इन दिनों देश की घाटी का माहौल ऊपर से जितना शांत और ठीक दिख रहा है, शायद अंदर से है नहीं। मोदी सरकार ने जिस तरीक़े से अंदर ही अंदर पूरी प्लानिंग के साथ 5 अगस्त को  अनुच्छेद 370 ख़त्म कर दिया और इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर के सभी विशेष अधिकार ख़त्म हो गए। वह एक विशेष राज्य से सीधा एक यूटी बन गया। इन सभी चीज़ों और कार्यवाही पर दुनिया भर में चर्चाएं हो रही रही हैं। इसी बीच भारत और पाकिस्तान के चरमपंथियों की प्रतिक्रिया आई है।

क्या कहा है चरमपंथी समूहों ने?

इस तरह एका-एक अनुच्छेद 370 ख़त्म होने से अधिकत्तर चरमपंथी समूह एक्शन में आ गए हैं। चाहे वह सीमा के अंदर के हों या सीमा के उस पार के लेकिन, यहां एक बात जो ध्यान देने वाली है कि कश्मीर में मौजूद ऑनलाइन जिहादियों और चैनलों की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। जिसकी वजह है कि भारत सरकार द्वारा घाटी में इंटरनेट सेवाओं का पूरी तरह से बंद होना है।

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चरमपंथी समूह, फोटो सोर्स; रेउटर्स

इस इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में कोई न कोई ऑप्शन या रास्ता तो रहता ही है, हर किसी के पास। बिल्कुल इसी तर्ज़ पर बीबीसी के अनुसार इस्लामिक स्टेट समूह (आईएस) और अल-कायदा जैसे संगठनों का समर्थन करने वाले कई प्रो-जिहाद अकाउंट ने टेलिग्राम ऐप पर बताया है कि भारत और पाकिस्तान दोनों ने ही कश्मीर के लोगों के साथ धोखा किया है और अब सिर्फ जिहाद से ही कश्मीर विवाद का हल हो सकता है।

यही नहीं बल्कि सीमा के उस पार पाकिस्तान में मौजूद कई बड़े चरमपंथी समूहों ने भी भारत के इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इन प्रतिक्रिया देने वालों में जैश-ए-मोहम्मद भी शामिल है, जिसे पहले भी भारत में कई बड़े हमलों के लिए ज़िम्मेदार माना जाता रहा है। इस समूह का कहना है कि कश्मीर के विशेष अधिकारों को ख़त्म करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हार मान ली है।

जैश-ए-मोहम्मद के सरगना ने एक संदेश में कहा है कि,

“मुजाहिद्दीन ने जिहाद का एक अध्याय पूरा कर लिया है और कश्मीर में जिहाद का दूसरा चरण शुरू हो रहा है। अगर मुजाहिद्दीन सक्रिय कार्यवाही करते हैं तो दुश्मन डरेंगे और शांति और बातचीत करने की भीख मांगेंगे”

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जिहादी धर्मगुरु समी उल-हक, फोटो सोर्स; गूगल

साथ ही जिहाद समर्थक धर्मगुरुओं ने भी भारत सरकार के फैसले के जवाब में जिहाद करने की अपील की है। जिसमें पाकिस्तान में कई बड़े हमलों की ज़िम्मेदारी लेने वाले लश्कर-ए-झांगवी नाम के एक चैनल ने जिहादी धर्मगुरु समी उल-हक, जिसकी पाकिस्तान के रावलपिंडी में चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई थी। उसका एक बयान फॉरवर्ड किया है। जिसमें ये कह रहे हैं कि, “कश्मीर का मसला सिर्फ जिहाद से ही हल हो सकता है”

वहीं जिहाद समर्थक मौलाना अब्दुल अज़ीज़ ने एक फतवा जारी करते हुए कहा है कि, “अब हर पाकिस्तानी मुस्लिम के लिए अनिवार्य है कि वो कश्मीर के लिए जिहाद करे” और ये यहीं नहीं रुका बल्कि इसने दूसरे धर्मगुरुओं और धार्मिक संस्थाओं से भी ऐसे ही जाहिलाना फतवे जारी करने की अपील भी कर डाली।

साथ ही अज़ीज़ ने लोगों से कश्मीर के लिए बलिदान देने की भी अपील की और अफगानिस्तान में सोवियत संघ और अमेरिका के खिलाफ जिहादियों की जीत को भी दोहराया।

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मौलाना अब्दुल अज़ीज़, फोटो सोर्स; डॉन

इस बात का भी ज़िक्र किया गया कि अनुच्छेद 370 हटाने की भारत सरकार की आधिकारिक घोषणा करने से पहले ही जिहादियों ने ऑनलाइन इस बात का अंदाज़ा लगा लिया था कि कश्मीर के विशेष दर्जे को ख़त्म किया जा सकता है। इसलिए उन्होंने तभी ये चेतावनी जारी कर दी थी कि इंटरनेट सेवाएं बंद कर दिए जाएंगे। इसलिए एक-दूसरे से बात करने के लिए कोई दूसरा तरीका अपनाने की सलाह भी दे दी थी।

उदाहरण के लिए अनफाल जैसे आईएस समर्थक टेलिग्राम चैनलों को ही ले लीजिए, जिन्होंने कई मैसेज पोस्ट कर हिंसा भड़काने और ऑफलाइन होने से पहले जिहाद अपनाने के लिए लोगों को आमंत्रित भी कर दिया था। वहीं अल-कायदा समूह के अंसार गजवत उल-हिंद ने भी कश्मीर के लोगों से अपील की है कि, वो पारंपरिक पार्टियों को छोड़कर जिहाद में शामिल हो जाएं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स; बीबीसी

वहीं एक प्रमुख प्रो-जिहाद चैनल ‘स्ट्राइव टू बी अ मोमिन’ ने कश्मीरियों से कहा कि,

“जो भी हिंदू, कश्मीर आने के बारे में या राज्य में किसी तरह का व्यापार करने के लिए खरीदारी करने के बारे में सोचता भी है, उसे आतंकी घोषित कर दो”

साथ ही ज़ैद अल-अंसारी नाम के एक और चैनल ने ये पोस्ट किया कि, “जिहाद ही कश्मीर का हल है, ना संयुक्त राष्ट्र आपकी मदद करेगा और ना पाकिस्तान आपकी मदद करेगा”

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खुशहाल कश्मीरी नौजवान, फोटो सोर्स; नई दुनिया

इन सभी बातों से ये साबित होता है कि ये सभी चरमपंथी समूह चाहे वह देश की सीमा के उस पार के हों या इस पार के, किस तरह कश्मीरियों और मुस्लिमों को बहकानें की जिद्दोजहद में लगे हैं। इसलिए यही वक़्त है जब सभी कश्मीरियों और मुस्लिमों को चाहे वह किसी भी देश से ताल्लुक़ रखते हों, अपनी समझदारी और सब्र का परिचय देते हुए; ऐसी सभी जाहिलना कोशिशों को नाकाम कर दें।