प्रशांत किशोर एक ऐसा नाम है जिसे दिल्ली चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी ने चुना है। प्रशांत किशोर के कंधे पर ही पार्टी की नैया पार लगाने की जिम्मेदारी दी गई है। उनके पिछले को रिकॉर्ड्स देखते हुए यह बिल्कुल कहा जा सकता है कि उन्हें अपने काम में महारथ हासिल है। क्योंकि साल 2014 में बीजेपी के लिए कैम्पेनिंग करते हुए लोकसभा चुनाव जितवा चुके हैं। खैर, दिल्ली में AAP के लिए उन्होंने चुनावी कैंपेन के लिए थीम सॉन्ग बनाया है, जो जितना वायरल हो रहा है उतना ही उस पर बवाल भी हो रहा है।

मनोज तिवारी, सोर्स-गूगल

मनोज तिवारी, सोर्स-गूगल

दरअसल, प्रशांत किशोर ने जिस कैंपेन के लिए थीम सॉन्ग बनाया है, वह दिल्ली के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी की फिल्मों से लिए गए कुछ सींस से बना है। जिसके बाद जमकर बवाल हो रहा है। आम आदमी पार्टी ने मनोज तिवारी को टैग करते हुए वीडियो को अपने ट्विटर पर भी डाला है। जिसमें कैप्शन है-

‘लगे रहो केजरीवाल’ गाना इतना अच्छा है कि मनोज तिवारी सर भी उसकी धुन पर नाच रहे हैं। 

इस वीडियो के बाद बीजेपी दिल्ली ने इसकी शिकायत चुनाव आयोग से की और साथ ही आम आदमी पार्टी को एक नोटिस भेज कर 500 करोड़ रुपये हर्जाना भरने की मांग की है। इस वीडियो के वायरल होने के बाद मनोज तिवारी ने कहा कि आम आदमी पार्टी को चुनाव प्रचार के लिए अपने थीम सॉन्ग में मेरे वीडियो को इस्तेमाल करने का अधिकार किसने दिया। उन्होंने बौद्धिक संपदा अधिकार का उल्लंघन किया है। जिसके लिए 500 करोड़ रुपये हर्जाने के तौर पर भरने की मांग की गई है। इस पर अभी तक AAP की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

मामला यही खत्म हो जाता तो समझ आता लेकिन, अब बीजेपी ने अपने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट किया है। इस वीडियो में मनोज तिवारी के बारे में सब कुछ बताया गया है। कैसे करियर की शुरुआत हुई। बीएचयू भी गए और फिर 10 साल फिल्मों में काम करने के बाद दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष तक की जर्नी दिखाई गई है। इस वीडियो में उन्हें ‘पूर्वांचल की शान’ कहा गया है। इस वीडियो की खास बात ये है कि इसमें V/O भोजपुरी में है। पहले ये वीडियो देखिए।

इस वीडियो में अगर आप देखें तो पहले भोजपुरी की भाषा की अपनी मर्यादा होती है, उसके साथ खिलवाड़ किया गया है। AAP पर भाषा का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाने वाली बीजेपी ने भी इस वीडियो में वही गलती की है। रे! एक ऐसा शब्द जिससे किसी भी तरह से सम्मान तो नहीं दिख रहा है। अब बात ‘पूर्वांचल की शान’ की भी कर लें। मनोज तिवारी को पूर्वांचल की शान कहने वाली बीजेपी के पास भोजपुरी ज्ञान की कमी दिख रही है। मनोज तिवारी अगर पूर्वांचल की शान होंगे तो शायद भिखारी ठाकुर और शारदा सिन्हा के बारे में बीजेपी कुछ कहेगी या नहीं? मनोज तिवारी ने जिस वक्त भोजपुरी फिल्मों में एंट्री किया था, उससे पहले की भोजपुरी फिल्मों और मनोज तिवारी की फिल्मों को देखा जाए तो समझ आएगा।

आज जिस तरह से भोजपुरी फिल्मों की अश्लीलता अपने चरम पर पहुंच गई है, उसके जन्मदाता मनोज तिवारी ही हैं। हो सकता है कि बीजेपी ने अपनी पार्टी के अंदर ही पूरा पूर्वांचल समेट रखा हो इसलिए शायद उनके लिए मनोज तिवारी पूर्वांचल की शान हैं। लेकिन, जिस पूर्वांचल की पहचान गौतम बुद्ध, चाणक्य, चन्द्रगुप्त और अशोक जैसे लोगों से होती हो। तक्षशिला और विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालय कभी पूर्वांचल की पहचान हों, ऐसे में मनोज तिवारी को पूर्वांचल की शान कहना किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं है।

हां ये जरुर है कि बिहार के एक छोटे से गांव से आकर दिल्ली में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बनना उपलब्धि है। लेकिन, केवल उनकी भोजपुरी फिल्मों को देखकर कहा जाए कि वह पूर्वांचल की शान हैं तो क्या यह सही है? यह सवाल हमेशा ही रहेगा। बीजेपी को भिखारी ठाकुर, शारदा सिन्हा, चित्रगुप्त जैसे कलाकारों के बारे में भी एक बार सोच लेना चाहिए। चलिए एक समय के लिए यह चल सकता है कि कोई भी इंसान बीजेपी ज्वॉइन करने के बाद सबसे पवित्र और बेगुनाह हो जाता है जैसे कि गुजरात बीजेपी उपाध्यक्ष जयंती भानुशाली। लेकिन, हकीकत तो यही है कि जिनके मुंह से रिकिंया के पापा, बेबी बियर पीके नाचे लगली छम्मक छम्मक छम, लइकी हिय हाई वोल्टेज वाली करंट मारे ली जैसे पवित्र गाने निकले हों, वो पूर्वांचल का शान तो कत्तई नहीं हो सकता।