जुलाई को आर्थिक सर्वेक्षण संसद में पेश किया जाएगा। बता दें कि आर्थिक सर्वेक्षण में देश की अर्थव्यवस्था की तस्वीर पेश की जाती है।

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