चुनाव से पहले सरकार पर कई सवाल उठाये गए थे रोज़गार को लेकर. पर अब डर लगता है यह सवाल उठाने में, कहीं सरकार हमारी बातों को गंभीरता से लेकर हमें रोज़गार न दे दें. नहीं भाईसाहब आप गलत समझ रहे हैं हमें रोज़गार से नहीं बल्कि बंधुआ मजदूर बनने से डर लगता है. अब भी आप नहीं समझे होंगे, हमारा कहने का मतलब यह है कि ऐसे रोज़गार का क्या लाभ जिसमें आपको पगार ही न मिले. हम ऐसा क्यों कह रहे हैं? हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि –

बीएसएनएल यानी भारत संचार निगम लिमिटेड के कर्मचारियों का इं दिनों यही हाल है.

बीएसएनएल का नाम आपको याद है न?

यह वही कंपनी है जिसके बदौलत आज हम घर बैठे देश और विदेश के किसी भी हिस्से में संपर्क कर सकते हैं. यह एक दूरसंचार कंपनी है. अभी तक तो यह कंपनी ‘है’ पर हालात इसके ऐसे चल रहे हैं जिससे इस कंपनी को ‘थी’ बनने में ज्यादा वक़्त नहीं लगेगा.

फोटो सोर्स- गूगल

यही वज़ह है कि कंपनी ने भारत सरकार को SOS (आपातकाल की स्थिति में इस्तेमाल करने वाला शब्द) भेजा है. अगर एक सरकारी कंपनी इस तरह का संदेश सरकार को भेज रही है तो जायज़-सी बात है कि मामला गंभीर है. कंपनी ने इस तरह का संदेश सरकार से आर्थिक मदद के लिए भेजा है. कंपनी ऐसे मुकाम पर आ चुकी है कि अगर उसे आर्थिक मदद इस वक़्त भी नहीं दी गई तो कंपनी बंद हो सकती है. ऐसी स्थिति में बीएसएनएल के लोगों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है और इस मामले में हस्तक्षेप करने को कहा है. साथ ही यह भी कहा है कि जो कर्मचारी सही ढंग से काम नहीं कर रहे उन पर भी कार्यवाही करें.

ऑल इंडिया ग्रेजुएट इंजीनियर्स एंड टेलिकॉम ऑफिसर्स एसोसिएशन ने 18 जून को प्रधनामंत्री से आर्थिक मदद के लिए एक पत्र लिखा था. कंपनी दिसम्बर 2018 में ही 90,000 करोड़ के नुकसान में चल रही थी. बीएसएनएल सुर्ख़ियों में बनी हुई है. सुर्ख़ियों में बने रहने की वज़ह उसकी खराब परफॉर्मेंस है जिसकी वजह से लोग भी अब इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं. बीच में तो कई सारे बीएसएनएल के ऊपर मीम भी बनने लगे थे. बीएसएनएल को जो कंपनी सामानों की आपूर्ति करती है वह भी बीएसएनएल के वज़ह से घाटे में चल रही है.

उनका कहना है कि –

“बीएसएनएल पैसे नहीं चुकाती है. पैसा वसूल करना उनके लिए चुनौती बन चुका है.”

इससे यह मामला भी साफ़ होता है की सिर्फ कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों का पैसा बकाया नहीं है. जो भी किसी न किसी तरह से इस कंपनी से जुड़ा है वह लॉस में जा रहा है. यह एक सरकारी कंपनी है इसके बावजूद भी सिर्फ फरवरी के महीने में 1.76 लाख कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया गया है. कंपनी का मानना है कि अगर सरकार उनकी ज़रा-सी मदद कर दे तो वह फिर से प्रॉफिट मेकिंग कंपनी बन सकती है.

  • अब यहाँ सवाल यह उठता है कि बीएसएनएल आखिर ज़िम्मेदारी किसकी है? वहां काम कर रहे कर्मचारियों की या सरकार की?
  • क्यों वहां काम करने वालों को अपना हक़ का मांगने के लिए भी सरकार के सामने इतनी मिन्नतें करनी पड़ रही है?

2004 और 2005 में जितने लोग सब्सक्राइबर थे उसकी तुलना में आज आधे हो चुके हैं. जितने लोग सब्सक्राइबर बचे हैं उनमें भी लो-पेइंग कस्टमर ही बचे हैं. Jio के बाजार में आने से भी काफी फर्क पड़ा है. पहले भी विरोधी कंपनियां थी पर Jio के सस्ते पैक के साथ बाज़ार में आने से सबसे ज्यादा नुकसान बीएसएनएल को ही हुआ है. कुछ महीने पहले बीएसएनएल के चेयरमैन ने प्रधानमंत्री से कंपनी से रिलेटेड बात भी की थी पर उसके बदले में में मोदी जी के तरफ से कोई जवाब अभी नहीं आया है.

फोटो सोर्स- गूगल

ये हाल सिर्फ बीएसएनएल का नहीं है एमटीएनएल (महानगर टेलेफोन निगम लिमिटेड) का भी यही हाल चल रहा है. इन दोनों कंपनियों का कहना है कि 2010 से जब से इन्हें सभी स्पेक्ट्रम्स के लिए पैसे देने पड़ रहे हैं तब से कंपनियां लॉस में जा रही है. एमटीएनएल सिर्फ मुंबई और दिल्ली में चलता है जबकि बीएसएनएल बाकी सभी जगहों पर चलता है. एमटीएनएल भी लगातार लॉस दिखा रहा है और एक भी बार इस लॉस से उभर नहीं पाया है.

इस सबके बावजूद बीएसएनएल एक मात्र टेलिकॉम कंपनी है जिसके ऊपर कोई क़र्ज़ नहीं है. इसके विपरीत अन्य सभी कंपनियों के ऊपर काफी क़र्ज़ है. बीएसएनएल ने आज तक कभी अपने कर्मियों का वेतन नहीं रोका है सिवाय एक महीने के; जिसमें भी बीएसएनएल ने बिना किसी के सपोर्ट से खुद से ही समस्या का हल निकाला लिया था.

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स- गूगल

तो ये था पूरा मामला. इतने दूर तक आ ही गए हैं तो थोड़ा सवाल भी कर ले?

  • सरकार को क्या इन बातों की खबर नहीं थी कि सरकार के द्वारा चलाई जा रही कंपनी लॉस में जा रही है?
  • ऐसा तो नहीं हुआ की रातो-रात बीएसएनएल इतने घाटे में चला गया तब फिर सरकार ने इसपर कदम क्यों नहीं उठाया?

बीजेपी के राज्य में ही Jio की नींव रखी गई और वह बहुत अच्छे से फल-फूल रहा है और सरकार को यह दिख भी रहा होगा. बीएसएनएल भले ही सरकारी कंपनी हो पर किसी सरकारी कर्मचारी के पास आप बीएसएनएल का सिम या मोबाइल नहीं देखेंगे. हाँ जिओ ज़रूर देखने को मिल जाएगा. हमें मसला जिओ से नहीं है हम तो बस एक उदहारण दे रहे हैं कि अगर जिओ की तरक्की हो सकती है तो फिर बीएसएनएल की भी तरक्की हो सकती थी अगर सरकार नज़रंदाज़ नहीं करती.

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