जब किसी का इश्क परवान चढ़ता है तो जुनून में लोग कुछ भी करने को तैयार होते है। लेकिन जब यही इश्क सत्ता की कुर्सी से हो तो फिर अलग ही माहौल बन जाता है। कुछ ऐसा ही माहौल इस वक्त बिहार में है। बिहार की राजनीति का पूरे भारत में प्रभाव रहता है। लेकिन बिहार के कुछ नेता कहे या बाहुबली जिनका बिहार के राजनीति पर कंट्रोल होता है। चाहे वो सत्ता में हो या ना हो। इस बार के लोकसभा में यह तस्वीर बिल्कुल साफ होती नज़र आ रही है।

बिहार में इस वक्त बीजेपी और राजद दोनों पार्टियां अपनी सहयोगी पार्टियों के साथ गठबंधन कर लोकसभा चुनाव में दस्तक दे रही है। एक को गठबंधन तो दूसरे को महागठबंधन नाम दिया गया है। गठबंधन में बीजेपी-जेडीयू और रामविलास पासवान की लोजपा शामिल हैं तो दूसरी ओर महागठबंधन जिसमें राष्ट्रीय जनता दल यानी आरजेडी, कांग्रेस, उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी और जीतनराम मांझी की हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा शामिल हैं। लेकिन महागठबंधन में राहुल गांधी, जीतनराम मांझी जैसे दिग्गज नेता के होने के बावजूद कमान लालु प्रसाद यादव के हाथों में है। जो इस वक्त जेल में बन्द है।

लालु यादव ऐसे पहले नेता नहीं है जो जेल  में बन्द होकर भी राजनीति को अपने अनुसार चला रहे है बल्कि बिहार के ऐसे कई नेता है जो इस लोकसभा चुनाव में जेल को ही अपना ऑफिस बनाए हुए हैं और जेल से ही अपने लोकसभा क्षेत्र को कंट्रोल कर रहे हैं।

लालु प्रसाद यादव

फोटो सोर्स: गूगल

चाहे सीट का बंटवारा हो या प्रत्याशी तय करने का मामला, सभी रणनीति का अंतिम रुप लालु यादव के पास जाकर ही होता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। लालु यादव राजनीति को जेल से ही कंट्रोल कर रहे है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि लालु जेल से ही सब कंट्रोल कर रहे है। कोई विवाद वही से शुरु होता है और खत्म भी वही से होता है। यानि साफ शब्दो में कहा जाए तो इस वक्त महागठबंधन की डोर लालु प्रसाद के हाथों में है।

राजबल्लभ

राजबल्लभ यादव, पूर्व विधायक नवादा, फोटो सोर्स: गूगल

बिहार के नवादा संसदीय क्षेत्र से पिछली बार गिरिराज सिंह से चुनाव हारने के बाद इस बार अपनी पत्नी को चुनावी मैदान में उतारने वाले राजबल्लभ फिलहाल जेल में हैं। राजद विधायक रहते हुए राजबल्लभ ने नाबालिग से दुष्कर्म किया था जिसकी सजा काट रहे हैं। राजबल्लभ विभा देवी के लिए जेल से इस बार चुनाव के लिए रणनीति तय कर रहे हैं। बताया जाता है कि वल्लभ नवादा के हर गलियों से वाकिफ है इसलिए यह दाव जेल में बैठ कर भी खेल रहे हैं।

डॉक्टर मोहम्मद शहाबुद्दीन

सीवान के पूर्व सांसद मो. शहाबुद्दीन और उनकी पत्नि हीना साहिब, फोटो सोर्स: गूगल

राजद के शासन काल में खौफ़ का दूसरा नाम अगर कोई था तो वह सीवान के पूर्व सांसद डॉक्टर मोहम्मद शहाबुद्दीन थे। लेकिन इस वक्त वह दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद है। अपने पति की जगह पर पिछले तीन बार से लोकसभा चुनाव में किस्मत अजमाने वाली पत्नी हीना साहिबा को जीत नसीब नहीं हो पाई है। लेकिन फिलहाल जिस तरह की जानकारी मिल रही है उसमें यह बात कही जा रही है कि दिल्ली के जेल में बन्द होने के बावजूद शहाबुद्दीन सीवान में अपनी पत्नी की सहायता कर रहे हैं। तिहाड़ में उनसे मिलने-जुलने वालों के जरिए सिवान तक संदेश-निर्देश पहुंच रहा है।

प्रभुनाथ सिंह

प्रभुनाथ सिंह, पूर्व सांसद महाराजगंज, बिहार, फोटो सोर्स: गूगल

राजद के सबसे चर्चित नेता और लालु यादव का सबसे ख़ास लोगों में से एक पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह भी इस वक्त हजारीबाग के जेल में बन्द हैं। विधायक अशोक सिंह की हत्या के जुर्म में सजा काट रहे प्रभुनाथ सिंह भाई को तीन बार और बेटे रणधीर सिंह को एक बार विधायक बनवाना उनकी प्रभुता को दर्शाता है। इस बार बेटे रणधीर कुमार सिंह को सांसद के रुप में देखने के लिए जेल से ही एड़ी चोटी एक कर रहे हैं।

आनंद मोहन 

आनंद मोहन, फोटो सोर्स: गूगल

इस बार बिहार के शिवहर लोकसभा क्षेत्र से आनंद मोहन की पत्नी लवली देवी ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनावी संग्राम में कुद गई हैं। ऐसे में डीएम जी. कृष्णैया की हत्या के मामले में जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व सांसद आनंद मोहन काफी पैनी नज़रो से शिवहर लोकसभा क्षेत्र को देख रहे हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि लवली देवी का पिछले दो लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाली भाजपा की रमा देवी के साथ कड़ी टक्कर होने की उम्मीद है। ऐसे में आनंद मोहन के समर्थक सहारसा जेल के बाहर ‘फाटक टूटेगा, आनंद मोहन छुटेगा’ के नारे लगाए जा रहे हैं।

इस बार सलाखों  के पीछे पांचो धुरंधर अपने परिजनों और दलिय प्रत्याशियों की जीत का गुणा-गणित कर रहे हैं। राजद के लिए जहां लालु रिंग मास्टर की भूमिका में है तो वही बाकी कैद में होते हुए सिंबल बांट रहे हैं। चुनाव आयोग ने इस बात को ध्यान में रखकर एक घोषणा की है जिसमें कहा गया कि मतदाता किसी भी बाहुबली या दबंग नेता के दबाव में आकर वोट ना दें।

कोई प्रत्याशी, नेता, पार्टी कार्यकर्ता या अपराधी गड़बड़ी या आचार संहिता का उल्लंघन करते दिखे तो आप इसकी शिकायत सी-विजिल एप पर तत्काल करें। पहचान गोपनीय रहेगी। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए पहली बार यह एप लॉन्‍च किया गया है। इस पर सूचना देने के सौ मिनट के भीतर ही कार्रवाई होगी। टोल फ्री नंबर 1950 पर कॉल करके भी गड़बड़ी की सूचना दी जा सकती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here