बिहार में बहार है नीतीशे कुमार है. क्यों करे विचार, ठीके तो है नीतीश कुमार. क्यों करें विचार जब हैं ही नीतीश कुमार. इन सभी नारों के पोस्टर्स को बिहार विधानसभा चुानव को देखते हुए जगह-जगह लगया गया है ताकि, यह बताया जा सके कि बिहार में इस बार भी नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बनेंगे. उनके आगे कोई टिक ही नहीं सकता.

हालांकि, इसको लेकर बगावत अंदर से ही शुरू हो गई है. जेडीयू की सहयोगी पार्टी भाजपा ने एक अलग ही राग अलापना शुरू कर दिया है. उसका कहना है कि नीतीश कुमार बहुत मुख्यमंत्री बन लिए. अब एक मौका उन्हें भाजपा को भी देना चाहिए.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, फोटो सोर्स: गूगल
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, फोटो सोर्स: गूगल

हुआ क्या है?

बिहार भाजपा के एक वरिष्ट नेता ने सोमवार को बयान दिया है. इस बयान ने बिहार में सियासी माहौल गरमा दिया है. भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य संजय पासवान का कहना है कि

नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनने का मौका भाजपा को देना चाहिए.

पहले से ही एनआरसी को बिहार में लाने को लेकर भाजपा और जेडयू आमने-सामने हैं. ऊपर से इस बयान ने आग में घी डालने का काम किया है. इतना ही नहीं जेडयू, बिहार में मोदी के बजाय नीतीश कुमार के चेहरे को प्रमोट करने में लगी है. इसने भाजपा और जेडयू के गठबंधन पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं.

 राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य संजय पासवान, फोटो सोर्स: गूगल
बिहार भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य संजय पासवान, फोटो सोर्स: गूगल

दरअसल, संजय पासवान ने एक न्यूज एजेंसी बयान दिया कि

हमनें नीतीश कुमार पर बतौर मुख्यमंत्री 15 सालों तक भरोसा किया. अब उन्हें एक मौका भाजपा को देना चाहिए.

यहीं से ये बयान पहले स्थानिया मीडिया और फिर मेनस्ट्रीम मीडिया में छा गया. वैसे भी भाजपा और जेडयू के बीच 2014 के बाद से ही तू-तू, मैं-मैं की ख़बरें आम हो गई है.

तीन तलाक, अनुच्छेद 370 से लेकर राम मंदिर तक के फैसलों में जेडयू ने कभी भाजपा का समर्थन नहीं किया. इसके एनआरसी को बिहार में लाने को लेकर भी ये दोनों एक-दूसरे से भिड़े पड़े हैं.

इसी को लेकर बीबीसी ने संजय पासवान से बात की है.

संजया पासवान का कहना है,

हां, मैंने कहा है कि नीतीश कुमार को एक मौका भाजपा को देना चाहिए. उसके पीछे तमाम वजहें हैं. सबसे बड़ी वजह तो ये है कि वे हमारे कोर इश्यूज राम मंदिर, ट्रिपल तलाक, अनुच्छेद 370 और एनआरसी को लेकर अलग विचार रखते हैं. इतनी सारी असहमतियों के साथ भी जब वोट भाजपा और नरेंद्र मोदी के नाम पर ही मिल रहे हैं तो, क्यों नहीं नीतीश जी एक मौका भाजपा के किसी सदस्य को मुख्यमंत्री बनने के लिए दे देते हैं! हम भी सरकार चला लेंगे. नीतीश जी का तो इतिहास भी रहा है. बिना किसी स्वार्थ के वे जीतनराम मांझी तक को मुख्यमंत्री बना दिए थे.

इसके अलावा बीबीसी ने जब उनसे सवाल पूछा कि, पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री बनाने की बात छिड़ी है. लेकिन, भाजपा के पास मुख्यमंत्री पद का चेहरा कौन है? क्या ये भी तय कर लिया गया है?

इस सवाल पर संजय पासवान कहते हैं,

हमारे पास चेहरों की कमी नहीं है. अभी जो हमारे डिप्टी सीएम सुशिल मोदी हैं, वो क्या कम हैं! हमारे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय जी भी हैं. जिनके पास नेतृत्व का अनुभव भी है. हमारे यही दोनों चेहरे काफ़ी हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, फोटो सोर्स: गूगल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, फोटो सोर्स: गूगल

इस जवाब के बाद बीबीसी ने उनसे दूसरा सलवाल पूछा कि, जदयू ने अपना चेहरा पहले ही चुन लिया है, नीतीश कुमार को. क्या भाजपा उन्हें इस बार पूरी तरह खारिज करने का मन बना चुकी है?

संजय पासवान कहते हैं,

मुझे नहीं पता किस ने नीतीश कुमार को अपना चेहरा चुना है. हालांकि नए पोस्टरों में ऐसा ज़रूर दिख रहा है. वो किसने लगाया, नहीं लगाया, इस पर कोई बात नहीं कहेंगे. लेकिन सच यही है कि पिछले लोकसभा चुनाव में हमें वोट नरेंद्र मोदी के नाम पर मिले हैं. हमारा चेहरा नरेंद्र मोदी ही हैं और रहेंगे.

वहीं जब इसको लेकर भाजपा और जेडीयू के अन्य नेताओं से बात की गई तो, उन्होंने इससे अपना पला झाड़ लिया और उसे संजय पासवान का निजी बयान करार दे दिया.

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